नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सात चेक बाउंस मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने भुगतान संबंधी निर्देशों का पालन नहीं होने पर उनके रवैये को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने अभिनेता को भुगतान के लिए एक और आखिरी मौका दिया है और मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजपाल यादव की ओर से समय पर रकम जमा नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया।
₹5 करोड़ और ₹2 करोड़ के आदेश में क्या है अंतर?
इस मामले में भुगतान की रकम को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में भ्रम की स्थिति दिखाई दी है। दरअसल 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को सरेंडर से छूट देते हुए ₹5 करोड़ जमा करने की शर्त रखी थी।
इसके बाद 15 सितंबर की सुनवाई में उनके वकील ने और समय मांगा। तब सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम अवसर देते हुए दो सप्ताह के भीतर कम से कम ₹2 करोड़ जमा करने और बकाया रकम चुकाने का ठोस प्रस्ताव पेश करने को कहा था। सरेंडर से मिली अंतरिम राहत भी 5 अक्टूबर तक बढ़ाई गई थी।
5 अक्टूबर को कोर्ट ने पूछा—आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ?
सोमवार, 5 अक्टूबर को मामला दोबारा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो तय भुगतान पूरा नहीं होने पर बेंच ने नाराजगी जताई। राजपाल यादव की ओर से बैंक बंद रहने और भुगतान की प्रक्रिया में देरी का तर्क दिया गया, लेकिन कोर्ट इससे संतुष्ट नजर नहीं आया।
बेंच ने सवाल उठाया कि पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद यदि और समय चाहिए था तो समय बढ़ाने के लिए आवेदन क्यों नहीं दिया गया।
₹50-₹50 लाख के चार डिमांड ड्राफ्ट की प्रतियां दिखाईं
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने कोर्ट को बताया कि ₹50-₹50 लाख के चार डिमांड ड्राफ्ट तैयार किए गए हैं। इनके फोटो कॉपी दस्तावेज कोर्ट के सामने रखे गए और बताया गया कि मूल डिमांड ड्राफ्ट महाराष्ट्र से दिल्ली लाए जा रहे हैं।
इस पर बेंच ने दस्तावेजों और वास्तविक भुगतान को लेकर सवाल किए। कोर्ट का रुख स्पष्ट था कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि उसके निर्देशों का वास्तविक अनुपालन होना चाहिए।
विवाद की शुरुआत — वर्ष 2010 की वित्तीय सहायता से
फिल्म — अता पता लापता
शुरुआती वित्तीय सहायता — करीब ₹5 करोड़
चेक बाउंस मामले — 7
सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम राहत — भुगतान की शर्त पर
15 सितंबर का निर्देश — ₹2 करोड़ जमा करने का अंतिम अवसर
5 अक्टूबर — भुगतान पूरा नहीं होने पर कोर्ट नाराज
अगली सुनवाई — 7 अक्टूबर
2010 में फिल्म बनाने के लिए लिया था पैसा
यह विवाद करीब डेढ़ दशक पुराना है। मामले के रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स से वर्ष 2010 में करीब ₹5 करोड़ की वित्तीय सहायता ली थी।
बाद में रकम की वापसी को लेकर विवाद बढ़ता गया। समझौते और भुगतान से जुड़े चेक बाउंस होने के बाद मामला अदालत पहुंचा और सात अलग-अलग चेक बाउंस मामलों में राजपाल यादव को दोषी ठहराया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बरकरार रखी थी सजा
दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 में इन मामलों में राजपाल यादव की दोषसिद्धि और तीन महीने की सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अभिनेता को शर्तों के साथ सरेंडर से अंतरिम राहत मिली।
सुप्रीम कोर्ट में अब मुख्य सवाल यह है कि कोर्ट के सामने दिए गए भुगतान संबंधी आश्वासनों और निर्देशों का पालन किस हद तक हुआ है।
शिकायतकर्ता के वकील ने भी उठाए तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता कंपनी की ओर से पेश वकील ने राजपाल यादव के रवैये पर सवाल उठाए। अभिनेता की ओर से की गई एक टिप्पणी के बाद बेंच भी नाराज हुई और जस्टिस बागची ने बेहद सख्त शब्दों में उन्हें चेतावनी दी।
कोर्ट ने संकेत दिया कि वह याचिका खारिज करने पर भी विचार कर सकता था, लेकिन शिकायतकर्ता को बकाया रकम मिलने की संभावना को ध्यान में रखते हुए अभिनेता को एक और अवसर दिया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने भुगतान के लिए बेहद सीमित समय देते हुए मामले को 7 अक्टूबर को फिर सुनवाई के लिए रखा है। अब अभिनेता की अंतरिम राहत आगे जारी रहेगी या कोर्ट कोई सख्त कदम उठाएगा, यह उनके अनुपालन और अगली सुनवाई पर निर्भर करेगा।
राजपाल यादव के लिए यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही उनके पिछले भुगतान व्यवहार पर असंतोष जता चुका है। अब अदालत ने साफ कर दिया है कि बार-बार दिए गए आश्वासन की जगह वास्तविक अनुपालन देखना होगा।



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