नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली के यशोभूमि में इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) के 10वें संस्करण का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत को दूरसंचार और डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में केवल उत्पादों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि तकनीक, डिजाइन और बौद्धिक संपदा विकसित करने वाला देश बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब ऐसे लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, जहां उत्पादों का निर्माण ही नहीं, बल्कि उनका डिजाइन, तकनीक और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) भी देश में विकसित हो।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की डिजिटल यात्रा अब अगले चरण में प्रवेश कर रही है। सरकार का उद्देश्य देश में तकनीकी अनुसंधान, नवाचार, स्वदेशी डिजाइन और बौद्धिक संपदा के विकास को बढ़ावा देना है, ताकि भारत वैश्विक तकनीकी मूल्य श्रृंखला में अपनी भूमिका मजबूत कर सके।
टेलीकॉम सेक्टर में नीतिगत सुधारों का उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार ने कई नीतिगत बदलाव किए हैं। दशकों पुराने कानूनी प्रावधानों को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से दूरसंचार अधिनियम के माध्यम से नया विनियामक ढांचा तैयार किया गया है।
उन्होंने समायोजित सकल राजस्व (AGR), बैंक गारंटी और अन्य नियामक दायित्वों से संबंधित सुधारों का भी उल्लेख किया। इसके साथ ही गति शक्ति संचार पोर्टल के माध्यम से राइट ऑफ वे यानी दूरसंचार ढांचा स्थापित करने के लिए आवश्यक अनुमति प्रक्रिया को डिजिटल और अधिक सुगम बनाने पर जोर दिया।
पांच स्थानों पर सेमीकंडक्टर का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने का दावा
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत के सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में पांच स्थानों पर व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अगले चरण में पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसमें चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, परीक्षण, उपकरण और संबंधित सामग्री के घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करना महत्वपूर्ण होगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार उद्योग में आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में सहायता मिल सकती है।
प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के बीच डीपफेक को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक वैश्विक ढांचे की आवश्यकता है, जिसमें विभिन्न देशों की सरकारें, तकनीकी कंपनियां और अन्य संबंधित संस्थाएं मिलकर काम करें।
डिजिटल धोखाधड़ी को लोगों तक पहुंचने से पहले रोकने का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक दूरसंचार संगठन GSMA और टेलीकॉम ऑपरेटरों से डिजिटल धोखाधड़ी की रोकथाम के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि तकनीक के विस्तार के साथ उसकी सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत बनाना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से फोन और नेटवर्क सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही। साइबर धोखाधड़ी, फर्जी डिजिटल पहचान और डीपफेक जैसी समस्याओं से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।
मोबाइल फोन अब सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं
प्रधानमंत्री ने कहा कि मोबाइल फोन ने आम नागरिकों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। डिजिटल सेवाओं के कारण यात्रा, प्रतीक्षा और कई प्रकार के खर्च कम हुए हैं। मोबाइल अब केवल बातचीत का साधन नहीं, बल्कि गेमिंग, कंटेंट क्रिएशन, शिक्षा, भुगतान और सरकारी सेवाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
उन्होंने डिजिटल कनेक्टिविटी को आम नागरिकों की सुविधा और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से जोड़ते हुए तकनीक के लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
7 से 10 अक्टूबर तक आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस की थीम 'Scale Without Boundaries' रखी गई है। कार्यक्रम में 5G, 6G, AI आधारित नेटवर्क, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा, क्वांटम कम्युनिकेशन, स्मार्ट मोबिलिटी और औद्योगिक रोबोटिक्स जैसी तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
100 से अधिक देशों की भागीदारी वाला तकनीकी आयोजन
दूरसंचार विभाग और सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संयुक्त आयोजन में दुनिया भर के तकनीकी विशेषज्ञ, नीति निर्माता, स्टार्टअप, निवेशक और उद्योग प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। आयोजकों के अनुसार इस संस्करण में 100 से अधिक देशों की भागीदारी तथा बड़ी संख्या में तकनीकी प्रदर्शन और विचार-विमर्श सत्र प्रस्तावित हैं।
इस मंच का उद्देश्य अगली पीढ़ी के डिजिटल बुनियादी ढांचे, सुरक्षित कनेक्टिविटी, तकनीक आधारित आर्थिक विकास और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना है।
विकसित भारत के लक्ष्य में तकनीकी नवाचार की भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए तकनीकी नवाचार, अनुसंधान और उद्योगों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ाना होगा। उन्होंने इंडिया मोबाइल कांग्रेस को केवल तकनीकी उत्पादों के प्रदर्शन तक सीमित न रखते हुए नई खोज, अनुसंधान और जनहित से जुड़े समाधान विकसित करने का मंच बनाने पर जोर दिया।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में प्रधानमंत्री के संबोधन का प्रमुख केंद्र स्वदेशी तकनीक, सेमीकंडक्टर निर्माण, दूरसंचार सुधार और डिजिटल सुरक्षा रहा। उन्होंने तकनीकी विकास के साथ नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी और डीपफेक जैसी चुनौतियों से सुरक्षित रखने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता रेखांकित की।



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