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इंदौर में छह महीने में HIV के 357 संक्रमित मिले, 351 का इलाज शुरू; एमजीएम मेडिकल कॉलेज में सर्वाधिक 215 मामले दर्ज

मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में एचआईवी संक्रमण की जांच के दौरान अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 44,259 लोगों में से 357 की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है। उपलब्ध स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 351 संक्रमितों को एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) से जोड़ा गया है, जबकि छह मरीज अभी उपचार से नहीं जुड़ सके हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज से संबंधित जांच आंकड़ों में 1,152 लोगों की जांच के दौरान सर्वाधिक 215 पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए। इनमें 209 मरीज एआरटी से जुड़े हैं। जिले में उपचार से नहीं जुड़े सभी छह मरीज इसी केंद्र के आंकड़ों में शामिल हैं। हालांकि इन आंकड़ों को पूरे इंदौर जिले में एचआईवी के कुल मामलों या सामान्य आबादी में संक्रमण की दर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इंदौर में छह महीने में HIV के 357 संक्रमित मिले, 351 का इलाज शुरू; एमजीएम मेडिकल कॉलेज में सर्वाधिक 215 मामले दर्ज
INDORE HEALTH REPORT | HIV SCREENING 2026

इंदौर में HIV जांच के दौरान 357 संक्रमित मिले, 351 को उपचार से जोड़ा गया

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों में सर्वाधिक 215 पॉजिटिव मामले, छह मरीजों तक उपचार पहुंचना बाकी।

इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में एचआईवी संक्रमण की पहचान के लिए चलाए जा रहे जांच अभियान के आंकड़ों ने स्वास्थ्य सेवाओं के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती रखी है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच जिले के विभिन्न एकीकृत परामर्श एवं जांच केंद्रों (ICTC) पर कुल 44,259 लोगों की जांच की गई। इनमें 357 लोगों की एचआईवी रिपोर्ट पॉजिटिव मिली।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, संक्रमित पाए गए 357 लोगों में से 351 को एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) से जोड़ दिया गया है, जबकि छह लोग अब तक उपचार से नहीं जुड़ सके हैं। इस तरह संक्रमितों को उपचार से जोड़ने की दर्ज दर लगभग 98.3 प्रतिशत रही।

विशेषज्ञों के अनुसार, एचआईवी संक्रमण की समय पर पहचान के साथ उपचार शुरू कराना भी महत्वपूर्ण है। नियमित एआरटी उपचार वायरस को नियंत्रित रखने, व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करने और संक्रमण के प्रसार को कम करने में सहायता करता है।

छह महीने की HIV जांच रिपोर्ट
कुल जांच: 44,259
HIV पॉजिटिव: 357
ART उपचार से जुड़े: 351
उपचार से नहीं जुड़े: 6
उपचार से जोड़ने की दर: लगभग 98.3%

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में सर्वाधिक 215 संक्रमित दर्ज

इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से संबंधित जांच आंकड़ों में अन्य सूचीबद्ध केंद्रों की तुलना में सबसे अधिक एचआईवी पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। यहां 1,152 लोगों की जांच में 215 संक्रमित दर्ज किए गए।

इनमें से 209 लोगों को एआरटी उपचार से जोड़ा गया, जबकि छह लोग अब तक उपचार से नहीं जुड़ सके हैं। जिले में उपचार से नहीं जुड़े सभी छह संक्रमित इसी केंद्र के आंकड़ों में दर्ज हैं।

ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने संबंधित लोगों से संपर्क स्थापित कर उन्हें परामर्श और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने की चुनौती है।

आंकड़ों को समझना भी जरूरी

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में पॉजिटिव मामलों की अधिक संख्या से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसके आसपास की सामान्य आबादी में एचआईवी का प्रसार सबसे अधिक है। जांच के लिए आने वाले लोगों की प्रकृति, रेफरल और परीक्षण व्यवस्था का असर केंद्रवार आंकड़ों पर पड़ सकता है।

इंदौर के किस अस्पताल में कितने HIV पॉजिटिव मिले?

अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच जिले के विभिन्न सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों में एचआईवी जांच की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एमजीएम मेडिकल कॉलेज को छोड़कर अन्य सूचीबद्ध केंद्रों में पॉजिटिव मामलों की संख्या 30 से कम रही।

अस्पताल / जांच केंद्र जांच HIV पॉजिटिव ART से जुड़े
एमजीएम मेडिकल कॉलेज1,152215209
आईसीटीसी पीपीटीसीटी, एमवायएच8,8131010
पीसी सेठी अस्पताल4,2591717
जिला अस्पताल, इंदौर5,1352424
मल्हारगंज पॉलीक्लिनिक3,5032222
अरबिंदो अस्पताल4,1301616
इंडेक्स मेडिकल कॉलेज3,0741212
सिविल अस्पताल, महू3,1801010
सीएचसी बेटमा3,7241111
सीएचसी सांवेर3,50488
सीएचसी मानपुर3,7851212
कुल44,259357351

फर्स्ट-95 अभियान में जांच और उपचार पर जोर

एचआईवी संक्रमण की जल्द पहचान और संक्रमित लोगों को उपचार से जोड़ने के उद्देश्य से चलाए गए फर्स्ट-95 अभियान के अंतर्गत भी स्क्रीनिंग गतिविधियां संचालित की गईं। उपलब्ध जानकारी में इस अभियान के तहत 6,313 लोगों की स्क्रीनिंग का उल्लेख है।

एचआईवी नियंत्रण से जुड़े 95-95-95 लक्ष्यों में पहला लक्ष्य एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोगों की संक्रमण स्थिति की पहचान सुनिश्चित करने से संबंधित है। इसके बाद निदान प्राप्त लोगों को उपचार से जोड़ना और उपचाररत लोगों में वायरल नियंत्रण हासिल करना महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं।

जिले के प्रस्तुत आंकड़ों में 357 पॉजिटिव मामलों में से 351 को एआरटी से जोड़ना उपचार तक पहुंच की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि छह लोगों का उपचार से नहीं जुड़ पाना यह दर्शाता है कि जांच के बाद फॉलोअप व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता बनी हुई है।

HIV संक्रमितों के लिए ART उपचार क्यों जरूरी है?

एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी यानी ART एचआईवी संक्रमण के उपचार का प्रमुख आधार है। नियमित उपचार से शरीर में वायरस की मात्रा कम की जा सकती है और प्रतिरक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

समुचित उपचार और चिकित्सकीय निगरानी के साथ एचआईवी संक्रमित व्यक्ति लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकता है। लगातार उपचार से वायरल लोड को अविभेद्य स्तर तक बनाए रखने वाले व्यक्ति से यौन संबंध के माध्यम से एचआईवी का संचरण नहीं होता।

इसलिए संक्रमण की पहचान के बाद मरीज को उचित परामर्श, उपचार और नियमित फॉलोअप से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।

HIV के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी

एचआईवी हाथ मिलाने, साथ बैठने, गले मिलने, भोजन साझा करने या सामान्य सामाजिक संपर्क से नहीं फैलता।

एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोगों के प्रति भेदभाव नहीं, बल्कि सम्मान, गोपनीयता और समय पर उपचार की व्यवस्था आवश्यक है।

स्वास्थ्य विभाग के सामने अब छह मरीजों तक पहुंचने की चुनौती

इंदौर जिले में एचआईवी की पहचान के बाद उपचार से जोड़ने की दर लगभग 98.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। लेकिन उपचार से नहीं जुड़े छह लोगों तक पहुंचकर उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना अब भी जरूरी है।

इसके लिए मरीजों की गोपनीयता बनाए रखते हुए परामर्श, फॉलोअप और उपचार की निरंतर उपलब्धता महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जांच की संख्या बढ़ाने के साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि संक्रमण की पुष्टि होने के बाद कोई व्यक्ति आवश्यक चिकित्सा सहायता से वंचित न रहे।

जांच के साथ समय पर उपचार भी जरूरी

इंदौर में अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 44,259 एचआईवी जांच में 357 पॉजिटिव मामले दर्ज हुए। इनमें 351 लोगों को एआरटी उपचार से जोड़ा गया है, जबकि छह लोगों को उपचार से जोड़ना बाकी है। स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता के लिए संक्रमण की पहचान, समय पर उपचार और नियमित फॉलोअप तीनों महत्वपूर्ण हैं।

नोट: आंकड़े उपलब्ध केंद्रवार रिपोर्ट पर आधारित हैं। फर्स्ट-95 अभियान के 6,313 स्क्रीनिंग आंकड़ों का 44,259 कुल जांच से संबंध मूल विवरण में स्पष्ट नहीं है। केंद्रवार पॉजिटिव मामलों की संख्या को सामान्य आबादी की संक्रमण दर नहीं माना जाना चाहिए।

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लेखक

Arti Lodhi

Editor In Chief

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