मुरैना। पुलिस लाइन में सुरक्षा व्यवस्था की पोल तब खुल गई जब शस्त्रागार (कोत) का ताला तोड़कर चोर 142 पिस्टल कारतूस और 58 एसएलआर कारतूस लेकर फरार हो गए। इस मामले ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चोरी की वारदात पुलिस लाइन मुरैना में हुई, जहां विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) की पांचवीं और सेकंड बटालियन की कंपनियां तैनात हैं।
कैसे हुआ चोरी का खुलासा?
पुलिस अधिकारियों को तब शक हुआ जब शस्त्रागार के निरीक्षण के दौरान ताले टूटे हुए मिले। मौके पर हुई प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि चोरों ने बड़ी ही चतुराई से घटना को अंजाम दिया। शस्त्रागार में मौजूद हथियारों और गोला-बारूद का मिलान करने पर चोरी की पुष्टि हुई।
एफआईआर दर्ज, मगर देर से
चोरी की वारदात के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। हालांकि, यह मामला सामने आने में काफी देर हो चुकी थी। सवाल यह उठता है कि इतनी कड़ी सुरक्षा वाले क्षेत्र में चोरों ने बिना किसी रुकावट के ताला तोड़ा और कारतूस चुरा लिए।
200 कारतूस गायब, सुरक्षा पर संकट
सूत्रों के अनुसार, एसएएफ की दोनों बटालियन के कुल 200 कारतूस गायब हैं। यह चोरी केवल पुलिस की कार्यशैली ही नहीं, बल्कि सुरक्षा इंतजामों की लापरवाही को भी उजागर करती है। ऐसी स्थिति में, यदि इन कारतूसों का इस्तेमाल किसी आपराधिक घटना में होता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
कड़ी कार्रवाई की मांग
घटना के बाद से पुलिस प्रशासन की ओर से जवाबदेही तय करने की बात की जा रही है। शस्त्रागार जैसी संवेदनशील जगह पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी से यह साफ होता है कि अंदरूनी स्तर पर गहरी खामियां हैं। पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ने का दावा किया है।
