नई दिल्ली। देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते यातायात दबाव और लंबे जाम की समस्या से निपटने के लिए सड़क परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी है। अब हाईवे पर जाम लगने या यातायात क्षमता पूरी होने का इंतजार करने के बजाय FASTag और वाहन डेटाबेस की मदद से भविष्य के ट्रैफिक का अनुमान लगाकर पहले ही सड़क चौड़ीकरण, बाईपास और एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात को सुगम बनाना और सड़क निर्माण की जरूरतों का समय रहते आकलन करना है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत FASTag से प्राप्त यातायात संबंधी आंकड़ों का उपयोग हाईवे पर वाहनों की संख्या, आवागमन के रुझान और ट्रैफिक दबाव का आकलन करने में किया जाएगा। वाहन डेटाबेस के साथ इन आंकड़ों का विश्लेषण कर भविष्य में सड़क क्षमता बढ़ाने की जरूरत पहचानी जा सकेगी।
75 से 80 प्रतिशत क्षमता पर पहुंचते ही मिलेगा अलर्ट
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार प्रस्तावित डिजिटल प्रणाली में किसी राष्ट्रीय राजमार्ग खंड पर वाहनों का दबाव उसकी निर्धारित क्षमता के लगभग 75 से 80 प्रतिशत तक पहुंचने पर सिस्टम संबंधित अधिकारियों को अलर्ट दे सकेगा।
इससे समय रहते यह तय करने में सहायता मिलेगी कि संबंधित मार्ग को चौड़ा करने, नया बाईपास बनाने या एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित करने की आवश्यकता है या नहीं।
नई योजना का लक्ष्य गंभीर यातायात दबाव बनने से लगभग दो से तीन वर्ष पहले ही आवश्यक सड़क परियोजनाओं की तैयारी शुरू करना है। इसके तहत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समय रहते आगे बढ़ाया जा सकेगा।
त्योहारों और छुट्टियों में AI से होगी ट्रैफिक की निगरानी
त्योहारों, लंबे सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। खासकर टोल प्लाजा के आसपास लंबी कतारें लगने से यात्रियों को परेशानी होती है।
प्रस्तावित AI आधारित ट्रैफिक नियंत्रण प्रणाली FASTag के यातायात रुझानों का विश्लेषण कर यह अनुमान लगाने में मदद करेगी कि किन मार्गों और टोल प्लाजा पर अधिक दबाव पड़ सकता है। इसके आधार पर ट्रैफिक प्रबंधन के लिए पहले से कदम उठाए जा सकेंगे।
20 से 30 किलोमीटर पहले मिल सकती है वैकल्पिक रास्ते की जानकारी
योजना के अनुसार किसी टोल प्लाजा या हाईवे खंड पर अत्यधिक यातायात दबाव की आशंका होने पर यात्रियों को पहले ही वैकल्पिक मार्ग की जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
इसके लिए राजमार्गयात्रा ऐप, डिजिटल मैप सेवाओं और हाईवे पर लगे वेरिएबल मैसेज साइनेज का उपयोग किया जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था में लगभग 20 से 30 किलोमीटर पहले ही यात्रियों को संभावित जाम और दूसरे रास्तों के बारे में सूचना देने की बात कही गई है।
टोल प्लाजा पर वाहनों को रुकने से बचाने के लिए मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) जैसी तकनीकों को अपनाने पर काम किया जा रहा है। इन तकनीकों की सहायता से वाहनों की पहचान और टोल शुल्क का निर्धारण बिना पारंपरिक बैरियर के किया जा सकता है।
मार्च 2027 तक बैरियर-मुक्त टोल व्यवस्था का लक्ष्य
उपलब्ध जानकारी के अनुसार बैरियर-मुक्त टोल व्यवस्था को मार्च 2027 तक लागू करने का लक्ष्य बताया गया है। इस प्रणाली में वाहन निर्धारित सुरक्षित गति से टोल क्षेत्र पार कर सकेंगे और शुल्क का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किया जाएगा।
हालांकि इस व्यवस्था की वास्तविक समयसीमा, किन टोल प्लाजा पर इसे लागू किया जाएगा और वाहन किस गति से गुजर सकेंगे, यह संबंधित परियोजनाओं की तकनीकी तथा सुरक्षा आवश्यकताओं पर निर्भर करेगा।
सड़क निर्माण के फैसलों में डेटा की बढ़ेगी भूमिका
राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रैफिक के आंकड़ों का व्यवस्थित उपयोग होने से भविष्य की सड़क परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करने में मदद मिल सकती है। इससे उन मार्गों की पहले पहचान की जा सकेगी जहां वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
सड़क परिवहन मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से सड़क निर्माण, यातायात प्रबंधन और टोल व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद है।
FASTag, वाहन डेटाबेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का संयुक्त उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों की भविष्य की जरूरतों को समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होने पर यातायात जाम कम करने, यात्रा समय बचाने और सड़क परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाने में सहायता मिल सकती है।



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