जबलपुर। सड़क पर खराब हुए वाहन को हटाने से शुरू हुआ विवाद शुक्रवार को गोहलपुर थाने के बाहर अधिवक्ताओं के धरने और हंगामे तक पहुंच गया। अधिवक्ताओं ने एफआरवी में तैनात एक आरक्षक पर वाहन हटाने के नाम पर कथित तौर पर 20 हजार रुपये मांगने, अभद्रता और गाली-गलौज करने के आरोप लगाए हैं।
घटना से नाराज बड़ी संख्या में अधिवक्ता गोहलपुर थाने पहुंच गए और संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। इस दौरान थाना प्रभारी रितेश पांडे और जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष मनीष मिश्रा के बीच भी तीखी बहस हुई। अधिवक्ताओं का कहना है कि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई होने तक उनका विरोध जारी रहेगा।
मैकेनिक बुलाने की बात कही, फिर शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार अधिवक्ता आशीष पटेल के परिवार की एक गाड़ी बाईपास के मुख्य मार्ग से गुजर रही थी। इसी दौरान वाहन में तकनीकी खराबी आ गई अथवा डीजल खत्म होने के कारण वह सड़क पर बंद हो गया।
मौके पर पहुंची एफआरवी में तैनात आरक्षक रंजीत कुमार यादव ने वाहन को मुख्य मार्ग से हटाने के लिए कहा। अधिवक्ता पक्ष का दावा है कि उन्होंने मैकेनिक बुलाकर जल्द ही वाहन को सड़क के किनारे करने की बात कही थी।
अधिवक्ताओं का आरोप—20 हजार रुपये मांगे गए
अधिवक्ताओं का आरोप है कि इसी दौरान संबंधित आरक्षक ने वाहन को थाने ले जाने की बात कही और कथित तौर पर 20 हजार रुपये की मांग की। अधिवक्ता पक्ष ने सवाल किया कि यदि यह राशि किसी वैधानिक चालान के रूप में ली जा रही है तो इसकी आधिकारिक रसीद दी जाए।
आरोप है कि 20 हजार रुपये की रसीद मांगने के बाद विवाद और बढ़ गया। अधिवक्ताओं का दावा है कि संबंधित पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर रसीद देने से इनकार कर दिया। हालांकि 20 हजार रुपये की कथित मांग के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
अधिवक्ता पक्ष के मुताबिक बाद में पुलिस की ओर से 5 हजार रुपये का चालान काटकर उसकी रसीद दी गई। विवाद 20 हजार रुपये की कथित मांग के साथ ही अभद्रता और वाहन को ले जाने के तरीके को लेकर बना रहा।
वाहन की चाबी लेकर नो-एंट्री क्षेत्र से थाने लाने का आरोप
अधिवक्ताओं का आरोप है कि विवाद के दौरान वाहन की चाबी ले ली गई और गाड़ी को कथित तौर पर नो-एंट्री क्षेत्र से होते हुए गोहलपुर थाने के बाहर लाकर खड़ा कर दिया गया। अधिवक्ता पक्ष ने इस प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।
इसके अलावा आरोप लगाया गया कि कार्रवाई के दौरान उनके साथी के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया और गाली-गलौज की गई। इन्हीं आरोपों को लेकर मामला और गरमा गया तथा अधिवक्ताओं ने पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।
गोहलपुर थाने के बाहर धरने पर बैठे अधिवक्ता
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता गोहलपुर थाने पहुंच गए। नाराज अधिवक्ताओं ने थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया और संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा विभागीय कार्रवाई की मांग की।
मामले की जानकारी मिलने पर जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मनीष मिश्रा भी मौके पर पहुंचे। थाने में मौजूद पुलिस अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच बातचीत के दौरान माहौल कई बार गरमाता दिखाई दिया।
धरने के दौरान गोहलपुर थाना प्रभारी रितेश पांडे और जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष मनीष मिश्रा के बीच तीखी नोकझोंक हुई। अधिवक्ता पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर की मांग पर अड़े रहे।
“चालान की रसीद मिल गई, लेकिन अभद्रता पर कार्रवाई हो”
अधिवक्ता गजेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक 5 हजार रुपये का चालान काटकर उसकी रसीद दे दी गई है, लेकिन विवाद केवल चालान तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि साथी अधिवक्ता के साथ कथित अभद्रता और गाली-गलौज की गई तथा वाहन को जिस तरीके से नो-एंट्री क्षेत्र से ले जाया गया, उसकी भी जांच होनी चाहिए।
अधिवक्ता पक्ष का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी थाना प्रभारी, सीएसपी सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी गई है और संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
एफआईआर की मांग पर अड़े वकील
धरने पर बैठे अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रमुख मांग संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की है। उनका कहना है कि मांग पर कार्रवाई नहीं होने तक विरोध जारी रखा जाएगा।
वाहन मुख्य मार्ग पर खराब होने के बाद शुरू हुआ घटनाक्रम
पुलिसकर्मी पर 20 हजार रुपये मांगने का आरोप
अधिवक्ता पक्ष ने मांगी कथित रकम की आधिकारिक रसीद
बाद में 5 हजार रुपये का चालान काटे जाने की बात
अभद्रता और गाली-गलौज का आरोप
संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर की मांग
गोहलपुर थाने के बाहर अधिवक्ताओं का धरना
पुलिस के विस्तृत आधिकारिक पक्ष का इंतजार
मामले में 20 हजार रुपये की कथित मांग, अभद्रता और गाली-गलौज सहित गंभीर आरोप अधिवक्ता पक्ष की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। पुलिस की ओर से पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि अधिवक्ताओं की शिकायत पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कोई विभागीय जांच अथवा अन्य कानूनी कार्रवाई शुरू की जाती है या नहीं। फिलहाल गोहलपुर थाने में हुआ यह विवाद पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच टकराव का मुद्दा बन गया है।



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