जबलपुर। गढ़ा स्थित रानी दुर्गावती कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला पीएमश्री स्कूल में कक्षा सातवीं की एक छात्रा के घायल होने का मामला सामने आया है। छात्रा के परिजनों ने स्कूल के एक शिक्षक पर बच्ची की ओर कथित रूप से डस्टर फेंकने का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि डस्टर छात्रा के सिर पर लगा, जिससे उसे चोट आई और खून निकलने लगा।
परिवार का आरोप है कि घटना के बाद मामले की जानकारी घर तक नहीं पहुंचने देने का प्रयास किया गया और बच्ची को इस संबंध में माता-पिता को नहीं बताने के लिए डराया गया। छात्रा ने घर पहुंचने के बाद अपने माता-पिता को घटनाक्रम बताया, जिसके बाद परिजन उसे उपचार के लिए डॉक्टर के पास लेकर गए। घटना को लेकर परिवार ने नाराजगी जताई है।
बुधवार को स्कूल में हुई घटना
प्राप्त जानकारी के अनुसार गढ़ा क्षेत्र में रहने वाली छात्रा रानी दुर्गावती कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला पीएमश्री स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ती है। परिजनों का आरोप है कि बुधवार को स्कूल में शिक्षक आशीष जैन ने कथित तौर पर छात्रा की ओर डस्टर फेंका। डस्टर उसके सिर पर जा लगा और वह घायल हो गई।
परिवार के अनुसार चोट लगने के बाद छात्रा के सिर से खून निकलने लगा। घटना के समय स्कूल में इसके बाद क्या कार्रवाई की गई और छात्रा को तत्काल किस प्रकार की प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई गई, इस संबंध में स्कूल प्रबंधन का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
घर पहुंची तो माता-पिता को बताई पूरी घटना
परिजनों का कहना है कि स्कूल से घर लौटने के बाद बच्ची ने माता-पिता को घटना की जानकारी दी। उसके सिर में लगी चोट देखने के बाद परिवार उसे उपचार के लिए डॉक्टर के पास लेकर गया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों में नाराजगी बढ़ गई। परिवार का कहना है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी परिस्थिति में ऐसी घटना को सामान्य मानकर नहीं छोड़ा जा सकता।
परिवार ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद बच्ची को घर पर इसकी जानकारी नहीं देने के लिए डराया गया। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। संबंधित शिक्षक और स्कूल प्रबंधन का पक्ष मिलने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
स्कूल में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
स्कूल परिसर में किसी छात्र या छात्रा के घायल होने की घटना बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की जिम्मेदारी से जुड़ा गंभीर विषय है। खासकर जब मामला कम उम्र की छात्रा से जुड़ा हो तो घटना की निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों का बयान सामने आना जरूरी है।
यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि डस्टर किन परिस्थितियों में छात्रा को लगा, घटना के तत्काल बाद स्कूल की ओर से क्या कदम उठाए गए और क्या छात्रा के परिजनों को स्कूल की तरफ से सूचना दी गई थी।
स्कूल प्रबंधन और शिक्षक का पक्ष भी महत्वपूर्ण
फिलहाल घटना को लेकर सामने आई जानकारी मुख्य रूप से छात्रा के परिजनों के आरोपों पर आधारित है। शिक्षक पर जानबूझकर डस्टर से मारने और घटना की जानकारी घर पर नहीं देने के लिए धमकाने का आरोप लगाया गया है। इन आरोपों पर संबंधित शिक्षक और स्कूल प्रबंधन का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
यदि शिक्षा विभाग या स्कूल प्रबंधन की ओर से मामले की जांच कराई जाती है तो उसमें छात्रा, शिक्षक, कक्षा में मौजूद अन्य विद्यार्थियों तथा संबंधित कर्मचारियों के बयान से घटनाक्रम स्पष्ट हो सकता है।
डस्टर छात्रा को किन परिस्थितियों में लगा, क्या उसे तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया, परिजनों को स्कूल की ओर से कब सूचना दी गई और बच्ची को कथित रूप से धमकाने के आरोप में कितनी सच्चाई है—इन सवालों का जवाब जांच और स्कूल प्रबंधन व संबंधित शिक्षक का पक्ष सामने आने के बाद स्पष्ट होगा।
नोट: खबर में नाबालिग छात्रा की निजता को ध्यान में रखते हुए उसका नाम प्रकाशित नहीं किया गया है। शिक्षक के संबंध में लगाए गए आरोप परिजनों के कथन पर आधारित हैं और जांच में आरोप सिद्ध होने तक इन्हें आरोप के रूप में ही पढ़ा जाना चाहिए।



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