15 दिनों में सुलझ सकता है नोटबंदी के बाद 'लापता' नोटों का मामला

मुंबईरिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को 15 दिनों में नोटबंदी से जुड़े सबसे बड़े सवाल का सामना करना पड़ेगा कि कितनी रकम के नोट उसके पास वापस नहीं आए। अब तक सरकार और आरबीआई ने इस पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन जल्द ही उन्हें इस रहस्य से परदा उठाना पड़ेगा। आरबीआई इस महीने अपने ऑडिटर्स के साथ मीटिंग करने जा रहा है, जिसमें यह स्पष्ट हो जाएगा कि कितनी रकम के नोट नहीं लौटाए गए।

यह जानकारी इस मामले से वाकिफ एक सूत्र ने दी है। यह मीटिंग इसलिए मायने रखती है क्योंकि जब तक 'मिसिंग नोटों' का पता नहीं चलता, तब तक आरबीआई 30 जून 2017 को खत्म वित्त वर्ष की बैलेंस शीट तैयार नहीं कर सकता। ऐसे में उसके लिए सरकार को डिविडेंड का भुगतान या सरप्लस रकम लौटाना संभव नहीं होगा। आरबीआई की अकाउंटिंग पॉलिसी के मुताबिक, जो नोट सर्कुलेशन में हैं, उन्हें लायबिलिटी माना जाता है। वहीं, बॉन्ड और विदेशी मुद्रा को आरबीआई की बैलेंस शीट में असेट्स माना जाता है।

बैलेंस शीट तैयार करने के लिए रिजर्व बैंक को यह लिखना होगा कि कितनी रकम के पुराने नोट बैंकों के जरिये वापस नहीं किए गए। पिछले साल 8 नवंबर की आधी रात से 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को अमान्य घोषित किया गया था। 17.5 लाख करोड़ के नोटों को अमान्य किया गया था, जो उस वक्त सर्कुलेशन में चल रहे नोटों का 85 पर्सेंट थे। नोटबंदी के ऐलान के बाद यह आशंका जताई गई थी कि अमान्य घोषित किए गए बहुत ज्यादा नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस आए हैं। जिनके पास पुरानी करंसी में बड़ी रकम थी, उन्होंने इसका इस्तेमाल टैक्स चुकाने के लिए किया या काम के भारी दबाव का सामना कर रहे बैंकिंग सिस्टम के जरिये उसकी लॉन्ड्रिंग की।

सरकार ने दावा किया था कि नोटबंदी से टैक्स चुकाने वालों का दायरा बढ़ा है, जबकि विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि इससे काले धन में कमी नहीं आई है क्योंकि ज्यादातर अमान्य घोषित किए गए नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस आ गए। हालांकि, इस बहस के गरमाने के बावजूद यह नहीं बताया गया कि कितने पुराने नोट वापस नहीं आए। मनी मार्केट की अटकलों के मुताबिक, यह रकम 25,000 करोड़ रुपये है। एक अन्य सूत्र ने बताया, 'इन नोटों की फिजिकली गिनती संभव नहीं है। ऑडिटर संबंधित मंत्रालयों से बातचीत करके किसी संख्या तक पहुंचेंगे। नेपाल के सेंट्रल बैंक के पास पड़े नोटों का भी अनुमान लगाना होगा।' आरबीआई के प्रवक्ता ने इस बारे में पूछे गए सवालों के जवाब नहीं दिए।

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