1 मई मजदूर दिवस: कोरोना महामारी में हुए कितने मजबूर ये मजदूर

महामारी की मार ने पारंपरिक हुनर के दम पर रोजी-रोटी कमा रहे श्रमिकों को खुद को बदलने पर मजबूर कर दिया है। काम-धंधा ठप होने से बाजार में न तो इनकी कोई जरूरत बची है और न ही इनके हुनर की कोई कीमत। मजबूर मजदूरों ने दो जून की रोटी के लिए अपने हुनर से किनारा कर सब्जी-फल के ठेले थाम लिए हैं। आपने कभी गौर किया है की महामारी के इस दौर में सब्जी ठेले के संख्या में कितना इजाफा हुआ है...सोचियेगा बहरहाल दुनिया के मजबूरों...मजदूरों को सलाम 

Labour Day: 134 साल पहले शुरू हुई मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत, हेमार्केट गोलीकांड के बाद बदली मजदूरों की जिंदगी

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मेहनतकश मजदूरों के लिए समर्पित है. किसी भी देश की अर्थव्यवस्था मजदूरों के बदौलत ही खड़ी होती है, इसके बावजूद आज भी मजदूर हाशिए पर ही हैं. सिर्फ मजदूर दिवस के दिन ही नहीं बल्कि साल के हर दिन मजदूरों के सम्मान और हक में खड़े होने की जरूरत है.

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