जबलपुर। नवरात्र में संस्कारधानी के दुर्गोत्सव की भव्यता इस बार एक नए अंदाज में दिखाई देने वाली है। शहर के सिविल लाइन में बाल दुर्गोत्सव समिति ऐसा पंडाल तैयार कर रही है, जहां मां जगदंबा के दर्शन के लिए श्रद्धालु केवल पैदल नहीं जाएंगे, बल्कि उन्हें नाव में बैठकर करीब 70 से 80 मीटर का सफर तय करना होगा।
समिति ने इस बार पंडाल को मां नर्मदा और उनके प्राकृतिक तट की थीम पर तैयार करने की योजना बनाई है। पंडाल परिसर में विशाल कुंड, दोनों ओर पहाड़नुमा संरचनाएं, हरियाली और दूसरे छोर पर मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ बैजनाथ धाम मंदिर की प्रतिकृति श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण होगी।
सिविल लाइन में दिखाई देगा नर्मदा तट का नजारा
जबलपुर और मां नर्मदा का रिश्ता केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से भी जुड़ा है। इसी भाव को इस बार दुर्गोत्सव की थीम में उतारने की कोशिश की जा रही है।
बाल दुर्गोत्सव समिति पंडाल परिसर को इस तरह तैयार कर रही है कि अंदर प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को नर्मदा नदी के तट जैसा वातावरण महसूस हो। पानी, पहाड़ और हरियाली के संयोजन से पूरे परिसर को प्राकृतिक स्वरूप देने की योजना है।
नर्मदा जल से तैयार होगा विशेष कुंड
समिति की योजना के मुताबिक पंडाल के प्रवेश द्वार से करीब तीन मीटर आगे नर्मदा नदी के स्वरूप को दर्शाने वाला बड़ा टैंक या कुंड तैयार किया जा रहा है। इसमें नर्मदा जल भरने की योजना है।
कुंड को केवल सजावटी हिस्सा नहीं रखा जाएगा। श्रद्धालुओं को इसी जल क्षेत्र से नाव के जरिए दूसरे छोर तक ले जाने की तैयारी है, जहां मां जगदंबा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
समिति की योजना के अनुसार श्रद्धालु नाव में बैठकर करीब 70 से 80 मीटर की दूरी तय करेंगे। इसके बाद दूसरे छोर पर बने मां जगदंबा के दरबार में दर्शन कर सकेंगे।
मां दुर्गा के साथ दिखेगी बैजनाथ धाम की झलक
इस पंडाल की खासियत केवल नर्मदा का स्वरूप और नाव की यात्रा तक सीमित नहीं रहेगी। मां जगदंबा की प्रतिमा के साथ बैजनाथ धाम मंदिर की प्रतिकृति भी तैयार की जा रही है।
यानी श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में नर्मदा तट जैसा प्राकृतिक वातावरण और मंदिर की भव्य संरचना देखने को मिलेगी। समिति धार्मिक आस्था और दृश्य सजावट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
तीन नाव चलाने की तैयारी
श्रद्धालुओं को मां के दरबार तक पहुंचाने के लिए तीन नावों की व्यवस्था प्रस्तावित है। नवरात्र के दौरान पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए समिति के सामने भीड़ प्रबंधन और जल क्षेत्र में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल होगी।
समिति का कहना है कि नाव से दर्शन की व्यवस्था के दौरान सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि भीड़ बढ़ने की स्थिति में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
नाव से दर्शन इस आयोजन का सबसे अलग आकर्षण होगा। ऐसे में नाव की क्षमता, श्रद्धालुओं की कतार, चढ़ने-उतरने की व्यवस्था, जल क्षेत्र की बैरिकेडिंग और आपातकालीन इंतजाम बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे।
कुंड के दोनों तरफ बन रहे पहाड़, उगेगी हरियाली
पंडाल में कृत्रिम सजावट के साथ प्राकृतिक माहौल तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। कुंड के दोनों ओर पहाड़ जैसी संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन्हें हरियाली से ढकने की योजना है।
समिति की ओर से इन हिस्सों में प्राकृतिक बीज भी रोपे गए हैं। उद्देश्य है कि आयोजन शुरू होने तक यहां पौधों और हरियाली का ऐसा स्वरूप तैयार हो जाए, जिससे कुंड के दोनों किनारे किसी प्राकृतिक नदी तट की तरह नजर आएं।
कमलेश अग्रवाल बोले—नर्मदा किनारे जैसा माहौल बनाने की कोशिश
समिति प्रमुख कमलेश अग्रवाल के अनुसार इस बार कोशिश पूरे पंडाल परिसर को नर्मदा नदी के किनारे जैसा स्वरूप देने की है। इसके लिए जल क्षेत्र के दोनों ओर प्राकृतिक वातावरण तैयार किया जा रहा है।
पहाड़नुमा संरचनाओं पर विकसित होने वाली हरियाली और बीच में मौजूद जल क्षेत्र इस थीम को और वास्तविक रूप देने में मदद करेंगे।
आयोजन — बाल दुर्गोत्सव समिति, सिविल लाइन
थीम — मां नर्मदा और प्राकृतिक नदी तट
नाव यात्रा — करीब 70 से 80 मीटर
प्रस्तावित नावें — 3
जल व्यवस्था — नर्मदा जल से विशेष कुंड
मुख्य आकर्षण — नाव से मां जगदंबा के दर्शन
विशेष संरचना — बैजनाथ धाम मंदिर की प्रतिकृति
सजावट — पहाड़नुमा संरचनाएं और प्राकृतिक हरियाली
नवरात्र में श्रद्धालुओं के लिए अलग अनुभव की तैयारी
जबलपुर में नवरात्र के दौरान अलग-अलग दुर्गोत्सव समितियां हर साल नई थीम और भव्य सजावट के जरिए श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। इस बार सिविल लाइन की यह थीम नाव यात्रा के कारण खास चर्चा में रह सकती है।
समिति की तैयारियां पूरी होने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पहले नर्मदा तट जैसा प्राकृतिक वातावरण मिलेगा, फिर नाव का सफर और उसके बाद मां जगदंबा के दर्शन होंगे।
आस्था, नर्मदा, प्रकृति और दुर्गोत्सव को एक साथ जोड़ने की इस कोशिश में नाव से मां के दर्शन सबसे बड़ा आकर्षण बनने जा रहे हैं। हालांकि नाव संचालन और जल क्षेत्र से जुड़ी अंतिम व्यवस्था आयोजन से पहले सुरक्षा इंतजामों के अनुसार तय की जाएगी।



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