नई दिल्ली। अपनी कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले अभिनेता राजपाल यादव का सुप्रीम कोर्ट में अलग ही दर्द सामने आया। फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण से जुड़े चेक बाउंस विवाद में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए अभिनेता ने अदालत के सामने दावा किया कि 5 करोड़ रुपये से शुरू हुए वित्तीय विवाद ने उनके 22 करोड़ रुपये तक प्रभावित कर दिए और वर्षों की कानूनी लड़ाई का असर उनके पेशेवर करियर और प्रतिष्ठा पर भी पड़ा।
राजपाल यादव ने अदालत के सामने अपनी लंबी फिल्मी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने करीब 200 से 250 फिल्मों में काम किया है। अभिनेता ने दावा किया कि पिछले वर्षों में उन्हें बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा और अकेले ‘अता पता लापता’ में उनके करीब 17 करोड़ रुपये फंस गए।
‘अता पता लापता’ से शुरू हुआ लंबा विवाद
मामले की जड़ राजपाल यादव द्वारा निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण से जुड़ी है। फिल्म के लिए लिए गए करीब 5 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन को लेकर विवाद पैदा हुआ और भुगतान के लिए जारी चेक बाउंस होने के बाद मामला अदालत तक पहुंच गया।
राजपाल यादव ने अदालत में दावा किया कि फिल्म की रिलीज भी विवाद के कारण प्रभावित हुई। उनका कहना था कि फिल्म को बड़े स्तर पर सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना थी, लेकिन परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं रहीं।
अभिनेता ने अदालत में कहा कि वह शुरुआती दौर में ही रकम चुकाने के लिए तैयार थे, लेकिन विवाद बढ़ता चला गया। उन्होंने दावा किया कि इसका असर उनके करीब 22 करोड़ रुपये पर पड़ा और वर्षों तक उनकी पेशेवर छवि तथा ब्रांडिंग को नुकसान पहुंचा।
1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट पेश
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने बकाया भुगतान की दिशा में कदम उठाते हुए 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट अदालत के सामने पेश किया। उनकी ओर से कुल 2 करोड़ रुपये जमा करने का आश्वासन दिया गया।
उनके वकील ने बताया कि शेष 85 लाख रुपये पुश्तैनी संपत्ति की बिक्री से जुटाए जाएंगे। अभिनेता के मुताबिक संबंधित संपत्ति की कीमत करीब 30 करोड़ रुपये है। संभावित खरीदार भी भुगतान व्यवस्था के संबंध में अदालत में मौजूद था।
चीफ जस्टिस ने पूछा...“कुछ नया बना रहे हो नहीं?”
सुनवाई के दौरान माहौल उस समय कुछ अलग हुआ जब मुख्य न्यायाधीश ने राजपाल यादव से उनके फिल्मी काम को लेकर बातचीत की और पूछा कि क्या वह कुछ नया बना रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने अभिनेता को आगे बढ़ने और फिल्मों की ओर लौटने की बात कहते हुए एक अच्छी फिल्म बनाकर दर्शकों का मनोरंजन करने को कहा। राजपाल यादव ने भी संकेत दिया कि इस पूरे घटनाक्रम ने उन्हें एक नई फिल्म का विचार दिया है।
दिल्ली हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
चेक बाउंस से जुड़े मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सात मामलों में तीन-तीन महीने की कैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद अभिनेता ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट का ध्यान फिलहाल शिकायतकर्ता को बकाया भुगतान सुनिश्चित कराने पर है। अदालत इससे पहले भी अभिनेता को रकम जमा करने और भुगतान की ठोस योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दे चुकी है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूर्व निर्देशों के अनुपालन को लेकर अभिनेता को आगाह भी किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी तत्काल प्राथमिकता शिकायतकर्ता को बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित कराना है। भुगतान का मुद्दा सुलझने के बाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका के गुण-दोष पर विचार किया जाएगा।
एक फिल्म, वर्षों की कानूनी लड़ाई
‘अता पता लापता’ का विवाद राजपाल यादव के लिए केवल फिल्म के कारोबारी प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा। वित्तीय लेनदेन, चेक बाउंस के मामले और वर्षों तक चली अदालती कार्यवाही ने इसे उनकी जिंदगी के सबसे लंबे कानूनी विवादों में शामिल कर दिया।
1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट पेश करने के बाद अब शेष रकम के भुगतान पर नजर रहेगी। राजपाल यादव की कोशिश इस लंबे विवाद को समाप्त कर अपने फिल्मी करियर पर फिर से पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने की है।



पाठक प्रतिक्रियाएं
अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं है।