जिनपिंग के भारत पहुंचने से पहले चीन का बड़ा संदेश, कहा— दोस्ती और सहयोग बढ़ाएंगे
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले बीजिंग ने रिश्तों को दी नई दिशा; मोदी-जिनपिंग संभावित बैठक पर सबकी नजर
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत रवाना होने के साथ ही भारत-चीन संबंधों को लेकर बीजिंग की ओर से अहम संदेश सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित द्विपक्षीय बैठक से पहले चीन ने संवाद, सहयोग और अच्छे पड़ोसी संबंधों को मजबूत करने की बात कही है।
भारत और चीन को मतभेदों का उचित प्रबंधन करते हुए अच्छे पड़ोसी और सहयोगी के रूप में आगे बढ़ना चाहिए।
चीन के राजदूत ने दिया बड़ा बयान
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को उचित तरीके से संभालते हुए अच्छे पड़ोसी और मित्र के रूप में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने संकेत दिया कि चीन भारत के साथ अपने संबंधों को किसी अल्पकालिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक और दीर्घकालिक रणनीतिक नजरिए से देखता है।
मतभेद हों तो उनका समाधान संवाद से हो, लेकिन बातचीत और सहयोग का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए।
‘मतभेद हैं, लेकिन बातचीत बंद न हो’
चीनी राजदूत ने जोर दिया कि भारत और चीन के बीच कुछ मुद्दों पर असहमति हो सकती है, लेकिन इन्हें द्विपक्षीय संबंधों में स्थायी बाधा नहीं बनने देना चाहिए।
बीजिंग का यह रुख संकेत देता है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और नए सहयोग के क्षेत्रों की तलाश पर जोर दिया जा रहा है।
भारत-चीन रिश्तों में प्रमुख मुद्दे
- सीमा विवाद और तनाव का प्रबंधन
- व्यापार और आर्थिक सहयोग
- उच्च स्तरीय राजनीतिक संवाद
- क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर सहयोग
- रणनीतिक विश्वास बहाली
चीनी विदेश मंत्रालय ने भी दोहराया रुख
बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भी भारत के साथ संवाद बढ़ाने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि चीन हर स्तर पर बातचीत और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
चीन की ओर से यह भी कहा गया कि भारत और चीन को एक-दूसरे की विकास यात्रा और सफलता में सहायक साझेदार बनने की दिशा में काम करना चाहिए।
मोदी-जिनपिंग बैठक पर टिकी नजर
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित द्विपक्षीय बैठक पर अंतरराष्ट्रीय नजरें टिकी हुई हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात को सीमा तनाव, व्यापार और रणनीतिक रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या ब्रिक्स मंच भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत का रास्ता खोलेगा, या सीमा और रणनीतिक मतभेद आगे भी रिश्तों की सबसे बड़ी चुनौती बने रहेंगे?
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