जबलपुर। मध्य प्रदेश में धान के परिवहन और आपूर्ति से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला अब प्रदेशव्यापी जांच की दिशा में बढ़ गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अलग-अलग जिलों में धान परिवहन से संबंधित शिकायतों और संभावित गड़बड़ियों की जांच कर छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का समय दिया है।
चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने यह भी कहा है कि सरकार द्वारा पेश की जाने वाली जांच रिपोर्ट की एक प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उपलब्ध कराई जाए, ताकि रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों का अध्ययन कर अगली सुनवाई में पक्ष रखा जा सके। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को बताई गई है।
जबलपुर कलेक्टर की जांच से सामने आया था मामला
इस मामले की शुरुआत जबलपुर में हुई जांच से जुड़ी है। हाईकोर्ट के समक्ष रखे गए रिकॉर्ड के मुताबिक जबलपुर कलेक्टर की जांच में धान के परिवहन और आपूर्ति में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया था। इस जांच में करीब 43.03 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी का उल्लेख किया गया।
अदालत के पूर्व आदेश में वाहनों की संख्या और परिवहन की गई धान की मात्रा के बीच गंभीर अंतर का उल्लेख भी सामने आया था। इसके बाद अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज होने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी अदालत को दी गई।
हाईकोर्ट के 14 अगस्त के आदेश में 43.03 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी का उल्लेख जबलपुर कलेक्टर की जांच के संदर्भ में है। प्रदेश के अन्य जिलों में इसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं, इसकी अलग से जांच कराई जा रही है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले इस राशि को 28 जिलों का कुल प्रमाणित घोटाला नहीं माना जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने सभी जिलों के कलेक्टरों को दिया था जांच का निर्देश
मामले में हाईकोर्ट ने 14 अगस्त 2026 को महत्वपूर्ण आदेश पारित किया था। तत्कालीन एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने जबलपुर में सामने आए मामले को देखते हुए मध्य प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिले में इसी प्रकृति की जांच करने और रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन से भी पूछा था कि जबलपुर कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर क्या कार्रवाई की गई और प्रदेश के अन्य हिस्सों में इस तरह की जांच क्यों नहीं की गई। इसके साथ ही आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW को भी अपनी जांच की स्थिति बताने के निर्देश दिए गए थे।
GPS व्यवस्था के बावजूद गड़बड़ी का आरोप
जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि धान के परिवहन और आपूर्ति की निगरानी के लिए वाहनों में GPS लगाने सहित स्पष्ट प्रक्रिया और दिशा-निर्देश मौजूद हैं।
इसके बावजूद परिवहन प्रक्रिया में कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन हुआ। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि निगरानी व्यवस्था निर्धारित थी तो यह जांच का विषय है कि कथित अनियमितताएं किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में हुईं।
कलेक्टर की रिपोर्ट में वाहनों और धान की मात्रा पर सवाल
हाईकोर्ट के पूर्व आदेश में जबलपुर कलेक्टर द्वारा 10 जुलाई 2025 को प्रस्तुत जांच नोट का उल्लेख किया गया है। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार जांच में परिवहन के लिए दर्शाए गए वाहनों और धान की आपूर्ति की मात्रा के बीच गंभीर अंतर सामने आने की बात कही गई थी।
जांच में मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन, वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन से जुड़े कर्मचारियों, अन्य सरकारी कर्मचारियों, राइस मिलर्स और ट्रांसपोर्टरों की कथित भूमिका से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया गया था। इन आरोपों पर अंतिम जिम्मेदारी संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।
हाईकोर्ट के 14 अगस्त के आदेश में दर्ज कलेक्टर की प्रारंभिक जांच के अनुसार 46 राइस मिलर्स में से 43 की भूमिका कथित अनियमितताओं के संदर्भ में सामने आने का उल्लेख किया गया था। इनसे संबंधित आपराधिक जिम्मेदारी और आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच तथा अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
याचिकाकर्ताओं ने प्रदेश स्तर पर जांच की उठाई मांग
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मामला केवल जबलपुर तक सीमित मानकर जांच बंद नहीं की जानी चाहिए। इसी आधार पर प्रदेश के दूसरे जिलों में धान के परिवहन और आपूर्ति से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका में पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग भी रखी गई है। हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में स्पष्ट किया था कि सभी जिलों की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह विचार किया जाएगा कि मामला CBI को सौंपे जाने योग्य है या नहीं।
एथनोल के लिए उपलब्ध कराए गए स्टॉक को लेकर भी दावा
याचिकाकर्ता डॉ. पीजी नाजपाण्डे की ओर से यह दावा भी किया गया है कि एथनोल उत्पादन के लिए उपलब्ध कराए गए धान के स्टॉक को कथित तौर पर निर्धारित गंतव्य तक पहुंचाने के बजाय रास्ते में बेच दिया गया। यह याचिकाकर्ता की ओर से लगाया गया आरोप है और इसकी पुष्टि जांच में सामने आने वाले रिकॉर्ड से होनी है।
याचिकाकर्ताओं ने जबलपुर के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की संभावित अनियमितताओं की जांच की आवश्यकता बताई है।
अब छह सप्ताह में सामने आएगी सरकार की विस्तृत रिपोर्ट
ताजा सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जांच पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
इस रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि जबलपुर के अलावा किन जिलों में जांच हुई, वहां क्या तथ्य सामने आए, किन मामलों में एफआईआर या अन्य कार्रवाई हुई और क्या जांच को किसी दूसरी एजेंसी को सौंपने की आवश्यकता है।
मामला — धान के परिवहन और आपूर्ति में कथित अनियमितता
मूल PIL — WP No. 33728/2025
जबलपुर जांच में उल्लेखित राशि — करीब 43.03 करोड़ रुपये
14 अगस्त का आदेश — सभी जिलों के कलेक्टरों को जांच के निर्देश
EOW — जांच की स्टेटस रिपोर्ट देने का निर्देश
वर्तमान निर्देश — राज्य सरकार को छह सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी है
अगली सुनवाई — 16 नवंबर 2026
जांच रिपोर्ट पर टिकी अगली सुनवाई
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता नीलेश यादव, EOW की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे तथा नागरिक आपूर्ति निगम की ओर से अधिवक्ता विवेक रंजन पाण्डेय उपस्थित रहे।
अब अगली सुनवाई में सरकार की जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट आगे की जांच और कार्रवाई के संबंध में विचार कर सकता है। फिलहाल प्रदेश के अन्य जिलों से जुड़े आरोप जांच के दायरे में हैं और उन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।



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