होली का त्योहार आने में अब कुछ ही दिन बाकी है. होली का ये पर्व हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. इस दिन होलिका दहन भी किया जाता है. उसके अगले दिन रंग वाली होली खेली जाती है. आपको बता दें, इस साल दिनांक 7 मार्च को किया जाएगा और 8 मार्च को रंगों वाली होली मनाई जाएगी. इस दिन होलिका दहन की अवधि मात्र दो घंटे ही है. होली से पहले होलिका जलाई जाने की परंपरा है. होलिका दहन की पूजा करते समय कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है. तो ऐसे में आइए आज हम आपको अपने इस लेख में होलिका दहन की पूजा विधि के बारे में बताएंगे, साथ पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है. इस दिन किन लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है.
जानिए क्या है होलिका दहन में पूजा करने का शुभ मुहूर्त
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त दिनांक 07 मार्च को शाम 06 बजकर 24 मिनट से लेकर 08 बजकर 51 मिनट तक रहेगा.
होलिका दहन की पूजा विधि क्या है?
1.शास्त्रों में होलिका दहन से पहले मां होलिका की पूजा की जाती है. इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनें
2. स्नान करने के बाद होलिका दहन वाले जगह पर जाएं. वहीं पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें और गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा बनाएं.
3. रोली, अक्षत, माला, हल्दी, फूल, गुलाल, सात प्रकार का अनाज, गेहूं की बासिया, गन्ना, चना अर्पित करें.
4. भगवान नरसिंह की पूजा करें.
5. होलिका पूजम करने के बाद होलिका की 5 या फिर 7 बार परिक्रा करके बांध दें.
6. इसके सुख-समृद्धि की कामना जरूर करें.
7. होलिका दहन के समय आग में जौ, चावल जरूर डालें. इससे आपके ऊपर मां लक्ष्मी की हमेशा कृपा बनी रहेगी.
इन लोगों को भूलकर भी नहीं देखनी चाहिए जलती हुई होलिका
नवविवाहित स्त्रियों को होलिका की जलती हुई अग्नि को नहीं देखना चाहिए. ऐसी मान्यता है कि आप पुराने साल को जला रहे होते हैं, पुराने साल को जलाने का मतलब है पुराने शरीर को जलाना. इसलिए जिन महिलाओं की नई-नई शादी हुई है, उन्हें जलती हुई अग्नि नहीं देखना चाहिए.
