सिवनी। शिक्षा को समाज की रीढ़ माना जाता है और शिक्षक को भविष्य गढ़ने वाला कारीगर। भारत में गुरु-शिष्य परंपरा की समृद्ध परंपरा रही है, जहां गुरु अपने शिष्यों को न केवल शिक्षित करते हैं, बल्कि जीवन के आदर्श भी सिखाते हैं। लेकिन, सिवनी जिले से आई एक घटना ने इस परंपरा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
बरघाट विधानसभा क्षेत्र के मऊ स्थित शासकीय हाईस्कूल में एक शिक्षिका, टेमेश्वरी गौतम, का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में शिक्षिका बच्चों के बीच क्लासरूम की टेबल पर सोती हुई नजर आ रही हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि छात्र-छात्राएं पढ़ाई में व्यस्त हैं, वहीं शिक्षिका आराम फरमा रही हैं। इतना ही नहीं, शिक्षिका का बेटा भी उसी कक्षा में मौजूद है और मोबाइल पर रील्स देख रहा है।
पालक शिक्षक संघ ने की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही पालक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने स्कूल का दौरा किया और वीडियो बनाकर इसका पंचनामा तैयार किया। इसके बाद उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को इस मामले की शिकायत सौंपी। लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि जब पालक शिक्षक संघ के सदस्य स्कूल पहुंचे, तब भी शिक्षिका उसी स्थिति में सोई हुई पाई गई।
जिला शिक्षा अधिकारी का पलट जवाब
जब वायरल वीडियो और घटना के बारे में जिला शिक्षा अधिकारी से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि शिक्षिका मीटिंग में व्यस्त थीं और वह आराम नहीं कर रही थीं। अधिकारी का यह बयान वायरल वीडियो से बिल्कुल अलग नजर आता है, जिससे मामले में पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह घटना केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाती है। जहां एक ओर शिक्षक ब्लैकबोर्ड पर पढ़ाने में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर उसी कक्षा में एक शिक्षिका का सोना शिक्षा के प्रति उनकी उदासीनता को दर्शाता है।
माता-पिता और समाज के लिए यह घटना चिंताजनक है। क्या इस तरह की घटनाएं हमारे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बना सकती हैं? जब गुरु ही अपने दायित्व को नहीं समझेगा, तो छात्रों से अनुशासन और समर्पण की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
