भोपाल में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: तीन पटवारी निलंबित, निजी दफ्तरों से चल रहा था सरकारी काम

 भोपाल (मध्य प्रदेश): भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए तीन पटवारियों को निलंबित कर दिया है। इन पर रिश्वत लेने और सरकारी कामकाज को निजी दफ्तरों से संचालित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। कलेक्टर ने मामले की जांच के लिए एडीएम सिद्धार्थ जैन को निर्देश दिए हैं, जो विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे।



निजी दफ्तरों से हो रहा था सरकारी काम
पटवारियों ने तहसील कार्यालय की जगह अपने निजी दफ्तर खोल रखे थे, जहां से वे सीमांकन, नामांतरण और बंटवारे जैसे कार्यों के लिए रिश्वत लेकर फाइलें आगे बढ़ा रहे थे। ये दफ्तर करौंद, संजीव नगर और चौबदारपुरा जैसे क्षेत्रों में स्थित थे।

पटवारियों के नाम और गतिविधियां:

  1. किशोर दांगी (पटवारी, बीनापुर): करौंद के पीपल चौराहा पर निजी दफ्तर खोल रखा था।
  2. पवन शुक्ला (पटवारी, पुरा छिंदवाड़ा): गोल मार्केट, संजीव नगर में अपना कार्यालय संचालित कर रहे थे।
  3. निधि नेमा (पटवारी, नीलबड़ भौंरी): चौबदारपुरा, तलैया में निजी दफ्तर से काम कर रही थीं।

कैसे हुआ मामला उजागर?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में पटवारियों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि "पटवारी तो कलेक्टर का भी बाप होता है।" इसके बाद जिले में चल रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच तेज कर दी गई। जांच के दौरान पाया गया कि पटवारी सरकारी दफ्तरों में उपस्थित नहीं रहते थे और लोगों के काम करने के बदले रिश्वत लेते थे।

रिश्वत का अड्डा बने थे निजी कार्यालय
पटवारियों ने न केवल सरकारी नियमों की अवहेलना की, बल्कि आम जनता को भी परेशान किया। जमीन, मकान और अन्य प्रॉपर्टी से संबंधित कार्यों के लिए लोग इन निजी कार्यालयों का रुख करने को मजबूर थे। यहां बिना रिश्वत दिए कोई भी काम संभव नहीं था।

कलेक्टर की सख्ती और प्रशासन की कार्रवाई
कलेक्टर ने न केवल पटवारियों को निलंबित किया, बल्कि आगे की कार्रवाई के लिए एडीएम सिद्धार्थ जैन को जिम्मेदारी सौंपी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर इन पटवारियों पर और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

भ्रष्टाचार पर जनता का गुस्सा
इस घटना के सामने आने के बाद शहर में आक्रोश का माहौल है। लोग इन पटवारियों के खिलाफ सख्त सजा की मांग कर रहे हैं। आम जनता का कहना है कि ऐसे भ्रष्टाचार से प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर होती है और आम आदमी का भरोसा टूटता है।

भविष्य की कार्रवाई पर निगाहें
जांच रिपोर्ट आने के बाद न केवल इन पटवारियों पर, बल्कि प्रशासनिक प्रणाली में मौजूद अन्य दोषियों पर भी शिकंजा कसा जा सकता है। सरकार ने यह संकेत दिए हैं कि इस तरह के भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।



 


एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने
sach ki dunia, India's top news portal Get Latest News. Hindi Samachar