लोकायुक्त का बड़ा खुलासा! अफसर की 2.80 करोड़ की आय, परिजनों समेत 11 करोड़ की संपत्ति का मिला सुराग
संयुक्त संचालक के ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा
लोकायुक्त पुलिस के कार्यवाहक निरीक्षक आशुतोष मिठास के अनुसार महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल (61) के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत की जांच के बाद लोकायुक्त टीम ने उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की।
✔ बहुमंजिला मकान
✔ डिपार्टमेंटल स्टोर
✔ जिम परिसर
✔ अन्य संबंधित ठिकाने
2.80 करोड़ की आय, 10.83 करोड़ की संपत्तियां
जांच में सामने आया कि कंडवाल की कुल ज्ञात वैध आय लगभग 2.80 करोड़ रुपये है। इसमें करीब 2.50 करोड़ रुपये सरकारी वेतन और 30 लाख रुपये कृषि आय शामिल हैं।
इसके विपरीत अब तक कंडवाल और उनके परिजनों से जुड़ी 10.83 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों का पता चला है। जांच में भूमि खरीद और भवन निर्माण पर लगभग 9.76 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी भी मिली है।
लोकायुक्त के अनुसार वैध आय की तुलना में संपत्ति और व्यय लगभग चार गुना अधिक पाए गए हैं।
घर और लॉकर से मिले लाखों के आभूषण
छापेमारी के दौरान अधिकारियों को घर और बैंक लॉकर से बड़ी मात्रा में कीमती सामान और आभूषण मिले।
💠 घर में मिले सामान की कीमत – 38.49 लाख रुपये
💠 बैंक लॉकर में मिले सोना-चांदी के आभूषण – 24.76 लाख रुपये
💠 घर से मिले अतिरिक्त आभूषण – 4.89 लाख रुपये
💠 डिपार्टमेंटल स्टोर का स्टॉक – 35.73 लाख रुपये
💠 जिम में मौजूद उपकरण एवं सामग्री – 2.71 लाख रुपये
पत्नी की सिलाई-बुनाई को बताया आय का स्रोत
पूछताछ के दौरान कंडवाल ने दावा किया कि उनकी गृहिणी पत्नी सिलाई-बुनाई का कार्य करती हैं और यह भी परिवार की आय का एक स्रोत रहा है। लोकायुक्त पुलिस ने कहा है कि इस दावे की पुष्टि के लिए उनकी पत्नी के आयकर रिटर्न और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि पत्नी की आय से जुड़े सभी दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाएगा।
बेटों का कारोबार और जिम से किराया
जांच में यह भी सामने आया कि डिपार्टमेंटल स्टोर का संचालन कंडवाल के दोनों बेटे करते हैं। वहीं जिम संचालक से उन्हें लगभग 1.25 लाख रुपये प्रतिमाह किराया प्राप्त होता है।
बैंक खातों पर लगी रोक
लोकायुक्त पुलिस ने कंडवाल और उनके परिजनों के बैंक खातों से होने वाले लेन-देन पर रोक लगा दी है। बैंकों से विस्तृत वित्तीय जानकारी प्राप्त होने के बाद संपत्तियों का अंतिम मूल्यांकन किया जाएगा।
अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 के तहत मामला दर्ज किया गया है और विस्तृत जांच जारी है।
