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पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंची महिला की सर्जरी के बाद मौत, परिजनों ने शैल्वी अस्पताल पर लगाए गंभीर आरोप; मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की मांग

जबलपुर के विजयनगर स्थित शैल्वी अस्पताल में पनागर के बिजोरा गांव निवासी भगवती पटेल की उपचार के दौरान मौत के बाद परिजनों ने इलाज की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का कहना है कि महिला पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थीं, जहां जांच के बाद हृदय की नसों में ब्लॉकेज बताकर सर्जरी की सलाह दी गई। परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य बीमा की जानकारी मिलने के बाद जल्दबाजी में सर्जरी कराई गई और करीब छह घंटे बाद महिला की मौत हो गई। अस्पताल पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति मरीज की जांच रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, सर्जरी के चिकित्सकीय आधार और अस्पताल का पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंची महिला की सर्जरी के बाद मौत, परिजनों ने शैल्वी अस्पताल पर लगाए गंभीर आरोप; मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की मांग

जबलपुर। विजयनगर स्थित शैल्वी अस्पताल में उपचार के दौरान एक महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और इलाज की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पनागर के बिजोरा गांव निवासी भगवती पटेल को परिजन पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिवार का कहना है कि अस्पताल में जांच के बाद उन्हें हृदय की नसों में ब्लॉकेज की जानकारी दी गई और सर्जरी की सलाह दी गई।

मृतका के बेटे जितेंद्र पटेल के मुताबिक उनकी मां को पहले से किसी गंभीर हृदय संबंधी बीमारी की जानकारी नहीं थी। परिवार का दावा है कि सर्जरी के करीब छह घंटे बाद महिला की हालत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध जताते हुए पूरे उपचार की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

इलाज की पूरी प्रक्रिया पर परिवार ने उठाए सवाल
परिजनों का कहना है कि महिला पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थीं। जांच के बाद हृदय की नसों में ब्लॉकेज बताकर सर्जरी की सलाह दी गई और ऑपरेशन के कुछ घंटे बाद उनकी मौत हो गई। परिवार अब जांच रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और सर्जरी की आवश्यकता की स्वतंत्र जांच चाहता है।

पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थीं भगवती पटेल

परिजनों के अनुसार पनागर क्षेत्र के बिजोरा गांव निवासी भगवती पटेल को पेट में दर्द होने के बाद उपचार के लिए विजयनगर स्थित अस्पताल लाया गया था। परिवार का दावा है कि उन्हें पहले से किसी गंभीर हृदय रोग की जानकारी नहीं थी।

मृतका के बेटे जितेंद्र पटेल का कहना है कि अस्पताल में शुरुआती जांच के बाद डॉक्टरों ने हृदय की नसों में ब्लॉकेज होने की जानकारी दी और जल्द उपचार की आवश्यकता बताई। इसके बाद परिवार के सामने सर्जरी का विकल्प रखा गया।

सर्जरी के करीब छह घंटे बाद मौत का दावा

परिवार के अनुसार डॉक्टरों की सलाह के बाद महिला की सर्जरी कराई गई। परिजनों का दावा है कि ऑपरेशन के करीब छह घंटे बाद महिला की स्थिति बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। मौत के बाद परिवार ने उपचार की पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।

परिजनों का कहना है कि यदि मरीज की हृदय संबंधी स्थिति गंभीर थी तो उन्हें बीमारी की गंभीरता, सर्जरी की आवश्यकता, उपलब्ध उपचार विकल्प और संभावित जोखिमों के संबंध में पर्याप्त जानकारी दी जानी चाहिए थी।

सर्जरी जरूरी थी या नहीं, मेडिकल रिकॉर्ड से होगा स्पष्ट
केवल परिजनों के आरोपों के आधार पर यह निर्धारित नहीं किया जा सकता कि सर्जरी चिकित्सकीय रूप से आवश्यक थी या नहीं। मरीज की जांच रिपोर्ट, हृदय संबंधी परीक्षण, डॉक्टरों के क्लिनिकल नोट्स, सहमति पत्र और सर्जरी से जुड़े रिकॉर्ड की विशेषज्ञ जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

स्वास्थ्य बीमा को लेकर परिवार ने लगाया गंभीर आरोप

परिजनों ने अस्पताल पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। परिवार का दावा है कि मरीज के पास स्वास्थ्य बीमा होने की जानकारी मिलने के बाद उपचार की दिशा बदल गई और जल्दबाजी में सर्जरी कराने की सलाह दी गई।

परिवार के मुताबिक उपचार और सर्जरी से संबंधित करीब ढाई लाख रुपये का बिल बनाया गया। परिजनों ने आशंका जताई है कि बीमा पॉलिसी को ध्यान में रखते हुए उपचार का निर्णय लिया गया।

हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बीमा के कारण सर्जरी कराए जाने संबंधी आरोप की पुष्टि के लिए अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, बीमा क्लेम से संबंधित दस्तावेज, जांच रिपोर्ट और उपचार संबंधी निर्णयों की जांच आवश्यक होगी।

परिजनों का आरोप—इलाज के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी

परिवार का आरोप है कि उपचार के दौरान महिला की वास्तविक स्थिति और सर्जरी से जुड़े संभावित जोखिमों के बारे में उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। परिजन यह जानना चाहते हैं कि पेट दर्द की शिकायत के बाद किए गए किन परीक्षणों में हृदय संबंधी समस्या सामने आई और उनके आधार पर सर्जरी का निर्णय कैसे लिया गया।

चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता और उसकी उपयुक्तता का आकलन संबंधित जांच रिपोर्ट तथा मरीज की उस समय की क्लिनिकल स्थिति को देखे बिना नहीं किया जा सकता। इसलिए मामले में विशेषज्ञ चिकित्सकीय समीक्षा महत्वपूर्ण होगी।

शव सौंपने को लेकर भी हुआ विवाद

महिला की मौत के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और प्रबंधन के बीच विवाद की स्थिति बनने की बात भी सामने आई है। परिवार का आरोप है कि अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर मांगे जाने के बावजूद उसे तत्काल नहीं सौंपा गया। इसे लेकर परिजनों ने विरोध जताया।

परिवार के मुताबिक कुछ समय तक चले विवाद के बाद पार्थिव शरीर उन्हें सौंप दिया गया। शव सौंपने में कथित देरी किन परिस्थितियों में हुई, इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है।

इन मेडिकल दस्तावेजों की जांच से सामने आ सकती है सच्चाई

परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ऐसी स्थिति में मरीज की अस्पताल में भर्ती के समय की स्थिति, शुरुआती जांच, ईसीजी या अन्य हृदय संबंधी परीक्षण, रक्त जांच, डॉक्टरों के क्लिनिकल नोट्स, सर्जरी की सलाह, सहमति पत्र, ऑपरेशन रिकॉर्ड, उपचार के दौरान दिए गए मेडिकल मैनेजमेंट और बिलिंग रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इन दस्तावेजों की सक्षम स्वास्थ्य प्राधिकारी अथवा विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड द्वारा समीक्षा किए जाने पर यह समझने में मदद मिल सकती है कि मरीज की स्थिति क्या थी, सर्जरी किस चिकित्सकीय आधार पर की गई और ऑपरेशन के बाद ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं जिनके बाद महिला की मौत हुई।

अस्पताल का पक्ष भी जरूरी
फिलहाल अस्पताल और डॉक्टरों के खिलाफ लगाए गए आरोप परिजनों के कथन पर आधारित हैं। अस्पताल प्रबंधन तथा संबंधित डॉक्टरों का विस्तृत पक्ष सामने आने और मेडिकल रिकॉर्ड की विशेषज्ञ जांच के बाद ही यह निर्धारित किया जा सकेगा कि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं।

परिवार ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की

महिला की मौत से आक्रोशित परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में केवल बिल ही नहीं बल्कि मरीज की पूरी मेडिकल फाइल, जांच रिपोर्ट, सर्जरी की आवश्यकता, डॉक्टरों की सलाह और ऑपरेशन के बाद की स्थिति को भी शामिल किया जाना चाहिए।

मामले में चिकित्सकीय लापरवाही हुई या मरीज की स्थिति के कारण उपचार के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी—इसका निष्कर्ष विशेषज्ञ जांच के बिना निकालना उचित नहीं होगा। परिजनों के आरोप और अस्पताल का पक्ष दोनों सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

जांच में इन सवालों के जवाब अहम
महिला को भर्ती करते समय उसकी वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति क्या थी? हृदय की नसों में ब्लॉकेज किस जांच में सामने आया? सर्जरी की आवश्यकता कितनी तत्काल थी? परिवार को जोखिम और विकल्पों की क्या जानकारी दी गई? ऑपरेशन के बाद महिला की स्थिति क्यों बिगड़ी? इन सवालों के जवाब मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञ जांच से ही सामने आ सकते हैं।

नोट: अस्पताल, डॉक्टरों, स्वास्थ्य बीमा और उपचार प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोप मृतका के परिजनों के हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। चिकित्सकीय लापरवाही का निर्धारण सक्षम स्वास्थ्य प्राधिकारी अथवा विशेषज्ञ जांच के आधार पर ही किया जा सकता है। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष मिलने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।

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लेखक

Arti Lodhi

Editor In Chief

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