SIR को लेकर प्रकाश राज का गुस्सा फूटा, प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल- आखिर ये सब क्यों हो रहा है?
अभिनेता ने मतदाता सूची पुनरीक्षण की पारदर्शिता पर सवाल उठाए; 10 जिलों में सिविल सोसाइटी के साथ सोशल ऑडिट करने की बात कही
बेंगलुरु।
अभिनेता प्रकाश राज ने कर्नाटक में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रक्रिया में कथित विसंगतियों, मतदाताओं को दिए जा रहे नोटिस और दस्तावेज सत्यापन के तरीके पर सवाल खड़े करते हुए अधिक समय और पारदर्शिता की मांग की है।
‘एक-दो दिन पहले नोटिस देकर कैसे पूरी होगी प्रक्रिया?’
प्रकाश राज ने SIR की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम नागरिकों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक दस्तावेज जुटाने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। उनका कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए लोगों को कम से कम छह महीने का समय दिया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोगों को बहुत कम समय पहले नोटिस मिलता है और केंद्र पर पहुंचने के बाद उनसे अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे आम मतदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रकाश राज का सवाल
इतनी महत्वपूर्ण मतदाता सत्यापन प्रक्रिया में नागरिकों को पर्याप्त समय और स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही?
मतदाता रिकॉर्ड में विसंगतियों को लेकर भी उठाए सवाल
प्रकाश राज ने कर्नाटक में सामने आए मतदाता रिकॉर्ड से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए प्रक्रिया की सटीकता पर सवाल उठाए। SIR के दौरान कई प्रमुख लोगों के रिकॉर्ड में नाम, पुराने मतदाता विवरण या अन्य जानकारियों के मिलान से जुड़ी विसंगतियां सामने आने की खबरें आई हैं।
बड़ा मुद्दा:
यदि रिकॉर्ड में अलग-अलग भाषा या पुराने दस्तावेजों के कारण विवरण मेल नहीं खाते हैं तो उनका समाधान निष्पक्ष और सरल प्रक्रिया से कैसे किया जाए—इसी पर बहस तेज हो रही है।
पहले अपने नाम को लेकर भी कर चुके हैं दावा
इससे पहले प्रकाश राज ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि SIR प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया गया है। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वे इसी शहर में जन्मे-पले हैं और यहां से लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं।
आधिकारिक पक्ष भी जानिए
प्रकाश राज के उस दावे के बाद बेंगलुरु चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि उनका नाम मतदाता सूची से डिलीट नहीं किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक उनका रिकॉर्ड शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज था और पता सत्यापन से जुड़ी स्थिति सामने आई थी।
10 जिलों में सोशल ऑडिट करने की तैयारी
प्रकाश राज ने कहा कि नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ कर्नाटक के 10 अलग-अलग जिलों का दौरा करने की योजना है। उनका कहना है कि अलग-अलग मतदान केंद्रों पर जाकर जमीनी स्थिति समझी जाएगी और SIR प्रक्रिया का सोशल ऑडिट किया जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं के नाम हटाने से जुड़ी सूचियां बूथ स्तर पर सार्वजनिक करने और ग्राम पंचायत स्तर पर बैठकों जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया। इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
SIR पर क्यों बढ़ रही है बहस?
मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक ओर गलत, मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को ठीक करना जरूरी है, वहीं यह सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी पात्र मतदाता का नाम प्रक्रिया संबंधी त्रुटि के कारण प्रभावित न हो।
नोट: खबर में प्रकाश राज द्वारा लगाए गए आरोप उनके सार्वजनिक दावों पर आधारित हैं। मतदाता सूची से उनका नाम हटाए जाने के पुराने दावे पर चुनाव अधिकारियों ने अलग स्पष्टीकरण जारी किया था।
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