आखिर क्‍यूं काटा परशुराम ने अपनी मां का सिर?

आप सभी परशुराम को तो जानते ही होंगे वह भगवान विष्णु के छठे अवतार के रूप में जाने जाते हैं और ऐसी मान्यता है कि उनका जन्म वैशाख माह में शुक्ल पक्ष तृतीया के दौरान पड़ता है. इसी के साथ कहा जाता है कि परशुराम का जन्म प्रदोष काल के दौरान हुआ था. इसीलिए जिस दिन प्रदोष काल के दौरान तृतीया पड़ती है, उसे परशुराम जयंती के रूप में मनाया जाता है. आप सभी को बता दें कि पूर्वी उत्तर भारत में पूरे धूम-धाम के साथ परशुराम जयंती मनाई जाती है. इस बार यह जयंती 26 अप्रैल को है. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं उनसे जुडी वह कहानी जिसे सुनकर सभी के होश उड़ जाते हैं.
पिता की आज्ञा से काट दिया था माता का सिर - आप सभी को बता दें कि एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ था. वो ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे. ऋषि जमदग्नि को सप्त ऋषि कहा जाता था. भगवान परशुराम अति देजस्वी, ओजस्वी और पराक्रमी थे. कहा जाता है एक बार अपनी पिता की आज्ञा पर उन्होंने अपनी माता का सिर काट दिया था. इसके बाद मां को पुन जीवित करने के लिए भी उन्होंने पिता से वरदान मांगा था. महाभारत के अनुसार महाराज शांतनु के पुत्र भीष्म ने भगवान परशुराम से ही अस्त्र-शस्त्र की विद्या प्राप्त की थी.
जी दरअसल हिंदू मान्यता के अनुसार अन्य सभी अवतारों के विपरीत परशुराम अभी भी पृथ्वी पर रहते हैं इस कारण राम और कृष्ण के विपरीत, परशुराम की पूजा नहीं की जाती है. आप तो जानते ही होंगे दक्षिण भारत में, उडुपी के पास पवित्र स्थान पजाका में, एक प्रमुख मंदिर मौजूद है जो परशुराम का स्मरण कराता है. औरभारत के पश्चिमी तट पर कई ऐसे मंदिर हैं जो भगवान परशुराम को समर्पित हैं.
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