नई दिल्ली. देश में नई पीढ़ी को सरदार वल्लभभाई पटेल से परिचित नहीं कराया गया। नरेंद्र मोदी ने यह बात सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर हुई रन फॉर यूनिटी को रवाना करने से पहले कही। उन्होंने यहां मौजूद 15 हजार से ज्यादा लोगों को एकता की शपथ भी दिलाई। डेढ़ किमी की इस दौड़ को आजाद भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 142वीं जयंती पर आयोजित किया गया था। इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर भी पहुंचे। बता दें कि सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। सरदार साहब ने देश को एक सूत्र में बांध दिया...
- इस मौके पर मोदी ने कहा, "आज सरदार पटेल की जन्म जयंती है, इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि है। जिस महापुरुष ने देश के लिए जीवन खपा दिया। आजादी के बाद अपने कौशल-दृढ़शक्ति के द्वारा देश को न केवल संकटों से बचाया बल्कि सैकड़ों राजे-रजवाड़ों को भारत में मिलाया। ये सरदार साहब की दूरदृष्टि थी कि अंग्रेजों के मंसूबे को कामयाब नहीं होने दिया और देश को एक सूत्र में बांध दिया।"
- "देश की नई पीढ़ी को उनसे परिचित ही नहीं करवाया गया। इतिहास के झरोखे से सरदार साहब के नाम को मिटाने का प्रयास हुआ या उनके नाम को छोटा करने का प्रयास हुआ। कोई राजनीतिक दल उनके माहात्म्य को स्वीकार करे या न करे, लेकिन हमारी पीढ़ी उन्हें इतिहास से ओझल होने देने के लिए तैयार नहीं है।"
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी जताई भी पटेल को भुला देने की पीड़ा
- मोदी ने कहा, "जब देश ने हमें काम करने के मौका दिया तो उनके काम पीढ़ियों तक जाने जाएं, हमने रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया। एक बार देश के पहले राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने कहा था- आज सोचने और बोलने के लिए हमें भारत नाम का देश उपलब्ध है, यह सरदार वल्लभभाई पटेल की स्टेट्समैनशिप और प्रशासन पर जबर्दस्त पकड़ के कारण हो पाया। ऐसा होने के बावजूद हम सरदार साहब को भूल बैठे हैं। राजेन्द्र बाबू ने सरदार साहब के भुला देने की पीड़ा व्यक्त की थी। आज राजेन्द्र बाबू की आत्मा जहां कहीं भी होगी, वो खुश हो रही होगी।"
एकता हमारी ताकत है
- मोदी ने कहा, "भारत विविधताओं को देश है। जब तक विविधता से खुद को जोड़ेंगे नहीं तो राष्ट्र निर्माण में उसका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। भारत दुनिया के आचार-विचार को अपने में समेटे हुए है।"
- "आज दुनिया में एक परंपरा में पले-बढ़े लोग एक-दूसरे को जिंदा देखने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे वक्त में हिंदुस्तान गर्व से कह सकता है कि ये हमारी ताकत है। जैसे हम हर साल भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का पर्व मनाते हैं, उसी तरह एकता के मंत्र को याद रखना जरूरी है।"
- "हमारा देश एक रहे, सरदार साहब ने देश को जो एक किया, सवा सौ करोड़ लोगों की जिम्मेदारी है कि वो बनी रही। सरदार साहब की जयंती के 150 साल पर हम उन्हें क्या देंगे, इसका संकल्प लेना है।"
- "2022 में आजादी के 75 साल हो रहे हैं, ऐसे में हर हिंदुस्तानी को संकल्प लेकर आगे बढ़ना चाहिए। ऐसा संकल्प जो देश की गरिमा को ऊपर ले जाना हो। ये समय की मांग है। मैं आपको राष्ट्रीय एकता दिवस पर शपथ के लिए आमंत्रित करता हूं।"
मोदी ने क्या शपथ दिलाई?
- मोदी ने शपथ दिलाई, "मैं सत्यनिष्ठा से शपथ लेता हूं कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए स्वयं को समर्पित करूंगा और अपने देशवासियों के बीच यह संदेश फैलाने का भी भरसक प्रयत्न करूंगा। मैं यह शपथ अपने देश की एकता की भावना से ले रहा हूं जिसे सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदर्शिता एवं कार्यों द्वारा संभव बनाया जा सका। मैं अपने देश की आतंरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी आत्मनिष्ठा से शपथ लेता हूं। भारत माता की जय।"
ये प्लेयर्स भी पहुंचे
- क्रिकेटर सुरेश रैना, हॉकी प्लेयर सरदारा सिंह, वेट लिफ्टर कर्णम मल्लेश्वरी, जिमनास्ट दीपा करमाकर भी पहुंचे।
लौह पुरुष क्यों कहलाए सरदार पटेल?
- भारत के स्वतंत्रता सेनानी रहे वल्लभभाई पटेल, आजादी के बाद देश के पहले गृहमंत्री और उप-प्रधानमंत्री बने।
- सरदार पटेल ने भारत की करीब 562 रियासतों को एक कर दिया था और इसी की वजह से बाद में भारत एकजुट राष्ट्र बना। भारत की रियासतों को एक राष्ट्र में मिलाने की वजह से ही सरदार पटेल को भारत का लौह पुरुष कहा जाने लगा।
सरदार पटेल ने कैसे मिलाया रियासतों को?
- देश की रियासतों को एक साथ मिलाने के लिए पटेल ने जो तरकीब अपनाई थी वो दिलचस्प है। इसके लिए 5 जुलाई 1947 को एक रियासत विभाग बनाया गया। इसके बाद उनका काम शुरू हुआ। हर रियासत के राजा के पास पटेल ने उनकी परेशानियां सुनीं और उनका हल निकाला।
- इस तरह उन्होंने सारी रियासतों को एक कर दिया। 1947 तक आते-आते सिर्फ तीन ही रियासतें बचीं जो भारत में नहीं मिल पाईं। इनमें कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद थीं। हालांकि, इनमें से जूनागढ़ को 9 नवंबर 1947 को भारत में मिला लिया गया था लेकिन जूनागढ़ का नवाब पाकिस्तान भाग गया।
- इसके बाद हैदराबाद को भी भारत में मिला लिया गया। दिलचस्प तो यह है कि इन सारी रियासतों को एकजुट करने के दौरान ना तो किसी तरह का खून-खराबा हुआ और ना ही किसी तरह का बल प्रयोग करना पड़ा।
- जबकि कश्मीर रियासत पंडित नेहरू ने अपने अधिकार में ली हुई थी। 562 रियासतों को एक करना नामुमकिन सी बात थी, लेकिन पटेल ने वो कर दिखाया और इसकी तारीफ महात्मा गांधी ने भी की थी।
- पटेल गृहमंत्री के रूप में पहले ऐसे शख्स थे जिन्होंने भारतीय नागरिक सेवाओं (ICS) का भारतीयकरण किया और उन्हें IAS बनाया।
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