निमोनिया की दवा खाने के बाद दो साल की बच्ची की मौत, डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप
चांदामेटा में मासूम यशवी की मौत से परिवार सदमे में, परासिया पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की।
छिंदवाड़ा। जिले के चांदामेटा क्षेत्र में दो साल की मासूम बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों ने स्टेशन रोड स्थित एक निजी क्लीनिक के चिकित्सक पर गलत दवा देने और उपचार में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
मृत बच्ची की पहचान यशवी तेकाम, उम्र दो वर्ष के रूप में हुई है। वह चांदामेटा के वार्ड क्रमांक-1, राधाकृष्ण मंदिर के समीप रहने वाले गौरव कुमार तेकाम और शिवानी तेकाम की इकलौती पुत्री थी।
बच्ची की मां का आरोप है कि निमोनिया की शिकायत होने पर उसे निजी क्लीनिक ले जाया गया था, जहां डॉक्टर ने दवाइयां लिखकर दीं। इन दवाओं के सेवन के कुछ ही देर बाद बच्ची की हालत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।
हालांकि दवाइयों और बच्ची की मौत के बीच कोई चिकित्सकीय संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
- मृत बच्ची: यशवी तेकाम, उम्र दो वर्ष
- माता-पिता: शिवानी तेकाम और गौरव कुमार तेकाम
- निवास: वार्ड क्रमांक-1, चांदामेटा, छिंदवाड़ा
- क्लीनिक जाने की तारीख: 8 अक्टूबर
- उपचार का कारण: निमोनिया की शिकायत
- परिजनों का आरोप: गलत दवा और उपचार में लापरवाही
- अतिरिक्त आरोप: मेडिकल स्टोर से दवाओं का बिल नहीं मिला
- शिकायत: परासिया पुलिस थाना
- पुलिस कार्रवाई: पोस्टमार्टम के बाद मर्ग कायम, जांच जारी
इकलौती बेटी की मौत से परिवार में मातम
चांदामेटा के वार्ड क्रमांक-1 में राधाकृष्ण मंदिर के समीप रहने वाले गौरव कुमार तेकाम और शिवानी तेकाम की दो वर्षीय बेटी यशवी की अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
परिजनों के अनुसार, बच्ची की तबीयत खराब होने पर वे उसे उपचार के लिए निजी क्लीनिक लेकर गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि इलाज के बाद यशवी स्वस्थ हो जाएगी, लेकिन कुछ ही समय बाद उसकी हालत बिगड़ने और मौत होने की घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।
परिवार अब बच्ची की मौत के वास्तविक कारणों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है।
8 अक्टूबर को निमोनिया का इलाज कराने पहुंची थीं मां
शिकायतकर्ता शिवानी तेकाम के अनुसार, 8 अक्टूबर को वे अपनी बहन सोनम धुर्वे और सोनू धाकड़ के साथ बच्ची को लेकर चांदामेटा के स्टेशन रोड स्थित एक निजी क्लीनिक पहुंची थीं।
शिवानी का कहना है कि बच्ची को निमोनिया की शिकायत थी। क्लीनिक में चिकित्सक ने परीक्षण करने के बाद एक पर्ची पर कुछ दवाइयां लिखकर दी थीं।
परिजनों के मुताबिक, डॉक्टर की पर्ची पर लिखी दवाइयां क्लीनिक के ठीक सामने स्थित मेडिकल स्टोर से खरीदी गई थीं। इसके बाद बच्ची को डॉक्टर के बताए अनुसार दवाएं दी गईं।
दवा खिलाने के कुछ देर बाद बिगड़ी तबीयत, परिजनों ने उठाए सवाल
मां शिवानी तेकाम का आरोप है कि दवाइयां देने के कुछ ही देर बाद यशवी की तबीयत अचानक अत्यधिक बिगड़ गई। इसके बाद बच्ची की मौत हो गई।
परिजनों का आरोप है कि चिकित्सक ने गलत दवा दी अथवा उपचार में लापरवाही बरती, जिसके कारण बच्ची की जान चली गई।
हालांकि यह आरोप अभी जांच के अधीन है। बच्ची की मौत निमोनिया की गंभीरता, किसी अन्य चिकित्सकीय जटिलता, दवा की प्रतिक्रिया या किसी अन्य कारण से हुई, इसका निर्धारण पोस्टमार्टम और विशेषज्ञ चिकित्सकीय परीक्षण से ही संभव होगा।
दवा सेवन के बाद बच्ची की मौत होने का आरोप परिजनों ने लगाया है। लेकिन केवल घटनाओं के समयक्रम से यह साबित नहीं होता कि मौत दवा के कारण हुई। पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय का इंतजार है।
मेडिकल स्टोर से दवा का बिल नहीं देने का भी आरोप
परिजनों ने निजी क्लीनिक के सामने स्थित मेडिकल स्टोर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाइयां खरीदने के बावजूद मेडिकल स्टोर संचालक ने उन्हें वैध बिल उपलब्ध नहीं कराया।
परिवार ने दवाओं की खरीद और उनके वितरण से जुड़े तथ्यों की जांच कराने की मांग की है।
दवा की पर्ची, बिक्री संबंधी रिकॉर्ड और उपलब्ध औषधियों की जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि बच्ची को कौन-सी दवाइयां दी गई थीं।
परासिया थाने में लिखित शिकायत, गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग
बच्ची की मौत के बाद परिजन परासिया पुलिस थाने पहुंचे और संबंधित निजी क्लीनिक के चिकित्सक तथा मेडिकल स्टोर के खिलाफ लिखित शिकायत दी।
परिजनों ने घटना को चिकित्सकीय लापरवाही का मामला बताते हुए संबंधित चिकित्सक पर गैर-इरादतन हत्या का प्रकरण दर्ज करने और कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि किसी चिकित्सक के विरुद्ध आपराधिक लापरवाही या गैर-इरादतन हत्या का आरोप कानूनी रूप से सिद्ध होना अलग विषय है। इस संबंध में जांच, चिकित्सकीय विशेषज्ञों की राय और लागू कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होंगे।
पोस्टमार्टम के बाद मर्ग कायम, रिपोर्ट का इंतजार
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए शासकीय अस्पताल भेजा। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, चिकित्सक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की प्राथमिक जांच की जा रही है।
दवा की पर्ची और उपचार से जुड़े तथ्यों की तकनीकी पड़ताल के साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा डॉक्टरों के पैनल की राय का इंतजार किया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि इन रिपोर्टों के आधार पर बच्ची की मौत के कारणों को स्पष्ट करने और आगे की कानूनी कार्रवाई तय करने में मदद मिलेगी।
जांच में उठने वाले महत्वपूर्ण सवाल
इस मामले में चिकित्सकीय और पुलिस जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं की स्पष्टता आवश्यक होगी। इनमें बच्ची की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति, चिकित्सक द्वारा किया गया परीक्षण, लिखी गई दवाओं की मात्रा, उनके उपयोग की विधि तथा मौत के चिकित्सकीय कारण शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त मेडिकल स्टोर से दवाओं की बिक्री का रिकॉर्ड और संबंधित पर्ची भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिलहाल संबंधित चिकित्सक और मेडिकल स्टोर संचालक का पक्ष उपलब्ध नहीं है। इसलिए परिजनों के आरोपों को जांच पूरी होने से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
छिंदवाड़ा के चांदामेटा में दो वर्षीय यशवी तेकाम की मौत के मामले में परिजनों ने निजी क्लीनिक के डॉक्टर पर गलत दवा और लापरवाही का आरोप लगाया है। परासिया पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय विशेषज्ञों की राय आने के बाद ही मौत के कारण और संभावित कानूनी जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट होगी।



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