⚖️ जबलपुर की अस्मिता पर प्रहार बर्दाश्त नहीं, कानूनी संगठनों ने आंदोलन की दी चेतावनी
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच से भोपाल क्षेत्र को हटाकर इंदौर बेंच में शामिल करने की कथित साजिश को लेकर शहर में कानूनी और सामाजिक संगठनों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को आधिकारिक पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
इस विरोध प्रदर्शन और आगामी आंदोलन की रणनीति तैयार करने में डेमोक्रेटिक लॉयर्स फोरम के एडवोकेट ओ.पी. यादव, एडवोकेट रवींद्र गुप्ता, नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शन मंच के रजत भार्गव और एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
संगठनों का कहना है कि यदि भोपाल क्षेत्र को इंदौर बेंच से जोड़ दिया गया, तो जबलपुर हाईकोर्ट का कार्यक्षेत्र काफी सीमित हो जाएगा। इसे शहर की अस्मिता, न्यायिक गरिमा और प्रशासनिक महत्व पर सीधा हमला बताया जा रहा है।
🏛 पहले भी हो चुके हैं मुख्यालय हटाने के प्रयास
जबलपुर हाईकोर्ट के विभाजन या मुख्यालय को स्थानांतरित करने की कोशिशें पहले भी हो चुकी हैं। संगठनों ने याद दिलाया कि अतीत में हाईकोर्ट के मुख्य कार्यालय को जबलपुर से हटाने का गंभीर प्रयास किया गया था।
उस समय डॉ. पी.जी. नाजपांडे द्वारा इस निर्णय के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई थी। कानूनी लड़ाई और व्यापक विरोध के बाद ही मुख्यालय को स्थानांतरित करने का मामला टल पाया था।
⚠ आयोग और ट्रिब्यूनल बाहर स्थापित करने पर भी विरोध
संगठनों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की इस महत्वपूर्ण टिप्पणी के बावजूद प्रदेश के अधिकांश बड़े आयोग और ट्रिब्यूनल जबलपुर से बाहर स्थापित कर दिए गए हैं।
इस मामले को लेकर भी डॉ. पी.जी. नाजपांडे की एक अन्य जनहित याचिका वर्तमान में न्यायालय में लंबित है, जिस पर अंतिम फैसला आना बाकी है।
✊ आंदोलन की तैयारी में जुटे संगठन
अब इस नए प्रशासनिक बदलाव के विरोध में शहर के कई कानूनी और सामाजिक संगठन एक मंच पर आ गए हैं। डेमोक्रेटिक लॉयर्स फोरम और नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस फैसले का पुरजोर विरोध करेंगे।
संगठनों ने जल्द ही वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों की एक महाबैठक बुलाने की घोषणा की है। इस बैठक में आंदोलन की रूपरेखा, विरोध प्रदर्शन और आगामी रणनीति तय की जाएगी।
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