27 सितंबर 2026
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Sleeper Bus Safety: फिटनेस के बाद डिजाइन में बदलाव पर उठे सवाल, विशेषज्ञों ने औचक जांच और जवाबदेही की मांग की

बस हादसों के बाद लंबी दूरी की स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था और फिटनेस जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ बसों में फिटनेस प्रमाण पत्र मिलने के बाद बर्थ बढ़ाने के लिए मूल डिजाइन में बदलाव किया जाता है, जिससे गैलरी और आपातकालीन निकास प्रभावित हो सकते हैं। परिवहन विशेषज्ञों ने सड़कों पर औचक जांच तथा बस निर्माता, बॉडी बिल्डर और अन्य संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

Sleeper Bus Safety: फिटनेस के बाद डिजाइन में बदलाव पर उठे सवाल, विशेषज्ञों ने औचक जांच और जवाबदेही की मांग की

नई दिल्ली। हाल के बस हादसों के बाद लंबी दूरी की स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। परिवहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि केवल फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सड़क पर चल रही बसों की समय-समय पर औचक सुरक्षा जांच भी जरूरी है।

आरोप है कि कुछ बस ऑपरेटर अधिक यात्रियों को बैठाने के लिए फिटनेस जांच के बाद बस के अंदरूनी ढांचे और बर्थ व्यवस्था में बदलाव कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बदलावों से आपात स्थिति में यात्रियों को बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है।

⚠️ स्लीपर बसों की सुरक्षा पर सवाल
बर्थ की संख्या बढ़ाने, संकरी गैलरी, इमरजेंसी एग्जिट के सामने सामान और पर्याप्त अग्निशमन उपकरण न होने जैसे मुद्दों को लेकर विशेषज्ञों ने नियमित औचक जांच की जरूरत बताई है।

2x1 से 2x2 बर्थ करने के आरोप, यात्री क्षमता बढ़ाने का खेल

परिवहन क्षेत्र से जुड़े जानकारों के मुताबिक लंबी दूरी की कई स्लीपर बसों में एक तरफ डबल और दूसरी तरफ सिंगल बर्थ वाली 2x1 व्यवस्था देखने को मिलती है, जिसमें यात्रियों के आने-जाने के लिए बीच में गैलरी रहती है।

आरोप है कि कुछ ऑपरेटर अधिक यात्रियों को ले जाने के उद्देश्य से अंदरूनी व्यवस्था में बदलाव कर अतिरिक्त बर्थ लगा देते हैं। ऐसे मामलों में बस की क्षमता करीब 36 यात्रियों से बढ़ाकर 48 तक किए जाने के दावे सामने आए हैं।

विशेषज्ञों की चिंता है कि अतिरिक्त बर्थ लगाने से बर्थ के बीच की जगह और गैलरी संकरी हो सकती है। किसी दुर्घटना, आग या अन्य आपात स्थिति में यही बदलाव यात्रियों को तेजी से बाहर निकालने में बाधा बन सकता है।

SLEEPER BUS SAFETY
फिटनेस पास होने के बाद भी जांच क्यों जरूरी?
विशेषज्ञों की मांग—सड़क पर हो Surprise Inspection

फिटनेस सर्टिफिकेट के बाद बदलाव किए जाने का आरोप

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल फिटनेस प्रमाण पत्र मिलने के बाद बस में संभावित बदलाव को लेकर उठ रहा है। सूत्रों का दावा है कि फिटनेस जांच के दौरान बस को निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन बाद में कुछ संचालक अतिरिक्त बर्थ लगाने जैसे बदलाव कर देते हैं।

इसी कारण विशेषज्ञ केवल निर्धारित अवधि की फिटनेस जांच पर निर्भर रहने के बजाय परिचालन के दौरान भी बसों की औचक जांच करने की जरूरत बता रहे हैं।

आग लगी तो कैसे निकलेंगे यात्री? इमरजेंसी एग्जिट सबसे अहम

स्लीपर बसों में अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन निकास की व्यवस्था भी चिंता का विषय बताई जा रही है। आरोप है कि कुछ बसों में पर्याप्त फायर एक्सटिंग्विशर नहीं होते, जबकि आपात स्थिति में शीशा तोड़ने के लिए जरूरी इमरजेंसी हैमर की उपलब्धता को लेकर भी शिकायतें सामने आती रहती हैं।

एक और गंभीर समस्या इमरजेंसी एग्जिट के आसपास सामान रखने की बताई जा रही है। यदि निकास के सामने भारी लगेज रखा हो तो दुर्घटना के समय यात्रियों को बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है।

बस में ये सुरक्षा इंतजाम बेहद अहम

● आपातकालीन निकास तक साफ और बाधारहित रास्ता
● कार्यशील अग्निशमन उपकरण
● इमरजेंसी विंडो और उसे खोलने/तोड़ने की व्यवस्था
● सुरक्षित और पर्याप्त चौड़ी आवाजाही की जगह
● इलेक्ट्रिकल वायरिंग और AC सिस्टम की नियमित जांच

विशेषज्ञ बोले—सड़कों पर अचानक जांच हो

ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट अनिल छिकारा का कहना है कि फिटनेस जांच के बाद बसों के ढांचे में किए जाने वाले अनधिकृत बदलावों को रोकने के लिए सड़कों पर चल रही स्लीपर बसों की सरप्राइज चेकिंग जरूरी है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि फिटनेस के समय जिस स्थिति में बस को स्वीकृति मिली थी, संचालन के दौरान भी वह उसी सुरक्षित स्थिति में है या नहीं।

सिर्फ ऑपरेटर नहीं, निर्माता और बॉडी बिल्डर की जिम्मेदारी भी तय हो

दिल्ली इंटर स्टेट बस ऑपरेटर्स संघ के महासचिव श्याम लाल गोला ने बसों में आग लगने की घटनाओं के मद्देनजर जवाबदेही का दायरा बढ़ाने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि किसी तकनीकी या इलेक्ट्रिकल खराबी से हादसा होता है तो केवल बस ऑपरेटर ही नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार बस निर्माता, बॉडी बिल्डर और AC सिस्टम लगाने वाली एजेंसी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

🔍 जांच का दायरा बढ़ाने की मांग
विशेषज्ञों का जोर इस बात पर है कि किसी हादसे के बाद केवल ड्राइवर या ऑपरेटर तक जांच सीमित न रहे। बस की बॉडी, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, AC फिटिंग, फिटनेस जांच और बाद में किए गए बदलावों की भी पड़ताल हो, ताकि जिम्मेदारी स्पष्ट की जा सके।

यात्रियों की सुरक्षा के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत

स्लीपर बसों में बड़ी संख्या में यात्री रात के समय सोते हुए सफर करते हैं। ऐसे में आग, टक्कर या बस पलटने जैसी आपात स्थिति में सुरक्षित और तेजी से बाहर निकलने की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

यही वजह है कि विशेषज्ञ फिटनेस प्रमाण पत्र के साथ-साथ ऑन-रोड निरीक्षण, आपातकालीन निकास की जांच, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और अनधिकृत संरचनात्मक बदलावों पर निगरानी को मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।

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