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UP Election -2022 वोटरों के इस मूड का क्या है मतलब? यूपी 64%, उत्तराखंड 65%, गोवा 79%, मतदान.....

यूपी में कुछ जगहों पर कोहरा और हल्की ठंड होने के कारण 14 फरवरी को सुबह मतदान काफी सुस्त रहा। हालांकि बाद में यह बढ़ता गया और धूप खिलते ही वोटर पोलिंग बूथ पर बढ़ गए। 9 जिलों की 55 विधानसभा सीटों पर कौन जीतेगा, यह 10 मार्च को पता चलेगा लेकिन उम्मीदों और संभावनाओं की चर्चा शुरू हो गई है।

हाइलाइट्स
यूपी में 9 जिलों की 55 सीटों पर पहले चरण से ज्यादा मतदान
मुस्लिम वोटर्स निभाएंगे निर्णायक भूमिका, 10 मार्च को आएंगे नतीजे
जानकार कह रहे, मुस्लिम वोटर्स बढ़ने से सपा को हो सकता है फायदा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के 9 जिलों की 55 सीटों पर 14 फरवरी को वोट डाले गए। वोटिंग प्रतिशत के लिहाज से देखें तो पहले चरण से ज्यादा मतदान हुआ है। मतदाताओं का फैसला EVM पेटी में बंद हो गया है लेकिन सियासी गलियारों में वोटिंग पैटर्न का विश्लेषण शुरू हो गया है। कहां कितने वोट पड़े, इस लिहाज से वोटरों का मूड समझा जा रहा है। यह भी अनुमान लगाने की कोशिश हो रही है कि कम या ज्यादा वोट पड़ने पर किस सीट पर किसे फायदा हो सकता है। यूपी के साथ-साथ उत्तराखंड और गोवा के वोटिंग प्रतिशत के भी मायने निकाले जा रहे हैं। आइए समझते हैं।

पहले चरण से ज्यादा मतदान
दूसरे चरण में यूपी के जिन जिलों में वोट पड़े हैं, पिछली बार 2017 के चुनाव में यहां कुल वोटिंग प्रतिशत 65.53 रहा था। 2019 के लोकसभा चुनाव में 63.13 प्रतिशत मतदान हुआ था। चुनाव आयोग के वोटर टर्नआउट एप के मुताबिक इस बार 64.42% वोटिंग हुई है। पहले चरण में 62.4 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया था। यानी दूसरे चरण में आने वाले 9 जिलों- सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, अमरोहा, बदायूं, बरेली और शाहजहांपुर की विधानसभा सीटों पर ज्यादा मतदान हुआ है।

मुस्लिम वोटर्स निर्णायक
समझा जा रहा है कि 9 जिलों की करीब 40 सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम वोटर्स निर्णायक हैं। पहले चरण में भी मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में अच्छा मतदान हुआ है। मुजफ्फरनगर की थानाभवन सीट से भाजपा प्रत्याशी सुरेश राणा ने तो मुस्लिम बाहुल्य 40 बूथों पर फिर से मतदान कराने की मांग की थी लेकिन जिलाधिकारी ने इसे ठुकरा दिया। दूसरे चरण में भी मुस्लिम वोटर्स की लंबी लाइनें देख बुर्का विवाद शुरू हो गया था। भाजपा ने आरोप लगाया कि बुर्के की आड़ में फर्जी मतदान हो रहा है। रामपुर में दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। वे मां-बेटी हैं और उन पर केस दर्ज किए जाने की बात कही गई है। भाजपा ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखे खत में शिकायत की थी कि पर्दानशीं महिलाओं की पहचान किए बिना ही मतदान कराया जा रहा है। बूथों पर पर्याप्त संख्या में महिला पुलिसकर्मी तैनात किए जाने की मांग की गई। वैसे भी देश में हिजाब का मुद्दा गरमाया हुआ है।

देखिए कहां कितना हुआ मतदान

जिले का नाम वोटिंग प्रतिशत 2017 के चुनाव में
अमरोहा 72.02 72.04%
बरेली 61.37 62.47%
बिजनौर 65.92 66.32%
बदायूं 59.24 59.20%
मुरादाबाद 66.84 66.61%
रामपुर 63.97 63.71%
सहारनपुर 70.97 72.94%
संभल 62.79 65.10%
शाहजहांपुर 59.24 61.18%

दूसरे चरण की 40 सीटों की बात करें तो यहां कुछ पर 55 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स हैं। अगर प्रभाव देखें तो 80 प्रतिशत सीटों पर मुस्लिम वोटर्स निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं। पिछले चुनाव में 55 में से 38 सीटों पर भाजपा ने कमल का फूल खिलाया था। 15 सीटें सपा और दो कांग्रेस की झोली में गई थीं। सपा के 10 मुस्लिम उम्मीदवार जीते थे।

तो क्या सपा को होगा फायदा?
जानकारों की मानें तो पिछले विधानसभा चुनाव से इस बार समीकरण बदला हुआ है। पिछली बार बसपा को वही मुस्लिम वोट मिले थे जहां उम्मीदवार भी मुस्लिम थे। पिछली बार जाट-गुर्जर वोट भाजपा को मिले थे। इस बार सपा और आरएलडी एकसाथ चुनाव मैदान में हैं। ज्यादा संभावना इस बात की है कि मुस्लिम वोट सपा+आरएलडी उम्मीदवार को मिल सकते हैं। किसान आंदोलन, गन्ना जैसे मुद्दों पर जाट-गुर्जर वोटर भाजपा से नाराज दिख रहा था, ऐसे में वह सपा के साथ जा सकता है। इस लिहाज से देखें तो इन सीटों पर ज्यादा मतदान भाजपा के लिए टेंशन पैदा कर सकता है।

पारंपरिक वोटिंग पैटर्न समझा जाए तो मुस्लिम बाहुल्य बूथों पर ज्यादा मतदान यानी भाजपा को नुकसान हो सकता है। सीधे तौर पर इसका फायदा सपा को हो सकता है। हालांकि अगर ध्रुवीकरण होता है और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भाजपा हिंदू वोटों को एकजुट अपने पाले में करने में कामयाब रहती है तो पासा पलट सकता है। अभी पांच चरणों का चुनाव बाकी है और जनता के फैसले के लिए 10 मार्च का इंतजार करना होगा।

तीनों राज्यों का हाल
इसी तरह से 14 फरवरी को हुए तीनों राज्यों का वोटिंग प्रतिशत देखें तो गोवा में 79.16 प्रतिशत, यूपी में 64.42 प्रतिशत, उत्तराखंड में 65.1 प्रतिशत वोटिंग हुई है। यूपी में 55 सीटों पर 2017 में 65 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। उत्तराखंड में 65 प्रतिशत और गोवा में पिछली बार 82 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। ऐसे में कह सकते हैं कि वोटर्स ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। ज्यादा वोटिंग पर अलग-अलग पार्टियां अपने-अपने दावे कर सकती हैं लेकिन अंतिम नतीजे के लिए 10 मार्च का इंतजार करना होगा।

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