बेटों के घर आने का था इंतज़ार, पथरायी आँखें अब देखेंगी कफन लिपटी लाश...



उमरिया.औरंगाबाद ट्रेन हादसे (aurangabad train accident) के बाद उमरिया जिले के ममान गांव में मातम पसरा है. पूरे गांव में मौत का गहरा सन्नाटा है. ये वही गांव है जिसके कई बेटे उस हादसे में अपनी जान गंवा बैठे हैं. किसी की गोद उजड़ गयी और किसी की मांग सूनी हो गयी. घर भले ही अलग-अलग हों लेकिन दुख सबका एक है. इस गांव के 4 युवा मज़दूर (labours) कल हुए हादसे में मारे गए. इस परिवार को इंतज़ार था इनके लौटने का लेकिन लौट रही है इनकी लाश.सिर से माता पिता का साया उठते ही 25 साल का युवा नेमसाय हो, चाहें पड़ोसी 27 वर्षीय मुनीम सिंह. अपने गांव ममान से गये तो थे कमाने के लिए लेकिन लॉकडाउन की आफत में फंसने के बाद घर के लोगो को ही कर्ज लेकर वापसी के लिए पैसा भेजना पड़ा.लेकिन दुर्भाग्य ऐसा कि दोनों के शव ही घर लौटेंगे.मांग उजड़ने की सिसकी किसी के रोकने से कैसे रुकती. जिनके मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठने के बाद भी उन्हें अपने पापा से नये कपड़े और खाने खिलोने की आस लगाये रखी हो.

इंतजार बेटे का था...
कमोवेश यही हाल हादसे के शिकार हुए 18 वर्षीय प्रदीप के घर का है. जिसकी मां सुनीता ने अपने बेटे से रात में बात की ओर सुबह खबर मिली कि बेटा तो इस दुनिया को अलविदा कह गया. अब मां को कैसे ढांढ़स बंधाया जाए. यह होनी है जिसे रोकना किसी के बस में नहीं था. तभी तो गांव के ही एक साथ रहकर भी वीरेन्द्र ओर बिरगेन्द्र नाम के दो सगे भाइयों में से बिरगेन्द्र हादसे का शिकार हो गया जबकि वीरेन्द्र को खरोंच तक नहीं आयी.

सांत्वना के सिवाय कुछ नहीं बचा
जिले के चिल्हारी, ममान,नेउसा,जमडी गांव के आदिवासी परिवारों पर आई इस विपत्ति को कोई झुठला नहीं सकता, बस मरहम लगायी जा सकती है. यही वजह है पुलिस हो चाहें प्रशासन के लोग या फिर जनप्रतिनिधि,सब मौत के मातम के बीच गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी.ज़िला पंचायत अध्यक्ष ज्ञानवती सिंह ने सरकार से पीड़ितों की हरमुमकिन मदद की मांग भी की है,और प्रशासन हर संभव का भरोसा दे रहा है.

आज आएंगे शव
अब इन पीड़ित परिवारों को अपने बेटों और नाते-रिश्तेदारों के शवों का इंतज़ार है. जिनके आज दोपहर तक गांव पहुंचने की उम्मीद है.
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