जबलपुर में इलाज के दौरान युवक की मौत, बिना डिग्री उपचार करने और एक्सपायरी ड्रिप लगाने का आरोप
बेलखाड़ू के खैरी गांव स्थित अश्विनी अस्पताल का मामला; नौ इंजेक्शन देने की जानकारी, पुलिस जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल किया सील।
जबलपुर। जिले के बेलखाड़ू क्षेत्र में स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान युवक की मौत के मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कटंगी थाना क्षेत्र के खैरी गांव स्थित अश्विनी अस्पताल में उपचार कराने पहुंचे युवक शेखर चौधरी की मौत के बाद पुलिस जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की जानकारी मिली है।
पुलिस से प्राप्त विवरण के अनुसार, युवक का इलाज करने वाले सतीश साहू के पास चिकित्सा संबंधी कोई वैध डिग्री या डिप्लोमा नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि उपचार के दौरान इस्तेमाल की गई एक ड्रिप से संबंधित सामग्री पर नवंबर 2025 की एक्सपायरी डेट दर्ज थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अश्विनी अस्पताल को सील कर दिया है। पुलिस ने सतीश साहू के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू की है।
ये विवरण उपलब्ध पुलिस जांच संबंधी जानकारी पर आधारित हैं। मृत्यु के चिकित्सकीय कारण की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है।
2 अक्टूबर को पेट में दर्द हुआ, परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे
कटंगी पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बेलखाड़ू के भट्टा मोहल्ला निवासी समीर चौधरी ने अपने भाई शेखर चौधरी की मौत को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के मुताबिक, 2 अक्टूबर को शेखर के पेट में अचानक तेज दर्द हुआ था। उसकी तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे उपचार के लिए खैरी गांव स्थित अश्विनी अस्पताल लेकर पहुंचे।
अस्पताल में युवक का रातभर उपचार किया गया। इसके बाद सुबह उसे घर ले जाया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद शेखर के हाथ-पैरों में तेज जलन होने लगी।
हालत बिगड़ने पर परिवार के सदस्य उसे दोबारा अश्विनी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां फिर उपचार शुरू किया गया, लेकिन कुछ समय बाद शेखर की मौत हो गई।
हाथ और कमर में नौ बार इंजेक्शन लगाने की जानकारी
पुलिस जांच में सामने आए विवरण के अनुसार, अस्पताल में उपचार करने वाले सतीश साहू ने शेखर के हाथ और कमर में कुल नौ बार इंजेक्शन लगाए थे।
इसके अलावा मरीज को दवाइयां भी दी गईं और सुबह तक उसका उपचार किया गया। अगले दिन तबीयत बिगड़ने पर दोबारा अस्पताल पहुंचने के बाद उसे इंजेक्शन और ग्लूकोज की ड्रिप लगाए जाने की जानकारी है।
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, दूसरी बार ड्रिप लगाए जाने के लगभग आधे घंटे बाद युवक की मौत हो गई। हालांकि इंजेक्शन या ड्रिप और मौत के बीच प्रत्यक्ष चिकित्सकीय संबंध स्थापित होना अभी बाकी है। इसके लिए पोस्टमार्टम, दवा परीक्षण और विशेषज्ञों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।
परिजनों के अनुसार उपचार के दौरान इस्तेमाल की गई सामग्री की जांच करने पर नवंबर 2025 की एक्सपायरी डेट दर्ज मिली। पुलिस ने संबंधित बोतल, ड्रिप और अन्य चिकित्सा सामग्री जब्त की है। सामग्री की वास्तविक स्थिति और मौत में उसकी संभावित भूमिका का निर्धारण जांच रिपोर्ट से होगा।
आधी भरी बोतल, ड्रिप, निडिल और दवाइयों के रैपर जब्त
युवक की मौत के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। जांच के दौरान अस्पताल से उपचार में इस्तेमाल की गई कई वस्तुओं को साक्ष्य के रूप में जब्त किया गया।
उपलब्ध पुलिस विवरण के अनुसार, जब्त सामग्री में आधी भरी हुई बोतल, ड्रिप, निडिल, इंजेक्शन की एक खाली शीशी और दवाइयों के खाली रैपर शामिल हैं।
जब्त निडिल पर निर्माण तिथि दिसंबर 2023 और एक्सपायरी नवंबर 2025 दर्ज होने की जानकारी है।
पुलिस इन सामग्रियों की जांच के माध्यम से उपचार में इस्तेमाल की गई दवाओं और उपकरणों से संबंधित तथ्यों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
सीसीटीवी फुटेज में सतीश साहू द्वारा उपचार करने की जानकारी
पुलिस ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी जांच के दायरे में ली है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फुटेज में शेखर चौधरी का उपचार सतीश साहू द्वारा किया जाना सामने आया।
बताया गया है कि उपचार के समय अस्पताल की वैध संचालक डॉ. सरिता साहू मौके पर मौजूद नहीं थीं।
पुलिस ने कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने वाले डीवीआर को भी अपने कब्जे में लिया है, ताकि उपचार के समय की गतिविधियों का परीक्षण किया जा सके।
सीसीटीवी रिकॉर्डिंग इस मामले में उपचार करने वाले व्यक्ति की पहचान, घटनाक्रम और अस्पताल में मौजूद लोगों की भूमिका समझने के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती है।
बीएमओ की जांच में वैध मेडिकल डिग्री नहीं होने की जानकारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पनागर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) को सूचना दी गई। इसके बाद बीएमओ अपनी टीम के साथ अश्विनी अस्पताल पहुंचे और वहां की व्यवस्थाओं तथा संबंधित दस्तावेजों का निरीक्षण किया।
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, बीएमओ की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि सतीश साहू के पास चिकित्सा कार्य करने के लिए कोई वैध डिग्री या डिप्लोमा नहीं है।
इस निष्कर्ष के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया।
अस्पताल सील, आरोपी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज
पुलिस ने जांच के आधार पर सतीश साहू के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। हालांकि उपलब्ध विवरण में प्राथमिकी की विशिष्ट धाराओं का उल्लेख नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल को सील किए जाने के बाद अब पुलिस की जांच में उपचार के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया, इस्तेमाल की गई दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की वैधता तथा अस्पताल की संचालन व्यवस्था से संबंधित सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं।
यह भी जांच का विषय है कि मरीज को दिए गए इंजेक्शन कौन-से थे, उनकी मात्रा क्या थी और संबंधित दवाओं के उपयोग के लिए आवश्यक चिकित्सकीय मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
युवक की मौत का वास्तविक कारण जांच से होगा स्पष्ट
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल शेखर चौधरी की मौत के वास्तविक कारण का है। परिजनों की शिकायत और पुलिस जांच में सामने आई परिस्थितियां गंभीर हैं, लेकिन किसी दवा, इंजेक्शन या एक्सपायरी सामग्री को सीधे मौत का कारण बताने के लिए चिकित्सकीय प्रमाण आवश्यक हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जब्त सामग्री का परीक्षण, विशेषज्ञ चिकित्सकीय राय और अन्य साक्ष्य इस मामले में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
पुलिस की विवेचना पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही संबंधित व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण होगा।
निजी अस्पतालों की निगरानी और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
खैरी गांव की यह घटना ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाती है। मरीज और उसके परिजन उपचार के लिए अस्पताल पहुंचते समय यह भरोसा करते हैं कि वहां प्रशिक्षित और अधिकृत चिकित्सकीय कर्मियों द्वारा इलाज किया जाएगा।
ऐसे में चिकित्सकीय योग्यता की जांच, दवाओं की एक्सपायरी पर निगरानी, अस्पतालों के दस्तावेजों का परीक्षण और उपचार संबंधी रिकॉर्ड का सुरक्षित रखरखाव बेहद आवश्यक है।
इस मामले में अस्पताल सील किए जाने के बाद संबंधित अधिकारियों की जांच से यह स्पष्ट होना जरूरी है कि अस्पताल में उपचार की व्यवस्था किन परिस्थितियों में संचालित हो रही थी।
जबलपुर के बेलखाड़ू क्षेत्र में स्थित अश्विनी अस्पताल में उपचार के दौरान शेखर चौधरी की मौत के मामले में पुलिस ने सतीश साहू के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। जांच में उसके पास वैध चिकित्सकीय डिग्री नहीं होने और उपचार सामग्री पर पुरानी एक्सपायरी डेट दर्ज मिलने की जानकारी सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल सील कर दिया है। युवक की मौत के वास्तविक कारण और संबंधित जिम्मेदारियों का निर्धारण आगे की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया से होगा।



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