सूरत, गुजरात: गुजरात के सूरत में एक फर्जी मेडिकल डिग्री रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें ‘बैचलर ऑफ इलेक्ट्रो-होम्योपैथी मेडिसिन एंड सर्जरी’ (BEMS) की फर्जी डिग्रियां बेचकर लोगों को डॉक्टर बनने का झांसा दिया जा रहा था। पुलिस ने इस गिरोह के 13 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 10 कथित फर्जी चिकित्सक भी शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, इस रैकेट के जरिए न केवल लोगों को ठगा जा रहा था बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ भी हो रहा था। जांच के दौरान आरोपियों के “क्लीनिकों” से बड़ी मात्रा में एलोपैथिक और होम्योपैथिक दवाइयां, इंजेक्शन, सिरप और फर्जी प्रमाण पत्र बरामद किए गए हैं।
गिरोह का संचालन और मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में पता चला कि इस रैकेट का संचालन सूरत निवासी रसेश गुजराती और अहमदाबाद के बीके रावत कर रहे थे। उनके सहयोगी इरफान सैयद भी इस गिरोह में शामिल थे। ये लोग ‘बोर्ड ऑफ इलेक्ट्रो होम्योपैथिक मेडिसिन, अहमदाबाद’ की आड़ में 70,000 रुपये में फर्जी डिग्रियां बेच रहे थे।
डिग्रीधारक कौन थे?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह गिरोह 8वीं पास लोगों को भी मेडिकल की डिग्री देकर उन्हें "डॉक्टर" बना रहा था। पुलिस ने गिरोह के रिकॉर्ड से 1,200 से ज्यादा फर्जी डिग्रियां बरामद की हैं। इन डिग्रीधारकों में से 14 को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें अधिकांश का शैक्षिक स्तर बेहद निम्न पाया गया है।
गिरोह का ‘बिजनेस मॉडल’
गिरोह ने शुरुआत में केवल फर्जी BEMS डिग्रियां बेचीं। लेकिन जब इनके प्रमाण पत्रों पर सवाल उठने लगे, तो इन्होंने खुद को “गुजरात आयुष विभाग” से जोड़ने का झूठा दावा करना शुरू कर दिया। ये लोग एक नई ‘संयुक्त डिग्री’ का फर्जीवाड़ा करने लगे, जिसके तहत एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक प्रैक्टिस की अनुमति का दावा किया गया।
आरोपियों ने दावा किया कि इस डिग्री से डॉक्टर बिना किसी कानूनी समस्या के मेडिकल प्रैक्टिस कर सकते हैं। ये डिग्रियां पेमेंट के 15 दिनों के भीतर तैयार हो जाती थीं, और डॉक्टर्स से हर साल 5,000 से 15,000 रुपये रिन्यूअल के नाम पर वसूले जाते थे।
पुलिस का बयान और अगली कार्रवाई
सूरत पुलिस के अनुसार, गिरोह का मास्टरमाइंड रमेश गुजराती पहले ही गिरफ्तार हो चुका है। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान 70,000 रुपये की एकमुश्त फीस के बदले फर्जी डिग्री देने का खुलासा हुआ।
पुलिस अब इस रैकेट के अन्य सदस्यों और देशभर में फैले नेटवर्क की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े और भी आरोपी जल्द गिरफ्तार किए जाएंगे।
स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर खतरा
यह रैकेट न केवल लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहा था, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भी गंभीर खतरा पैदा कर रहा था। फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरों द्वारा इलाज से कई मरीजों की जान जोखिम में पड़ी होगी।
