सात साल से न्याय की आस, कलेक्टर कार्यालय में जमीन पर लोटकर किसान ने सुनाई अपनी पीड़ा
जमीन विवाद से परेशान देवी लाल ने जनसुनवाई में अपनाया अनोखा तरीका, सुरक्षाकर्मी ने उठाकर कलेक्टर से कराई मुलाकात।
मंदसौर। सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते जब उम्मीदें कमजोर पड़ने लगती हैं, तो कभी-कभी फरियादी अपनी आवाज अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए असामान्य तरीके अपनाने को मजबूर महसूस करते हैं। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में जनसुनवाई के दौरान ऐसा ही एक मामला सामने आया है।
मल्हारगढ़ तहसील के खेड़ा कोयला गांव निवासी किसान देवी लाल ने जमीन संबंधी विवाद का समाधान नहीं होने से परेशान होकर कलेक्टर कार्यालय परिसर में जमीन पर लोटना शुरू कर दिया।
किसान का कहना है कि वह पिछले सात वर्षों से अपनी जमीन के विवाद को लेकर परेशान हैं। कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने और आवेदन देने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
कलेक्टर कार्यालय में किसान को इस तरह अपनी पीड़ा व्यक्त करते देखकर वहां मौजूद लोगों का ध्यान उनकी ओर गया। इसी दौरान परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मी ने हस्तक्षेप किया और किसान को उठाकर कलेक्टर से मुलाकात कराई।
- जिला: मंदसौर, मध्यप्रदेश
- तहसील: मल्हारगढ़
- गांव: खेड़ा कोयला
- फरियादी: किसान देवी लाल
- समस्या: जमीन संबंधी विवाद
- दावा: सात वर्षों से समाधान नहीं
- स्थान: कलेक्टर कार्यालय परिसर
- घटनाक्रम: जमीन पर लोटकर जताई परेशानी
- हस्तक्षेप: सुरक्षाकर्मी ने कलेक्टर से मुलाकात कराई
सात साल से दफ्तरों के चक्कर, फिर भी समाधान नहीं मिलने का दावा
जानकारी के अनुसार, मल्हारगढ़ तहसील के खेड़ा कोयला गांव निवासी देवी लाल अपनी जमीन से जुड़े विवाद को लेकर लंबे समय से परेशान हैं।
किसान का कहना है कि वह लगभग सात वर्षों से संबंधित कार्यालयों में आवेदन दे रहे हैं और अपनी समस्या के समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है।
लगातार प्रयासों के बाद भी समाधान नहीं होने से परेशान किसान जनसुनवाई में अपनी शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे।
कलेक्टर कार्यालय में जमीन पर लोटने लगे किसान
जनसुनवाई के दौरान देवी लाल ने अपनी परेशानी की ओर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। वह कलेक्टर कार्यालय परिसर में ही जमीन पर लोटने लगे।
किसान का यह कदम उनके लंबे समय से जारी संघर्ष और शिकायत के समाधान को लेकर बढ़ती निराशा को दर्शाता है।
कार्यालय परिसर में मौजूद लोगों ने जब किसान को इस तरह अपनी पीड़ा व्यक्त करते देखा, तो वहां हलचल मच गई। किसान का उद्देश्य अपनी समस्या को प्रशासन के सामने प्रभावी ढंग से रखना था।
यदि कोई फरियादी वर्षों तक आवेदन देने के बाद भी अपनी शिकायत के समाधान की प्रतीक्षा कर रहा है, तो यह जानना जरूरी है कि उसके प्रकरण में अब तक क्या कार्रवाई हुई और देरी का वास्तविक कारण क्या है।
सुरक्षाकर्मी ने दिखाई संवेदनशीलता, किसान को उठाकर कलेक्टर से मिलवाया
कलेक्टर कार्यालय परिसर में तैनात एक सुरक्षाकर्मी ने किसान को जमीन पर लोटते देखा तो वह तत्काल उसके पास पहुंचा।
सुरक्षाकर्मी ने देवी लाल को उठाया और उन्हें ढांढस बंधाते हुए उनकी परेशानी समझने का प्रयास किया। इसके बाद वह किसान को कलेक्टर के पास लेकर गया, ताकि वह अपनी शिकायत सीधे प्रशासन के सामने रख सकें।
इस घटनाक्रम में सुरक्षाकर्मी की संवेदनशील भूमिका सामने आई। हालांकि कलेक्टर से मुलाकात के बाद किसान के प्रकरण में क्या निर्देश दिए गए, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
जमीन विवाद का समाधान कब होगा, प्रशासनिक कार्रवाई पर निगाहें
किसान देवी लाल के मामले ने एक बार फिर जमीन संबंधी शिकायतों के निराकरण और जनसुनवाई व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
भूमि संबंधी मामलों में राजस्व अभिलेख, सीमांकन, स्वामित्व और संबंधित आदेशों की जांच आवश्यक हो सकती है। हालांकि देवी लाल के विवाद की सटीक प्रकृति और उसमें शामिल पक्षों के बारे में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि किसान ने किन-किन कार्यालयों में आवेदन दिए, उनके प्रकरण में पूर्व में क्या निर्णय हुए और विवाद अब किस स्तर पर लंबित है।
जनसुनवाई का उद्देश्य शिकायतों का समयबद्ध निराकरण
जनसुनवाई जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य नागरिकों को अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के समक्ष रखने का अवसर देना है। इनमें प्राप्त शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर नियमानुसार कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।
मंदसौर में सामने आए इस मामले में किसान की सात वर्षों से परेशानी जारी रहने का दावा प्रशासनिक स्तर पर तथ्यों की पड़ताल की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कलेक्टर से मुलाकात के बाद देवी लाल की शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है और क्या उन्हें विवाद के निराकरण के लिए कोई स्पष्ट समयसीमा या प्रक्रिया बताई जाती है।
मंदसौर के खेड़ा कोयला गांव निवासी किसान देवी लाल ने जमीन विवाद से परेशान होकर कलेक्टर कार्यालय में जमीन पर लोटकर अपनी पीड़ा जताई। सुरक्षाकर्मी ने उन्हें उठाकर कलेक्टर से मुलाकात कराई। अब किसान की शिकायत पर प्रशासन की अगली कार्रवाई और विवाद के समाधान का इंतजार है।



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