जबलपुर। घमापुर थाना क्षेत्र के शीतलामाई इलाके में सोमवार सुबह बरैयों के झुंड ने अचानक लोगों पर हमला कर दिया। घटना में 67 वर्षीय शिव कुमारी की मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। अचानक हुए हमले के बाद पूरी गली में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए अपने घरों की ओर भागे।
बताया जा रहा है कि रज्जन की डेरी के पास एक खंडहरनुमा मकान में बरैयों का बड़ा छत्ता लगा हुआ था। सुबह के समय अचानक बड़ी संख्या में बरैया बाहर निकलीं और आसपास मौजूद लोगों पर हमला करने लगीं। इसी दौरान पानी भरने निकली शिव कुमारी भी इनके हमले की चपेट में आ गईं।
पानी भरने निकली थीं शिव कुमारी
जानकारी के मुताबिक शिव कुमारी सोमवार सुबह करीब 6 बजे पानी भरने के लिए घर से बाहर निकली थीं। इसी दौरान गली में स्थित खंडहरनुमा मकान में बने छत्ते से बड़ी संख्या में बरैया निकल आईं और आसपास मौजूद लोगों पर हमला करने लगीं।
अचानक हुए हमले से गली में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। आसपास रहने वाले कई लोगों ने अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर खुद को सुरक्षित किया।
गंभीर हालत में अस्पताल ले गए, नहीं बच सकी जान
बरैयों के हमले में शिव कुमारी गंभीर रूप से प्रभावित हुईं और बेहोश होकर गिर गईं। परिजन और पड़ोसी उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां से हालत को देखते हुए उन्हें मेडिकल अस्पताल रेफर किया गया। मेडिकल अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना में आधा दर्जन से अधिक अन्य लोगों के भी घायल होने की जानकारी है। अचानक इतनी बड़ी संख्या में बरैयों के निकलने से इलाके के लोगों में काफी देर तक दहशत का माहौल रहा।
भाई का दावा—शरीर पर बड़ी संख्या में चिपकी थीं बरैया
शिव कुमारी के भाई प्रदीप सिंह ने घटना को लेकर बताया कि जब उन्होंने अपनी बहन को देखा तो उनके शरीर पर बड़ी संख्या में बरैया चिपकी हुई थीं। प्रदीप का दावा है कि यह संख्या करीब 400 से 500 तक रही होगी। हालांकि यह परिजन का अनुमान है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
प्रदीप सिंह के मुताबिक उन्होंने किसी तरह अपनी बहन के शरीर से बरैयों को हटाया। इसके बाद छत्ते से दोबारा हमला होने के खतरे को देखते हुए उसे नष्ट करने का प्रयास किया गया।
परिजनों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
घटना के बाद परिजनों ने प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि खंडहरनुमा मकान में बरैयों का छत्ता होने की जानकारी पहले ही नगर निगम को दी गई थी, लेकिन शिकायत के बावजूद इसे हटाने के लिए समय रहते कार्रवाई नहीं की गई।
परिजनों का कहना है कि यदि शिकायत पर पहले कार्रवाई कर छत्ते को सुरक्षित तरीके से हटवा दिया जाता तो शायद इतनी गंभीर घटना से बचा जा सकता था। हालांकि नगर निगम को शिकायत कब और किस माध्यम से दी गई थी तथा उस पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
परिजनों ने दावा किया है कि बरैयों के छत्ते की शिकायत पहले की गई थी। अब यह जांच का विषय है कि संबंधित विभाग को शिकायत मिली थी या नहीं और यदि मिली थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई।
बरैया के हमले को हल्के में लेना हो सकता है खतरनाक
बरैया या ततैया के एक साथ बड़ी संख्या में डंक मारने की स्थिति गंभीर हो सकती है। इसके अलावा कुछ लोगों में डंक के बाद तेज एलर्जिक प्रतिक्रिया भी हो सकती है। सांस लेने में परेशानी, चक्कर, बेहोशी, चेहरे या गले में सूजन अथवा बड़ी संख्या में डंक लगने की स्थिति में पीड़ित को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।
रिहायशी इलाके में बड़ा छत्ता दिखाई देने पर उसे खुद हटाने या आग लगाने के बजाय प्रशिक्षित टीम अथवा संबंधित विभाग की सहायता लेना अधिक सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि छेड़छाड़ होने पर पूरा झुंड एक साथ हमला कर सकता है।



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