हाईकोर्ट का आदेश: गैस पीड़ितों का अब एम्स में निशुल्क इलाज, अलग से बनेंगे विंडो और वार्ड



भोपाल। राजधानी के करीब 20 हजार गैस पीड़ित कैंसर रोगियों को अब एम्स भोपाल में मुफ्त में इलाज मिलेगा। यह आदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति मोहम्मद रफीक और न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बैंच ने दिया है। इस आदेश से गैस पीड़ितों को अब इलाज के लिए यहां-वहां परेशान नहीं होना पड़ेगा।

हाईकोर्ट में एक रिपोर्ट पेश करके बताया गया कि गैस पीड़ित कैंसर रोगियों को बीएमएचआरसी में इलाज नहीं मिल रहा है। वे इसके लिए काफी परेशान हो रहे हैं। जबलपुर हाईकोर्ट में पेश कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएमएचआरसी में कैंसर रोगियों के इलाज की सुविधा भी नहीं हैं। भोपाल गैस पीड़ितों के इलाज के लिए बीएमएचआरसी बनाया गया है, लेकिन 85 एकड़ में फैले बीएमएचआरसी में चिकित्सीय सुविधाओं और जरुरी संसाधनों का अभाव है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ और अधिवक्ता राजेश चंद ने तर्क दिया कि गैस पीड़ितों के इलाज के लिए बीएमएचआरसी में डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और जरुरी संसाधनों की व्यवस्था भी नहीं है। दरअसल 200 करोड़ के बीएमएचआरसी में पिछले तीन-चार साल से सुपर स्पेशलिस्ट, स्पेशलिस्ट समेत अन्य चिकित्सीय प्रबंध नहीं होने से गैस पीड़ित कैंसर रोगियों का निजी अस्पतालों में सरकारी खर्च पर इलाज कराया जा रहा था। बीएमएचआरसी में विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव के चलते कैंसर, किडनी, गुर्दा, श्वांस, ह्दय, मधुमेह और नेत्र रोगियों को इलाज नहीं मिल पाता है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब गैस पीड़ित कैंसर रोगी एम्स में चिकित्सीय परीक्षण के लिए आएंगे। इसके लिए अलग से विंडो बनाने के साथ अलग से वार्ड बनाए जाएंगे।

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