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बालाघाट में 15 साल तक दूसरे डॉक्टर की MBBS डिग्री पर सरकारी नौकरी का आरोप, पूर्व BMO सुनील कुमार सिंह पर FIR

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में कथित फर्जी एमबीबीएस डिग्री के आधार पर करीब 15 वर्षों तक सरकारी चिकित्सा सेवा में कार्यरत रहने का मामला सामने आया है। बिरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के तत्कालीन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर सुनील कुमार सिंह के खिलाफ बिरसा पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। जांच में आरोप सामने आया कि सुनील कुमार सिंह ने देवास जिले में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी के नाम से जुड़े शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी हासिल की। एक ही एमबीबीएस डिग्री नंबर पर दो अलग-अलग डॉक्टरों के सरकारी सेवा में कार्यरत होने की जानकारी मिलने के बाद दस्तावेजों की जांच की गई। पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4), 340(2) और 336(3) के तहत प्रकरण क्रमांक 258/26 दर्ज कर विवेचना शुरू की है। इस प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग में नियुक्तियों के दौरान दस्तावेज सत्यापन और प्रशासनिक निगरानी की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

बालाघाट में 15 साल तक दूसरे डॉक्टर की MBBS डिग्री पर सरकारी नौकरी का आरोप, पूर्व BMO सुनील कुमार सिंह पर FIR
BALAGHAT NEWS | MEDICAL DEGREE FRAUD CASE

बालाघाट में कथित फर्जी MBBS डिग्री का खुलासा, पूर्व BMO पर धोखाधड़ी की FIR

एक ही डिग्री नंबर पर दो डॉक्टरों के सरकारी नौकरी करने का मामला, करीब 15 वर्षों की सेवा और नियुक्ति प्रक्रिया की जांच पर उठे सवाल।

बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। बिरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय तक पदस्थ रहे तत्कालीन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) सुनील कुमार सिंह के खिलाफ कथित रूप से दूसरे व्यक्ति की एमबीबीएस डिग्री और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।

मामले की जांच में एक ही एमबीबीएस डिग्री नंबर पर दो अलग-अलग व्यक्तियों के सरकारी चिकित्सा सेवा में कार्यरत होने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। दस्तावेजों की जांच के बाद बिरसा पुलिस ने पूर्व बीएमओ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

इस घटनाक्रम ने न केवल संबंधित अधिकारी की नियुक्ति और शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की दस्तावेज सत्यापन प्रणाली और वर्षों तक की गई प्रशासनिक निगरानी की प्रभावशीलता पर भी चर्चा शुरू कर दी है।

मामले की प्रमुख जानकारी
  • जिला: बालाघाट, मध्य प्रदेश
  • संबंधित अस्पताल: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बिरसा
  • आरोपित: तत्कालीन BMO सुनील कुमार सिंह
  • मुख्य आरोप: दूसरे व्यक्ति के नाम की MBBS डिग्री और कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग
  • सेवा की शुरुआत: वर्ष 2008 में संविदा चिकित्सक के रूप में
  • बिरसा में पदस्थापना: वर्ष 2012 से खंड चिकित्सा अधिकारी के रूप में
  • FIR क्रमांक: 258/26
  • धाराएं: BNS 318(4), 340(2), 336(3)

एक ही MBBS डिग्री नंबर पर दो डॉक्टर, जांच में सामने आया मामला

बिरसा के तत्कालीन बीएमओ सुनील कुमार सिंह की शैक्षणिक योग्यता और डिग्री से जुड़े दस्तावेजों को लेकर पिछले कुछ समय से जांच चल रही थी। शिकायतों के आधार पर संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया गया।

जांच में आरोप सामने आया कि एक ही एमबीबीएस डिग्री नंबर का इस्तेमाल दो अलग-अलग व्यक्तियों की सरकारी चिकित्सा सेवा से जुड़े रिकॉर्ड में किया गया था।

बताया गया है कि संबंधित डिग्री और शैक्षणिक दस्तावेज देवास जिले में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी सुनील कुमार के नाम से जुड़े थे, जबकि बिरसा में पदस्थ सुनील कुमार सिंह पर उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल करने का आरोप है।

अभिलेखों की जांच के बाद पुलिस ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर शासकीय सेवा का अनुचित लाभ लेने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

2008 में संविदा चिकित्सक के रूप में शुरुआत, 2012 से बने BMO

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुनील कुमार सिंह ने वर्ष 2008 में संविदा चिकित्सक के रूप में सरकारी सेवा की शुरुआत की थी। इसके बाद वर्ष 2012 से वे बिरसा में खंड चिकित्सा अधिकारी के रूप में पदस्थ रहे।

इस दौरान वे स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक और चिकित्सा सेवाओं से जुड़े दायित्वों का निर्वहन करते रहे। अब उनकी नियुक्ति में इस्तेमाल किए गए शैक्षणिक अभिलेखों की वैधता को लेकर पुलिस प्रकरण दर्ज होने से मामला गंभीर हो गया है।

जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि नियुक्ति के समय कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे, उनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ था और बाद के वर्षों में संबंधित अभिलेखों की समीक्षा किस प्रकार की गई।

पहले भी हुई थीं शिकायतें, अब दस्तावेजों के परीक्षण के बाद FIR

जानकारी के मुताबिक, सुनील कुमार सिंह की डिग्री और योग्यता को लेकर पूर्व में भी कई शिकायतें की गई थीं। हालांकि उस समय मामला किसी निर्णायक कानूनी कार्रवाई तक नहीं पहुंच सका था।

इस बार दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद संबंधित अभिलेखों में कथित अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है।

इसके बाद बिरसा थाने में प्रकरण दर्ज किया गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि कथित रूप से कूटरचित दस्तावेज कब और किस प्रकार तैयार किए गए तथा उनका उपयोग सरकारी सेवा प्राप्त करने में कैसे हुआ।

बिरसा थाने में इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

BNS धारा 318(4): धोखाधड़ी के माध्यम से संपत्ति या मूल्यवान दस्तावेज दिलवाने से संबंधित प्रावधान।

BNS धारा 336(3): धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी से संबंधित प्रावधान।

BNS धारा 340(2): जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली के रूप में इस्तेमाल करने से संबंधित प्रावधान।

प्रकरण क्रमांक 258/26 दर्ज होने की जानकारी दी गई है। आरोपों की कानूनी सत्यता विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया में निर्धारित होगी।

थाना प्रभारी विजय केन ने की FIR दर्ज होने की पुष्टि

बिरसा थाना प्रभारी विजय केन ने बताया कि बिरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के तत्कालीन बीएमओ सुनील कुमार सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

“कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर शासकीय सेवा का अनुचित लाभ अभिलेखों के परीक्षण के दौरान पाया गया। इसी आधार पर बिरसा थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।”

— विजय केन, थाना प्रभारी, बिरसा (उपलब्ध विवरण के अनुसार)

पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में संबंधित शैक्षणिक दस्तावेजों, सरकारी नियुक्ति रिकॉर्ड और अन्य अभिलेखों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

देवास के चिकित्सा अधिकारी के नाम से जुड़े दस्तावेजों के उपयोग का आरोप

मामले में यह जानकारी भी सामने आई है कि बिरसा के तत्कालीन बीएमओ द्वारा देवास जिले में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी सुनील कुमार के नाम से जुड़े शैक्षणिक दस्तावेजों का कथित तौर पर उपयोग किया गया था।

इसी आधार पर एक ही डिग्री नंबर से दो अलग-अलग चिकित्सकों के सरकारी सेवा में कार्यरत होने की स्थिति सामने आने का दावा किया गया है।

हालांकि जांच में यह भी स्पष्ट होना आवश्यक है कि वास्तविक डिग्री धारक की पहचान और शैक्षणिक रिकॉर्ड की पुष्टि संबंधित विश्वविद्यालय तथा मेडिकल पंजीयन प्राधिकरण से किस प्रकार की गई है।

15 साल तक नियुक्ति की जांच क्यों नहीं हुई? स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल

इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया और शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन की व्यवस्था पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।

यदि किसी चिकित्सक ने वास्तव में दूसरे व्यक्ति के नाम की डिग्री के आधार पर वर्षों तक सरकारी सेवा की, तो यह जांच का विषय होगा कि नियुक्ति और बाद की पदस्थापनाओं के दौरान दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि क्यों नहीं हो सकी।

यह भी जांच का विषय हो सकता है कि पूर्व में प्राप्त शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और संबंधित अधिकारियों ने किन अभिलेखों के आधार पर नियुक्ति या सेवा जारी रखने की अनुमति दी।

हालांकि किसी वरिष्ठ अधिकारी की मिलीभगत या संरक्षण का दावा अभी प्रमाणित नहीं है। ऐसे आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र विभागीय जांच के बाद ही संभव होगी।

जांच में उठने वाले महत्वपूर्ण सवाल
  • वर्ष 2008 की नियुक्ति के समय MBBS डिग्री का सत्यापन कैसे हुआ?
  • वर्ष 2012 में BMO पदस्थापना से पहले किन दस्तावेजों की जांच की गई?
  • एक ही डिग्री नंबर का उपयोग दो व्यक्तियों के रिकॉर्ड में कैसे सामने आया?
  • पूर्व में की गई शिकायतों पर विभाग ने क्या कार्रवाई की?
  • क्या नियुक्ति और सेवा संबंधी अभिलेखों में अन्य अनियमितताएं भी हैं?
  • क्या विभागीय जांच में सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?

FIR के बाद अब पुलिस विवेचना और विभागीय कार्रवाई पर नजर

बिरसा पुलिस ने तत्कालीन बीएमओ सुनील कुमार सिंह के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। अब जांच के दौरान संबंधित शैक्षणिक दस्तावेजों की प्रामाणिकता, नियुक्ति प्रक्रिया और कथित अनुचित लाभ से जुड़े तथ्यों का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियुक्ति और दस्तावेज सत्यापन से संबंधित जिम्मेदारियों की समीक्षा की स्थिति भी स्पष्ट होना बाकी है।

मामले में एफआईआर दर्ज होना जांच और कानूनी कार्रवाई का चरण है। संबंधित व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।

एक डिग्री, दो डॉक्टर और सरकारी नियुक्ति पर उठे सवाल

बालाघाट के बिरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के तत्कालीन बीएमओ सुनील कुमार सिंह के खिलाफ कथित कूटरचित एमबीबीएस दस्तावेजों के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त करने का मामला दर्ज किया गया है। करीब 15 वर्षों तक सरकारी चिकित्सा सेवा से जुड़े रहने के इस प्रकरण में अब पुलिस जांच के साथ नियुक्ति और दस्तावेज सत्यापन की व्यवस्था की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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लेखक

Arti Lodhi

Editor In Chief

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