कोरोना वायरस को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें प्रसारित हो रही हैं कि दूध की थैली, अखबार अथवा नोटों से वायरस का संक्रमण फैल रहा है। पर यह बातें सरासर भ्रम फैलाने वाली हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि इन चीजों पर वायरस हो सकता है लेकिन इनसे कोरोना का फैलना तथ्यात्मक रूप से बिल्कुल गलत है।
क्या कहता है विश्व स्वास्थ्य संगठन
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है- इस बात की संभावना कम ही है कि एक संक्रमित व्यक्ति का छुआ हुआ पैकेट भी संक्रमणग्रस्त हो जाएगा। यह जोखिम भी बहुत कम है कि उससे किसी और को कोरोना संक्रमण हो जाएगा क्योंकि यह पैकेट कई माध्यमों, कई तापमान से गुजरते हुए आपके घर तक पहुंचता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है- इस बात की संभावना कम ही है कि एक संक्रमित व्यक्ति का छुआ हुआ पैकेट भी संक्रमणग्रस्त हो जाएगा। यह जोखिम भी बहुत कम है कि उससे किसी और को कोरोना संक्रमण हो जाएगा क्योंकि यह पैकेट कई माध्यमों, कई तापमान से गुजरते हुए आपके घर तक पहुंचता है।
शंका है तो हाथ धो लें
न्यूयॉर्क में 2017 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, नोट पर 397 से ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं। अगर फ्लू पीड़ित व्यक्ति के पास नोट रहता है तो उससे नोट पर आया वायरस 12 दिन तक जिंदा रह सकता है।
यहां ये बात काबिलेगौर है कि सिर्फ वायरस के होने या जीवित होने से यह आपको भी संक्रमित कर देगा, इसकी संभावना बेहद कम है। अखबार, दूध के पैकेट वगैरह लेने के बाद आप साबुन से हाथ धो लें इतना काफी है।
न्यूयॉर्क में 2017 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, नोट पर 397 से ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं। अगर फ्लू पीड़ित व्यक्ति के पास नोट रहता है तो उससे नोट पर आया वायरस 12 दिन तक जिंदा रह सकता है।
यहां ये बात काबिलेगौर है कि सिर्फ वायरस के होने या जीवित होने से यह आपको भी संक्रमित कर देगा, इसकी संभावना बेहद कम है। अखबार, दूध के पैकेट वगैरह लेने के बाद आप साबुन से हाथ धो लें इतना काफी है।
कोरोना वायरस को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें प्रसारित हो रही हैं कि दूध की थैली, अखबार अथवा नोटों से वायरस का संक्रमण फैल रहा है। पर यह बातें सरासर भ्रम फैलाने वाली हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि इन चीजों पर वायरस हो सकता है लेकिन इनसे कोरोना का फैलना तथ्यात्मक रूप से बिल्कुल गलत है।
क्या कहता है विश्व स्वास्थ्य संगठन
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है- इस बात की संभावना कम ही है कि एक संक्रमित व्यक्ति का छुआ हुआ पैकेट भी संक्रमणग्रस्त हो जाएगा। यह जोखिम भी बहुत कम है कि उससे किसी और को कोरोना संक्रमण हो जाएगा क्योंकि यह पैकेट कई माध्यमों, कई तापमान से गुजरते हुए आपके घर तक पहुंचता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है- इस बात की संभावना कम ही है कि एक संक्रमित व्यक्ति का छुआ हुआ पैकेट भी संक्रमणग्रस्त हो जाएगा। यह जोखिम भी बहुत कम है कि उससे किसी और को कोरोना संक्रमण हो जाएगा क्योंकि यह पैकेट कई माध्यमों, कई तापमान से गुजरते हुए आपके घर तक पहुंचता है।
भारत में ऐसे हालात नहीं
ये बात सही है कि करेंसी नोट काफी गंदे होते हैं और उन पर कई वायरस लगे होते हैं। ऐसा भी नहीं है यह बात पहली बार चर्चा में आई हो। चीन अपनी पूरी मुद्रा को ही कीटाणुरहित करने में लगा है। सांस रोग विशेषज्ञ लवलीन मंगला कहते हैं कि चीन इसलिए कर रहा क्योंकि वहां सामुदायिक स्तर पर वायरस फैला पर भारत में ऐसे हालात नहीं।
ये बात सही है कि करेंसी नोट काफी गंदे होते हैं और उन पर कई वायरस लगे होते हैं। ऐसा भी नहीं है यह बात पहली बार चर्चा में आई हो। चीन अपनी पूरी मुद्रा को ही कीटाणुरहित करने में लगा है। सांस रोग विशेषज्ञ लवलीन मंगला कहते हैं कि चीन इसलिए कर रहा क्योंकि वहां सामुदायिक स्तर पर वायरस फैला पर भारत में ऐसे हालात नहीं।
अभी तक वायरस फैलने का केवल एक जरिया है
भारत में अभी तक जितने भी मामले सामने आए हैं वह सभी लोग प्रत्यक्ष संपर्क के चलते वायरस की चपेट में आए हैं। यानी एक बीमार शख्स से दूसरे को सीधे संक्रमण हुआ है। यह संक्रमण रिश्तेदारों, नजदीकी दोस्तों या ऐसे लोगों को हुआ, जिनसे लंबे समय तक प्रत्यक्ष आमने-सामने का संबंध रहा हो। ऐसा नहीं है कि उस बीमार शख्स ने जहां-जहां छू लिया उससे लोगों को संक्रमण हो गया। इसलिए इतना घबराने की जरूरत नहीं है।
अखबार की छपाई और यहां तक की बंडल बांधने का काम भी मशीनों के जरिए होता है। आपके इलाके में पहुंचने के बाद हॉकर अखबार आपके घर फेंकता है। बस इस दौरान वह हर अखबार को छूता है। अब इस बात की ही संभावना कितनी है कि अखबारवाला संक्रमित हो। फिर उसके छू देने भर से पूरा अखबार संक्रमित हो जाएगा यह भी संभव नहीं।
मन से डर निकाल दें
अमेरिकी वैज्ञानिक विनसेंट मस्टर के मुताबिक, इंसानी शरीर के बाहर वायरस लगातार कमजोर होता जाता है। उसे केवल छू लेने से वह आपके शरीर में नहीं पहुंच सकता। हां, अगर कोई चीज संक्रमित व्यक्ति के हाथों से होकर आपके हाथ में आई है और आप बिना हाथ धोए खाते या चेहरा छूते हैं तभी संक्रमण का खतरा बनता है। मन से डर निकाल दें।
चंद वायरस आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकते किसी शख्स की इम्युनिटी को तोड़ने के लिए वायरस की पूरी एक फौज की जरूरत पड़ती है। चंद वायरस इतनी आसानी से किसी को संक्रमित नहीं कर सकते। क्रमश:
किन चीजों पर कितनी देर तक जिंदा रहेगा
दूध की थैली - 16 घंटे तक
स्टील की बोटल - तीन दिन तक
एल्युमिनियम - 06 घंटे तक
लकड़ी - 04 दिनों तक
गत्ते का डब्बा - 24 घंटे तक
प्लास्टिक बोलत - 05 दिनों तक
कांच - 04 दिनों तक
रबड़ - आठ घंटे तक
स्टील की बोटल - तीन दिन तक
एल्युमिनियम - 06 घंटे तक
लकड़ी - 04 दिनों तक
गत्ते का डब्बा - 24 घंटे तक
प्लास्टिक बोलत - 05 दिनों तक
कांच - 04 दिनों तक
रबड़ - आठ घंटे तक
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