दिल्ली के दंगों के लिए प्रधानमंत्री मोदी को दोषी ठहराना गलत

नई दिल्ली। 24 फरवरी को दिल्ली का नॉर्थ हिस्सा पूरे तरीके से हिंसा और लोगों के गुस्से की आग में झुलस रहा था। इस दंगों में कई लोगों के घर झुलस गए। किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी ने अपना पति। अब सवाल उठता हैं कि इन 50 से ज्यादा लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन है? लोगों के घर हवा के झोंके की तरह उड़ गए लेकिन सब लोग एक-दूसरे पर आरोप पर आरोप लगाए जा रहे हैं। राजनिति से लेकर आम लोग एक-दुसरे पर आरोप लगाते जा रहे हैं। दिल्ली हमलों को लेकर कई देशों से प्रतिक्रियाएँ आई। इसी बीच दुबई, गल्फ न्यूज के ईआईसी (EiC) ने एक खबर शेयर की है, जिसके मुताबिक इस खबर में दिल्ली में हुए दंगों के लिए भारत के प्रधानमंत्री मोदी को दोषी ठहराना बंद करने की बात की 
दिल्ली दंगों की एकतरफा रिपोर्टिंग
पश्चिमी मीडिया की एकतरफा रिपोर्टिंग से दिल्ली की भयावह तस्वीरों की एक अलग ही तस्वीर नजर आई। हर जिंदगी कीमती है चाहे वह हिंदू की हो या मुसलमान। एकतरफा खबरें किसी खतरे की घंटी से कम नहीं होती है, ऐसा ही कुछ पश्चिमी मीडिया ने किया। इन दिल्ली दंगों को मुस्लिम विरोधी दिखाने की कोशिश की गई। जानमाल का नुकसान चाहे हिंदू हो या मुसलमाल सभी का हुआ और यह दंगे बिल्कुल सांप्रदायिक नही थे उसके बावजूद इसे पश्चिमी मीडिया ने एकतरफा दिखाने क कोशिश की। इसमें पीएम मोदी की एक अलग ही तस्वीर दिखाने की कोशिश की गई। दिल्ली दंगों पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की पूरी तरह एकतरफा और कुटिल रिपोर्टिंग से मोदी को लेकर नापसंदगी साफ नजर आई। दिल्ली दंगों में पीएम मोदी को दुनिया में ऐसे पेश किया गया जैसे मोदी राज में मुस्लिम सुरक्षित नहीं गई है।  
दिल्ली में जो हुआ यह वास्तव में काफी दुर्भाग्यपूर्ण रहा। दिल्ली दंगो में मारे गए लोगों से ज्यादा 1984 में दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों के दौरान जानें गई थी। क्या हमे 2020 के दिल्ली दंगों को 1984 के सिख विरोधी दंगों से तुलना करनी चाहिए जिसमें 3000 लोगों की मौत हो गई थी? तो जवाब है नहीं। अगर आप पीएम मोदी को 2020 के दिल्ली दंगो की वजह से एक नफरत की तस्वीर से देखते है और उनको इनका जिम्मेदार ठहराते है तो तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के वो बयान को भी याद कर लिया जाए जब सिख विरोधी दंगों पर टिप्पणी करने के लिए कहा गया, तो राजीव का जवाब था: "जब एक बड़ा पेड़ गिरता है, तो पृथ्वी हिलती है"! 
जो लोग आज दिल्ली दंगों के लिए मोदी को दोषी ठहरा रहे हैं, उन्हें यह पता होना चाहिए कि वह भारत के प्रधानमंत्री है जिन्होंने अलग-अलग देशों से कई सुर्खियाँ बटोरी है और भारत की एक अलग पहचान दिलाई है। भले ही आज पश्चिमी मीडिया के नकारात्मक तस्वीरों ने पीएम मोदी की एकतरफा खबर पेश की हो लेकिन हर चीज के लिए उनको दोषी ठहराना आपके देश और भारत के प्रधानमंत्री की एक नाकारात्मक तस्वीर पेश करेगा। अगर आप पीएम मोदी को हर चीज के लिए दोषी ठहराते हैं तो सिर्फ एक दिन के लिए मोदी की जगह अपने आपको रखने की कोशिश करें तब आपको एहसास होगा कि हम क्या कहना चाह रहे है और हमारे कहने का क्या मतलब है!
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