"जमीन विवाद में अंधा हुआ बेटा, पिता की लाश से किया किनारा"



बल्देवगढ़ (टीकमगढ़)।परिवारिक कलह ने यहां एक बेहद असंवेदनशील मोड़ ले लिया, जब एक बेटे ने अपने ही पिता के अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया। वजह—पिता द्वारा ज़मीन बेटी के नाम करना। बल्देवगढ़ थाना क्षेत्र के लालमऊ गांव में शुक्रवार को हुई इस घटना ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, गांव के 65 वर्षीय चिन्ना अहिरवार का शुक्रवार शाम करीब 4 बजे बीमारी के चलते निधन हो गया। लेकिन शनिवार दोपहर 2 बजे तक उनका अंतिम संस्कार नहीं हो सका। परिवार में मौजूद उनके इकलौते बेटे राजू अहिरवार ने अंतिम क्रिया करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि “जिसके नाम ज़मीन है, वही करे संस्कार।”

गांव के वरिष्ठ नागरिक रामकिशोर बताते हैं कि चिन्ना अहिरवार ने करीब तीन वर्ष पूर्व अपनी कृषि भूमि अपनी पुत्री के नाम कर दी थी। तभी से पिता-पुत्र के संबंधों में खटास आ गई थी और राजू ने उनसे बातचीत तक बंद कर दी थी। अब जब पिता का निधन हुआ, तो उसने भावनात्मक दायित्व निभाने से भी मुँह मोड़ लिया।

घटना की सूचना पर बल्देवगढ़ पुलिस मौके पर पहुँची और समझाइश का दौर शुरू हुआ। स्थानीय ग्रामीण और समाज के गणमान्य लोग भी राजू को समझाने में जुटे रहे, लेकिन वह अड़ा रहा। गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस सतर्कता के साथ मौके पर तैनात है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

यह घटना न केवल पारिवारिक संबंधों में आई गिरावट का प्रतीक है, बल्कि समाज को यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि क्या अब रिश्ते भी संपत्ति की शर्तों पर तय होंगे?


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