डीएनए टेस्ट से भागता रहा शिक्षक, हाईकोर्ट ने बच्चे का पिता और महिला का पति माना
राजगढ़ के चर्चित मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, भरण-पोषण देने के आदेश
राजगढ़ जिले का मामला
यह मामला राजगढ़ जिले से जुड़ा हुआ है, जहां एक महिला वर्षों से अपने वैवाहिक अधिकार और बेटे की पहचान के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही थी। महिला सीमाबाई का दावा था कि उसकी शादी शिक्षक बसंतीलाल से हुई थी और उसका पुत्र भी उसी संबंध से जन्मा है।
महिला के अनुसार, बेटे के जन्म के कुछ समय बाद शिक्षक ने उसे और बच्चे को घर से निकाल दिया। इसके बाद वह लगातार दोनों को स्वीकार करने से इनकार करता रहा।
निचली अदालतों से नहीं मिली राहत
अपने अधिकारों की लड़ाई में सीमाबाई पहले ग्राम न्यायालय पहुंची। वहां से राहत नहीं मिलने पर उसने सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी उसके दावे को स्वीकार नहीं किया गया।
आखिरकार महिला ने हाईकोर्ट की शरण ली और वर्ष 2014 में भरण-पोषण की मांग करते हुए याचिका दायर की।
शिक्षक ने बताया नौकरानी
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान शिक्षक बसंतीलाल ने दावा किया कि सीमाबाई उसकी पत्नी नहीं है। उसने कहा कि महिला को घरेलू कार्यों के लिए रखा गया था और वह केवल घर में काम करने वाली नौकरानी थी।
डीएनए जांच से बचते रहे शिक्षक
मामले की सुनवाई के दौरान पितृत्व की सच्चाई सामने लाने के लिए डीएनए टेस्ट और फिंगरप्रिंटिंग जांच की मांग की गई। लेकिन शिक्षक बसंतीलाल जांच कराने के लिए तैयार नहीं हुआ और लगातार इससे बचता रहा।
अदालत ने इस रवैये को गंभीरता से लिया। न्यायालय ने माना कि जब कोई व्यक्ति पितृत्व साबित करने वाली वैज्ञानिक जांच से लगातार बचता है, तो इससे उसके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर शिक्षक बसंतीलाल को बच्चे का पिता तथा सीमाबाई का पति माना। अदालत ने आदेश दिया कि वह दोनों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाए और निर्धारित राशि का भुगतान करे।
