जबलपुर के निजी अस्पताल में बवाल: कांग्रेस नेता और डॉक्टरों के बीच हाथापाई, आयुष्मान योजना को लेकर विवाद गरमाया




जबलपुर, 14 जून 2025 – मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में एक बार फिर निजी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। तैयब अली चौक स्थित हार्ट इनफिनिटी हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज को लेकर उपजा विवाद उस समय हिंसक हो गया, जब कांग्रेस नेता विजय रजक अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे। बात इतनी बढ़ी कि अस्पताल स्टाफ और कांग्रेस नेता के बीच हाथापाई तक की नौबत आ गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मरीज की हालत गंभीर, परिजनों ने उठाए इलाज पर सवाल

पनागर निवासी विष्णु प्रसाद को सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद 14 जून को हार्ट इनफिनिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक जांच में दिल की धमनी में ब्लॉकेज सामने आया। परिजनों का आरोप है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल ने 20 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे। विरोध करने पर डॉक्टरों ने इलाज ‘मुफ्त’ में करने की बात तो कही, लेकिन मरीज को 24 घंटे के भीतर डिस्चार्ज कर दिया गया।

दो दिन बाद जब मरीज की हालत फिर बिगड़ी, परिजनों ने अस्पताल में फिर भर्ती कराया और ऑपरेशन की गुणवत्ता पर सवाल किए, तो डॉक्टर कथित रूप से भड़क उठे। आरोप है कि डॉक्टर ने तीखे लहजे में जवाब देते हुए परिजनों को बाहर निकलवाने के लिए बाउंसर बुला लिए।
कांग्रेस नेता ने किया हस्तक्षेप, फिर मचा हंगामा

मामले की भनक लगते ही कांग्रेस नेता विजय रजक अस्पताल पहुंचे और मरीज को दोबारा भर्ती कर इलाज की मांग की। रजक का कहना है कि अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड होते हुए भी इलाज से इनकार किया और मरीज के साथ गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया गया। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि विजय रजक और उनके साथियों ने डॉक्टरों से हाथापाई की और इलाज में बाधा डाली।

इस विवाद को लेकर अस्पताल प्रशासन ने ओमती थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने विजय रजक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। दूसरी ओर, विजय रजक ने भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से अस्पताल की कार्यशैली पर शिकायत की है।
पहले भी विवादों में रहा है यह अस्पताल

गौरतलब है कि हार्ट इनफिनिटी हॉस्पिटल पहले भी इलाज के खर्च और व्यवहार को लेकर विवादों में रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल में आयुष्मान योजना को लेकर पारदर्शिता की कमी, मरीजों के साथ रूखा व्यवहार और बिलिंग को लेकर अक्सर शिकायतें मिलती रही हैं।
पुलिस जांच जारी, स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। उधर, स्वास्थ्य विभाग ने भी अस्पताल से संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस प्रकरण में किसे दोषी ठहराया जाता है और आयुष्मान जैसी महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन में निजी अस्पतालों की भूमिका कितनी पारदर्शी है।

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