नई दिल्ली। भारत अब दुनिया की तकनीक के पीछे चलने के बजाय उसकी दिशा तय करने वाले देशों में शामिल होने की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोमवार को कहा कि गुणवत्ता, मानक और नवाचार ही ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण की मजबूत नींव बनेंगे।
सिंधिया ने कहा कि भारत की वैश्विक पहचान केवल इस बात से नहीं बनेगी कि देश कितना उत्पादन करता है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि भारतीय उत्पादों और तकनीक की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और वैश्विक स्वीकार्यता कितनी है।
अब ‘स्टैंडर्ड टेकर’ नहीं, ‘स्टैंडर्ड मेकर’ बनने की तैयारी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोबाइल प्रौद्योगिकी की अगली पीढ़ी में भारत की भूमिका बदल रही है। उनके मुताबिक 2G, 3G, 4G और 5G के दौर की तुलना में 6G के वैश्विक मानक तय करने की प्रक्रिया में भारत कहीं अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल तकनीक का उपयोग करना नहीं, बल्कि तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित करना, बौद्धिक संपदा तैयार करना और वैश्विक मानकों के निर्माण में योगदान देना है।
6G में 10 प्रतिशत योगदान का लक्ष्य
सिंधिया ने भारत की 6G महत्वाकांक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि देश का लक्ष्य वैश्विक 6G तकनीक से जुड़े मानकों और पेटेंट में करीब 10 प्रतिशत योगदान हासिल करना है। इस दिशा में भारत 6G एलायंस, उद्योग, स्टार्टअप, शिक्षण संस्थान और अनुसंधान संगठन मिलकर काम कर रहे हैं।
वैश्विक मानक निर्धारण में सक्रिय भागीदारी
स्वदेशी तकनीक और बौद्धिक संपदा का विकास
उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग
वैश्विक 6G मानकों और पेटेंट में लगभग 10% योगदान
गुणवत्ता से बनेगी ‘ब्रांड इंडिया’ की पहचान
IFQM Symposium 2026 के दौरान सिंधिया ने कहा कि किसी देश की वैश्विक प्रतिष्ठा केवल उसके उत्पादन के आकार से तय नहीं होती। उत्पाद और सेवाएं कितनी विश्वसनीय हैं, उनके मानक कितने मजबूत हैं और वे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में कहां खड़े होते हैं—ये बातें भी ‘ब्रांड इंडिया’ की ताकत निर्धारित करेंगी।
उन्होंने इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्योगों और संस्थानों में गुणवत्ता तथा उत्कृष्टता की संस्कृति विकसित करना भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
उत्पादन बढ़ाने के साथ गुणवत्ता पर भी जोर
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक भारत में उत्पादन और तकनीकी क्षमता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन विश्व बाजार में दीर्घकालिक पहचान बनाने के लिए गुणवत्ता को पूरी सप्लाई चेन और संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा बनाना होगा।
उनका कहना था कि भारतीय कंपनियों को केवल कीमत के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने के बजाय गुणवत्ता, नवाचार, तकनीक और विश्वसनीयता के आधार पर वैश्विक बाजार में अपनी जगह मजबूत करनी होगी।
गुणवत्ता — भारतीय उत्पादों की वैश्विक विश्वसनीयता
नवाचार — नई तकनीक और स्वदेशी समाधान
मानक — दुनिया के नियम अपनाने के साथ उन्हें बनाने में भी भागीदारी
6G केवल तेज इंटरनेट नहीं, तकनीकी नेतृत्व की लड़ाई
भारत के लिए 6G मिशन को केवल अगली पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क के रूप में नहीं देखा जा रहा है। सरकार इसे अनुसंधान, पेटेंट, स्वदेशी तकनीक और वैश्विक दूरसंचार मानकों में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के अवसर के रूप में पेश कर रही है।
सिंधिया के मुताबिक भारत यदि विश्वस्तरीय मानकों को अपनाने के साथ उन्हें निर्धारित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तो इससे देश की तकनीकी क्षमता और ‘ब्रांड इंडिया’ की विश्वसनीयता दोनों मजबूत होंगी।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक आकार बढ़ाने तक सीमित नहीं है। भारत को गुणवत्ता, नवाचार और भविष्य की तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति तक पहुंचाना भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।



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