अमरीकी मॉडर्ना वैक्सीन 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान में महीने भर तक सुरक्षित


 न्यूयॉर्क | अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना की वैक्सीन मरीजों को बचाने में 94 प्रतिशत असरदार है। कंपनी ने सोमवार को दावा है कि यह वैक्सीन दो से आठ डिग्री सेल्सियस तापमान में 30 दिन तक सुरक्षित रह सकती है।

एक हफ्ते पहले वैक्सीन निर्माता फाइजर की ओर से जारी बयान में पता चला था कि इसके भंडारण और परिवहन में चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

अमेरिका के शीर्ष संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ एंथोंनी फौसी ने मॉडर्न परिणामों को असरदार बताया। फौसी ने कहा कि अमेरिका दिसंबर तक अपनी सबसे कमजोर आबादी का टीकाकरण शुरू कर सकता है।

अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना ने बताया कि यह माइनस 20 डिग्री सेल्सियस (माइनस चार फारेनहाइट) तापमान में छह महीने तक सुरक्षित रह सकती है।

इसके अलावा रेफ्रिजरेटर से वैक्सीन निकाल लेने के बाद यह 12 घंटे तक कमरे के तापमान पर सही हालात में रह सकती है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के सहयोग से बनाई गई मॉडर्ना की वैक्सीन के साथ 30,000 स्वयंसेवक जुड़े हुए हैं।

एक सप्ताह पहले ही अमेरिका की ही कंपनी फाइजर और उसकी सहयोगी जर्मनी की बॉयोएनटेक ने 90 प्रतिशत से ज्यादा कारगर वैक्सीन का दावा किया था।

वहीं, रूस के रिसर्च सेंटर की स्पुतनिक वी वैक्सीन का असर 92 प्रतिशत रहने का दावा किया गया है। अमेरिका की एक और दवा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने कोविड-19 की रोकथाम के लिए अपनी वैक्सीन के दो डोज का तीसरी चरण का ट्रायल शुरू कर दिया है।

आस्ट्रेलिया में आक्सफोर्ड में विकसित वैक्सीन का उत्पादन शुरू हो गया है|

भारत में वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक ने घोषणा की कि उसने कोविड-19 के लिए भारत की पहले स्वदेशी वैक्सीन 'कोवैक्सीन' के तीसरे चरण के परीक्षणों को शुरू कर दिया है। इसका संचालन भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ मिलकर किया जा रहा है। परीक्षण भारत में 22 संस्थानों में किया जा रहा है, जिसमें नई दिल्ली एम्स और गुरु तेग बहादुर अस्पताल शामिल हैं।

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