समझिए, क्या है यूनिक हेल्थ ID, कैसे मिलेगी और किस काम आएगी



कोरोना महामारी के इस कदर अफरातफरी मचाने के बाद से माना जा रहा है कि हर मुल्क अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार करेगा. हमारे यहां भी इसकी कोशिशें दिख रही हैं. अब नेशनल डिजिटल हेल्‍थ मिशन (NDHM) के तहत देश के हर नागरिक को आधार (Aadhaar) की तरह डिजिटल हेल्थ आईडी (Digital Health ID) दी जाएगी. ये एक तरह का रिकॉर्ड होगा, जो कार्डधारी की सेहत का सारा हाल रखेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2020 को ही एक कार्ड के बारे में बात की थी. तब देश मे कोरोना पीक पर जा चुका था. अब एनडीएचएम ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसकी शुरुआत कर दी है, जो देश के 6 राज्यों में चल रही है. लेकिन क्या ये कार्ड दूसरे कार्ड्स की तरह पर्स में एक नंबर बन जाएगा या फिर ये वाकई में सेहत का हालचाल पता रखेगा. अगर ऐसा है तो क्या इससे हमारी सेहत की गोपनीय जानकारी किसी दूसरे के पास लीक हो जाएगी? ऐसे कई सवाल कार्ड के बारे में सुनते ही सबके मन में आ रहे हैं.
आइए, एक-एक करके इस बारे में समझते हैं. सबसे पहले तो समझते हैं कि एनडीएचएम क्या है. जैसा कि हम पहले भी जिक्र कर चुके हैं. एनडीएचएम की शुरुआत पिछले ही साल लाल किले की प्राचीर पर घोषणा के साथ हुई. वैसे इस बारे में नीति आयोग ने साल 2018 में ही बात की थी, जिसके तहत देश के सारे लोगों का हेल्थ डाटा तैयार किया जा सके. यहां जानते चलें कि लगभग सभी विकसित देशों में इस तरह का डाटा रखा जाता है ताकि इमरजेंसी के हालातों में अफरातफरी न मचे.
एनडीएचएम सबके लिए एक हेल्थ कार्ड तैयार करेगा. इसके लिए एक यूनिक ID बनेगी. जैसा कि नाम से साफ है कि ये एकदम अलग-अलग होगी. ID के साथ सबका पूरा मेडिकल रिकॉर्ड रहेगा कि उसे क्या समस्याएं रह चुकी हैं. क्या वो किसी चीज के लिए लंबे समय तक इलाज लेता रहा है और क्या उसके यहां कोई मेडिकल हिस्ट्री है. इससे फायदा ये होगा कि इमरजेंसी में किसी अस्पताल जाने पर ID डालते ही उसकी सेहत के बारे में सारी जानकारियां आ जाएंगी और इलाज की प्रक्रिया आसान हो जाएगी.

इस ID में सारी जानकारियां सेहत से ही जुड़ी होंगी. इसके लिए किसी खास डॉक्युमेंट की जरूरत नहीं होगी, बल्कि केवल आधार कार्ड और मोबाइल नंबर लिया जाएगा. इन्हें ही जोड़कर आईडी बनेगी. पहले तो हेल्थ आईडी तैयार होगी लेकिन चूंकि फिलहाल इसे लेकर लोगों में काफी सारा संशय है, इसलिए सेहत से जुड़ी जानकारियां शख्स की अनुमति से ही डाली जाएंगी.



अब सवाल आता है कि क्या तुरंत जन्मे शिशु या फिर बच्चों का भी हेल्थ आईडी बनवाया जा सकता है. तो इसका जवाब है- हां. इसके लिए नवजात के जन्म प्रमाण पत्र की जरूरत होगी. साथ ही साथ दूसरी उम्र के बच्चों के लिए आधार कार्ड और अभिभावक का मोबाइल नंबर चाहिए होगा.



फिलहाल डिजिटल कामों पर जोर दिया जा रहा है और कोरोना संक्रमण के कारण इसे और तवज्जो मिली. लिहाजा हेल्थ आईडी के लिए भी किसी दफ्तर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि पूरा का पूरा काम ऑनलाइन होगा. जरूरत के समय अस्पताल में जाने पर आईडी के लिए कोई अलग पेपरवर्क नहीं होगा, बल्कि केवल आईडी बताना होगा और आपकी सेहत से जुड़ी सारी जानकारी सामने आ जाएगी.

कोई भी अस्पताल, पीएचसी या फिर कोई हेल्थकेयर प्रोवाइडर जो नेशनल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर रजिस्ट्री से जुड़ा हो, किसी शख्स की हेल्थ आईडी बना सकता है. यहां तक कि ऑनलाइन जाकर लोग खुद भी अपनी आईडी क्रिएट कर सकते हैं. इसके लिए हमें https://healthid.ndhm.gov.in/register पर जाना होगा और फिर सारी प्रक्रिया वहीं पर हो जाएगी. अगर खुद से रजिस्ट्रेशन में कोई समस्या आए तो ndhm@nha.gov.in पर जाकर वहां अपने सवालों के जवाब पा सकते हैं.



केंद्र ने भरोसा दिलाया है कि सेफ्टी को ध्‍यान में रखते हुए डिजिटल हेल्‍थ रिकॉर्ड को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा. साथ ही इससे न केवल मरीज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य के कारण उत्पादकता बढ़ेगी और इसका असर सीधे देश की जीडीपी पर होगा. एक अनुमान के मुताबिक इससे 10 साल के भीतर जीडीपी में 250 अरब डॉलर जुड़ेंगे.

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