खंडहर स्कूल में नहीं, रंगमंच और सामुदायिक भवन में पढ़ रहे बच्चे! शहडोल की शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल
जर्जर भवन के डर से खुले मंच पर लग रही कक्षाएं, गैस सिलेंडर के बीच पढ़ने को मजबूर छात्र
शहडोल। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल शहडोल जिले से सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां बुढ़ार विकासखंड के शासकीय माध्यमिक विद्यालय अतरिया के छात्र-छात्राएं जर्जर स्कूल भवन के कारण सामुदायिक भवन और खुले रंगमंच (दुर्गा पंडाल) में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि जहां बच्चे पढ़ रहे हैं, वहीं मध्याह्न भोजन भी तैयार किया जाता है और गैस सिलेंडर भी रखा रहता है, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों के लिए सुरक्षित भवन नहीं
अतरिया गांव में संचालित प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। भवन की छत में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं और कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ है। इसी वजह से स्कूल प्रशासन ने बच्चों को सामुदायिक भवन और गांव के सांस्कृतिक मंच पर बैठाकर पढ़ाना शुरू कर दिया है।
सरपंच बोले- कई बार अधिकारियों को दी जानकारी, लेकिन नहीं हुई सुनवाई
अतरिया गांव के सरपंच धनी लाल सिंह का कहना है कि गांव की सबसे बड़ी समस्या बच्चों की शिक्षा है। स्कूल भवन बेहद जर्जर होने के कारण बच्चों को वहां बैठाना जानलेवा साबित हो सकता है। इसलिए मजबूरी में सामुदायिक भवन और रंगमंच उपलब्ध कराया गया है।
सरपंच ने बताया कि इस संबंध में सांसद, कलेक्टर, पंचायत और शिक्षा विभाग सहित कई अधिकारियों को कई बार लिखित सूचना दी जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
शिक्षिका ने बताई मजबूरी
विद्यालय की शिक्षिका अनीता सिंह ने बताया कि स्कूल भवन पूरी तरह असुरक्षित हो चुका है। इसलिए बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सामुदायिक भवन में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। जगह कम होने के कारण कुछ बच्चों को रंगमंच पर बैठाना पड़ता है।
छात्रा की भावुक अपील
विद्यालय की छात्रा अमृता शर्मा ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से नए स्कूल भवन की मांग करते हुए कहा कि खंडहर हो चुके स्कूल की वजह से वे सामुदायिक भवन और खुले मंच पर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जहां पढ़ाई का उचित माहौल नहीं मिल पाता।
डीपीसी बोले- मामला संज्ञान में नहीं था
इस मामले में जिला परियोजना समन्वयक (DPC) अमरनाथ ने कहा कि उन्हें अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में स्कूल भवन जर्जर पाया जाता है तो बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विद्यालय को किसी सुरक्षित या निजी भवन में संचालित कराया जाएगा।
बड़ी बात
एक ओर सरकार शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर शहडोल के अतरिया गांव में मासूम बच्चे जर्जर भवन के कारण सामुदायिक भवन और खुले मंच पर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह तस्वीर ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
