🔥 RDVV में अल्प वेतनभोगी कर्मचारियों को लेकर बवाल, राजनीति के बीच अटका वेतन
जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) में अल्प वेतनभोगी कर्मचारियों को लेकर अचानक माहौल गरमा गया है। कर्मचारी संघ की सदस्यता को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक गलियारों से निकलकर कलेक्टर और एसपी कार्यालय तक पहुंच गया है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय की अंदरूनी राजनीति के चलते उनका वेतन तक रोक दिया गया है।
बताया जा रहा है कि कर्मचारी संघ के सदस्य बनने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के करीबी माने जाने वाले एक गुट की नाराजगी खुलकर सामने आ गई। आरोप है कि वर्तमान में कर्मचारी संघ की सत्ता से बाहर चल रहा वीरेंद्र पटेल गुट नहीं चाहता कि अल्प वेतनभोगी कर्मचारी संघ का हिस्सा बनें, क्योंकि इससे संघ अध्यक्ष संजय यादव को सीधा राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
💥 सदस्यता शुल्क सूची से हटाए गए नाम
विवाद तब और बढ़ गया जब कर्मचारियों के वेतन से हर माह कटने वाली सदस्यता शुल्क सूची से अचानक इन कर्मचारियों के नाम अलग कर दिए गए। कर्मचारियों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया को लागू करने के लिए उनका वेतन भुगतान तक रोक दिया गया।
संजय यादव का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन किसी व्यक्ति विशेष की राजनीति चमकाने के लिए कार्य नहीं कर सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को संघ से दूर रखने के लिए अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
📄 कलेक्टर और एसपी को सौंपी शिकायत
मामले को लेकर कर्मचारियों ने जबलपुर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को शिकायत सौंपते हुए शीघ्र वेतन भुगतान की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि कर्मचारी संघ की सदस्यता और वेतन भुगतान दो अलग-अलग विषय हैं, लेकिन उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।
वेतन न मिलने से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है और दैनिक जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि रविन्द्र बहादुर सिंह द्वारा उनकी अनुमति के बिना अलग वेतन पत्रक तैयार किया गया, जो नियमों के खिलाफ है।
📂 अचानक बदली गई फाइल से बढ़ा विवाद
जानकारी के मुताबिक अप्रैल माह के वेतन भुगतान के लिए सुरक्षा प्रभारी विशाल बन्ने द्वारा जो फाइल तैयार की गई थी, उसमें प्रति कर्मचारी 10 रुपये कर्मचारी संघ सदस्यता शुल्क काटे जाने का उल्लेख था। आरोप है कि इसी वजह से उक्त फाइल को गायब कर दिया गया।
इसके बाद स्टोर कीपर द्वारा नई फाइल चलाई गई, जिसमें सदस्यता शुल्क नहीं काटा जा रहा था। इसी बदलाव को लेकर अब कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है।
कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि प्रति कर्मचारी 10 रुपये की कटौती करते हुए उनका वेतन जल्द बैंक खातों में भेजा जाए, अन्यथा वे न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होंगे।
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