आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भारत की बड़ी पहल, बनेगा दुनिया का पहला ग्लोबल सेंटर



आयुर्वेद के बढ़ते बाजार को देखते हुए भारत ने उठाया बड़ा कदम। दो हजार करोड़ रुपये की लागत से बनेगा पहला वैश्विक केंद्र। PM Modi, मॉरिशस पीएम जगन्नाथ और WHO DG घेबरिसिस ने किया शिलान्यास। आयुर्वेदिक दवाओं को पश्चिम का बाजार दिलाने में भी होगा मददगार

आयुर्वेद सहित विभिन्न परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों का मानकीकरण कर इन्हें वैश्विक स्तर पर मान्यता और बाजार दिलाने के लिए भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ मिल कर एक बड़ी पहल की है। इसके तहत मंगलवार को पीएम मोदी ने गुजरात के जामनगर में पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र का शिलान्यास किया। दवा के अलावा सौंदर्य प्रसाधन और वेलनेस प्रोडक्ट के रूप में एक लाख करोड़ से ज्यादा के कारोबर पर पहुंच गए इस क्षेत्र में भारत चीन के मुकाबले अपनी बढ़त कायम कर सकेगा।

एक ओर जहां कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों को ले कर भारत और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के बीच तनातनी चल रही है वहीं इस परियोजना के जरिए वैश्विक संगठन और भारत के बीच एक ऐतिहासिक साझेदारी भी शुरू हो रही है। ऐसे वैश्विक केंद्र के लिए लगभग दो हजार करोड़ रुपये की मोटी रकम खर्च कर भारत वैश्विक स्तर पर अपनी महत्वाकांक्षा को प्रदर्शित कर रहा है।

गुजरात में इसी साल होने वाले चुनाव से पहले इस बड़ी पहल के लिए एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। दो दिन के लिए गुजरात पहुंचे डब्लूएचओ महानिदेशक टेड्रोस घेबरिसिस ने इस कार्यक्रम में कहा कि इस केंद्र की मदद से भारत पूरी दुनिया तक पहुंचेगा और पूरी दुनिया भारत तक पहुंचेगी। इसी कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ ने भारत की इस पहल की तारीफ करते हुए कहा कि इससे आयुर्वेद जैसी पद्धति को वैश्विक स्तर पर और बल मिलेगा। नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग ने भी अपने वीडियो संदेश में भारत को इस पहल के लिए बधाई दी।

पीएम मोदी ने इसकी आधारशिला रखते हुए कहा कि विश्व भर में पारंपरिक चिकित्सा में विश्वास रखने वाले सभी लोगों के लिए यह एक नए अध्याय की शुरुआत होगी। भारत की स्वतंत्रता के अमृत काल में हो रही इस पहल का प्रभाव आने वाले समय में पूरी दुनिया को मिलेगा। अथर्व वेद में जीवेत शरद शतम् का सिद्धांत दिया है जो सौ साल के निरोग्य जीवन की बात करता है। क्यों अहम - वैश्विक स्तर पर यह एक लाख करोड़ के कारोबार पर पहुंच चुका है। - सौंदर्य प्रसाधन और वेलनेस सेंटर के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा। - कोरोना के दौरान इसको ले कर लोगों की उम्मीद काफी बढ़ी है।

दुनिया की 80% आबादी किसी ना किसी रूप में इसका उपयोग करती है। - 170 देशों ने डब्लूएचओ से इस पर साक्ष्य जुटाने का अनुरोध किया है। - इस समय स्वीकृत फार्मा उत्पादों में लगभग 40% उत्पाद प्राकृतिक हैं।

क्या है ग्लोबल सेंटर- यह डब्लूएचओ का ग्लोबल सेंटर है, लेकिन इस पर आने वाली लगभग दो हजार करोड़ की लागत भारत सरकार वहन करेगी। यह दुनिया भर में पारंपरिक चिकित्सा का पहला और अकेला वैश्विक आउटपोस्ट सेंटर होगा। सरकार का कहना है कि यह केंद्र पारंपरिक इलाज व दवाओं के मानक तय करने के साथ ही नई नीतियां बनाने के लिए भी मददगार साबित होगा। विभिन्न देशों को यह व्यापक, सुरक्षित और उच्च स्तरीय स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित करने में मदद करेगा।

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