नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने उन्नाव दुष्कर्म पीडि़ता के पिता की मौत के मामले में सजा सुनाने को लेकर अपना आदेश 13 मार्च तक सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में 7 लोग दोषी हैं, जिसमें भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर भी शामिल हैं।
तीस हजारी कोर्ट के जिला जज धर्मेश शर्मा ने कहा वे इस मामले में शुक्रवार को सजा सुनाएंगे। यह मामला 9 अप्रैल 2018 में दुष्कर्म पीडि़ता के पिता की मौत से संबंधित है, जिसमें सेंगर और उसके भाई समेत 7 लोगों को दोषी ठहराया गया था। सेंगर ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में 2017 में मृतक की बेटी के साथ दुष्कर्म किया था और उसे पिछले साल बची हुई जिंदगी जीने के लिए जेल भेज दिया गया था।
आज की कार्यवाही के दौरान, केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सातों दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की। सरकारी वकील ने अदालत से कहा कि उन्हें अधिकतम सजा दी जानी चाहिए क्योंकि एक निर्दोष व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डाला गया। उन्होंने एक जघन्य अपराध किया।
वहीं दोषियों के वकील ने सजा कम करने की गुजारिश की। सेंगर ने अदालत से कहा कि वह निर्दोष है और उसे छोड़ दिया जाना चाहिए। सेंगर ने कहा, मेरा पिछला रिकॉर्ड देखें और मुझे छोड़ दें। मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। एक पुलिस अधिकारी, जिसे इस मामले में दोषी ठहराया गया है, ने हाथ जोडक़र अदालत से गुहार लगाई कि उसका चरित्र हमेशा अच्छा रहा है। उसने कहा, मेरे पास घर नहीं है। मेरे बच्चे सडक़ पर होंगे।
जज ने पलटवार करते हुए कहा, हर किसी का परिवार होता है। आपको अपराध करते समय इसके बारे में सोचना चाहिए था। आपने सिस्टम का मजाक उड़ाया है। सभी दोषियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया जैसे कि आपराधिक साजिश, हत्या, सबूतों को गायब करना, उनसे छेडख़ानी करना, गलत रिकॉर्ड तैयार करना और किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना और शस्त्र अधिनियम जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था।
तीस हजारी कोर्ट के जिला जज धर्मेश शर्मा ने कहा वे इस मामले में शुक्रवार को सजा सुनाएंगे। यह मामला 9 अप्रैल 2018 में दुष्कर्म पीडि़ता के पिता की मौत से संबंधित है, जिसमें सेंगर और उसके भाई समेत 7 लोगों को दोषी ठहराया गया था। सेंगर ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में 2017 में मृतक की बेटी के साथ दुष्कर्म किया था और उसे पिछले साल बची हुई जिंदगी जीने के लिए जेल भेज दिया गया था।
आज की कार्यवाही के दौरान, केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सातों दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की। सरकारी वकील ने अदालत से कहा कि उन्हें अधिकतम सजा दी जानी चाहिए क्योंकि एक निर्दोष व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डाला गया। उन्होंने एक जघन्य अपराध किया।
वहीं दोषियों के वकील ने सजा कम करने की गुजारिश की। सेंगर ने अदालत से कहा कि वह निर्दोष है और उसे छोड़ दिया जाना चाहिए। सेंगर ने कहा, मेरा पिछला रिकॉर्ड देखें और मुझे छोड़ दें। मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। एक पुलिस अधिकारी, जिसे इस मामले में दोषी ठहराया गया है, ने हाथ जोडक़र अदालत से गुहार लगाई कि उसका चरित्र हमेशा अच्छा रहा है। उसने कहा, मेरे पास घर नहीं है। मेरे बच्चे सडक़ पर होंगे।
जज ने पलटवार करते हुए कहा, हर किसी का परिवार होता है। आपको अपराध करते समय इसके बारे में सोचना चाहिए था। आपने सिस्टम का मजाक उड़ाया है। सभी दोषियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया जैसे कि आपराधिक साजिश, हत्या, सबूतों को गायब करना, उनसे छेडख़ानी करना, गलत रिकॉर्ड तैयार करना और किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना और शस्त्र अधिनियम जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था।
