प्रसिद्ध संत सियाराम बाबा का निधन: नर्मदा तट पर आज अंतिम संस्कार, सीएम मोहन यादव होंगे शामिल

 


खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में आध्यात्मिक जगत की प्रमुख विभूति, संत सियाराम बाबा का बुधवार सुबह 6 बजे निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे और बीते कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका इलाज उनके आश्रम में ही चल रहा था। खरगोन एसपी धर्मराज मीना ने उनके निधन की पुष्टि की है। बाबा का अंतिम संस्कार आज शाम 4 बजे नर्मदा तट पर किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

आध्यात्मिक यात्रा और जीवन परिचय

संत सियाराम बाबा का जन्म 1933 में गुजरात के भावनगर में हुआ था। 17 वर्ष की आयु में उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर आध्यात्मिक मार्ग अपनाया। अपने गुरु के सान्निध्य में अध्ययन और तीर्थ यात्राएं करने के बाद 1962 में वह मध्य प्रदेश के भट्याण क्षेत्र में आकर स्थायी रूप से बस गए। बुधवार को मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती के शुभ संयोग पर उन्होंने अपने पार्थिव शरीर का त्याग कर परमात्मा में विलीन हो गए।

संत सियाराम बाबा की साधना और दिनचर्या

संत सियाराम बाबा की दिनचर्या अध्यात्म और भक्ति का अद्भुत उदाहरण थी। उनका दिन भगवान राम और मां नर्मदा की आराधना से प्रारंभ होता और उन्हीं की उपासना के साथ समाप्त होता। वह प्रतिदिन रामायण का पाठ करते और आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं को अपने हाथों से बनाई चाय प्रसादी स्वरूप देते थे।

बाबा ने नर्मदा किनारे 10 वर्षों तक खड़े रहकर मौन तपस्या की। उनके तप, त्याग और सरल स्वभाव ने उन्हें जन-जन के हृदय में स्थान दिलाया। बाबा अपने शिष्यों से अधिकतम 10 रुपये की भेंट ही स्वीकार करते थे।

दान और सेवा का उल्लेखनीय कार्य

सियाराम बाबा ने समाज सेवा और धार्मिक स्थलों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने नागलवाड़ी धाम, खारघर और जामगेट स्थित विंध्यवासिनी मंदिर के लिए 25 लाख रुपये से अधिक राशि दान की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भी 2 लाख रुपये का योगदान दिया। बाबा ने क्षेत्र में यात्री प्रतीक्षालय बनवाने के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में अपनी सहभागिता दी।

श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा स्रोत

सियाराम बाबा के जीवन का हर पहलू उनके त्याग, तपस्या और सादगी का परिचायक था। वह अपने भोजन का कुछ अंश प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते और शेष पशु-पक्षियों को अर्पित कर देते थे। श्रद्धालु उन्हें मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत मानते थे।

आज नर्मदा तट पर अंतिम विदाई

सियाराम बाबा को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों श्रद्धालु और संत समाज के लोग खरगोन में जुटने लगे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ अन्य गणमान्य लोग भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनका पार्थिव शरीर आश्रम में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है, जहां श्रद्धालु उन्हें नम आंखों से विदा कर रहे हैं।

संत सियाराम बाबा का जीवन हमें सेवा, त्याग और भक्ति का संदेश देता है। उनकी अनुपस्थिति आध्यात्मिक जगत में एक अपूरणीय क्षति है।

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