मध्य प्रदेश में सब इंस्पेक्टर भर्ती पर 8 वर्षों से सन्नाटा, पुलिस व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित


भोपाल।
मध्य प्रदेश में पुलिस सब इंस्पेक्टर की भर्ती पिछले 7 सालों से नहीं हुई है, और 2025 के लिए मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) द्वारा जारी शेड्यूल में भी इस महत्वपूर्ण परीक्षा का कोई उल्लेख नहीं है। यह स्थिति पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर के खाली पदों की भारी कमी को दर्शाती है, जिससे राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

थानों में व्यवस्था चरमराई

सब इंस्पेक्टर के खाली पदों को भरने की बजाय, पुलिस विभाग मजबूरी में थाना प्रभारी के पदों पर सब इंस्पेक्टरों को तैनात कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अस्थायी समाधान से विभागीय सेटअप बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। शांति व्यवस्था और अपराधों की जांच के लिए जरूरी बल की कमी के चलते अपराधों की रोकथाम और जांच प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है।

कर्मचारी चयन मंडल की निष्क्रियता

मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने अब तक कर्मचारी चयन मंडल को खाली पदों की जानकारी नहीं दी है। इस वजह से भर्ती प्रक्रिया को गति नहीं मिल पा रही है। MPESB ने 2025 में 20 परीक्षाएं आयोजित करने की योजना बनाई है, जिसमें पांच प्रवेश परीक्षाएं और 15 भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। इसके बावजूद, पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का नाम शामिल न होना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है।

अपराध बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन पुलिस बल की कमी

मध्य प्रदेश में अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर स्तर पर खाली पदों के कारण शांति व्यवस्था बनाए रखना और अपराधों की जांच करना पुलिस विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। आखिरी बार 2017 में सब इंस्पेक्टर के 611 पदों पर भर्ती की गई थी। पिछले 11 सालों में केवल चार बार इस स्तर की भर्ती निकाली गई है, जो विभागीय प्रशासन की कमजोरियों को उजागर करती है।

विभागीय उदासीनता का खामियाजा आम जनता को

पुलिस बल में पर्याप्त अधिकारियों की कमी से जनता को न्याय मिलने में देरी हो रही है। थाना स्तर पर अपराधों की जांच और शिकायतों का त्वरित निस्तारण असंभव सा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो राज्य की कानून व्यवस्था और अधिक कमजोर हो सकती है।

क्या सरकार जागेगी?

मध्य प्रदेश में सब इंस्पेक्टर भर्ती का अभाव केवल प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि यह राज्य की कानून व्यवस्था को कमजोर करने वाला एक गंभीर मुद्दा है। सरकार को इस विषय पर जल्द ही ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। वरना आने वाले वर्षों में पुलिस बल की कमी से राज्य की शांति और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

राज्य सरकार और संबंधित विभाग को चाहिए कि वे भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता दें और पुलिस बल में खाली पदों को भरने की दिशा में कदम उठाएं।

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