जानिए, देश के वे मंदिर जहां जाते ही उतर जाता है सांपों का जहर और होती है हर मन्नत पूरी

 


हर धर्म में ऐसी कई मान्यताएं होती हैं, जिनका कोई वैज्ञाणिक प्रमाण नहीं मिलता है। इसके बावजूद उसे नकारा नहीं जा सकता। ऐसा ही कुछ हिंदू धर्म के इन मंदिरों में भी माना जाता है। मान्यता है कि इन मंदिरों में जाते ही विषैले सांपों का जहर उतर जाता है। हालांकि इसके पीछे वजह क्या है, इसका आज तक कुछ पता नहीं लग पाया है। आइए, जानते हैं देश के ऐसे ही चार राज्यों के उन मंदिरों के बारे में, जहां पहुंचते ही विषैले नागों का जहर भी निकल जाता है।

यहां हर किसी की है सांपों के साथ गहरी दोस्ती

रायपुर जिले के डिघारी गांव में भी लोगों की सांपों के साथ गहरी दोस्ती है। यहां कभी भी कोई न तो सांपों को मारता है और न ही सांप किसी को काटते हैं। कहते हैं कि अगर कहीं किसी को सांप ने काटा है और वह यहां आ जाए तो उसका जहर उतर जाता है। इसके पीछे कहानी यह बताई जाती है कि सदियों पहले किसी गांव में ब्राह्मण ने सांप की जान बचाई थी। मान्यता है कि यह उस सांप का ही वरदान है कि इस गांव में कभी किसी को सांप नहीं काटता। वहीं, दूसरी जगह से अगर कोई आए, जिसे सांप ने काटा हो तो उसकी जान बच जाती है।

इस स्थान पर स्मरण मात्र से उतर जाता है जहर

उत्तराखंड के जौनसार बावर के गांव सुरेऊ में सांप काट ले तो किसी भी तरह के इलाज की जरूरत नहीं होती। स्थानीय नागरिकों के मुताबिक यह गांव चारों ओर से जंगलों से घिरा है इसलिए यहां अमूमन सांप निकलते रहते हैं। लेकिन इनके काटने से आज तक किसी की मृत्यु नहीं होती। यहां स्मरण मात्र से ही सांपों का जहर उतर जाता है। बताया जाता है कि इस गांव में सदियों से नागों की पूजा होती आ रही है इसलिए मान्यता है कि इस गांव पर नाग देवता की कृपा है। गांव में हर साल 13 अप्रैल को नाग देवता की विशेष पूजा अर्चना का विधान है। इसमें शामिल होने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं। कहते हैं कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत नाग देवता पूरी करते हैं।

यह गांव भी है बेहद निराला

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले से 35 किलोमीटर दूर स्थित शंकरगढ़ का कपारी गांव बेहद निराला है। इस गांव का बच्चा बच्चा सांप से खेलता है। यहां सांपों को घर का सदस्य माना जाता है। इस गांव में सांपों के साथ बड़े क्या, बच्चे भी खूब खेलते हैं। लेकिन आज तक यहां सांपों ने किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। इस गांव को संपेरों का गांव भी कहा जाता है। हालांकि सांपों के साथ इस दोस्ती का राज क्या है, यह तो आज तक कोई नहीं जान पाया। लेकिन दावा है कि आज तक इस गांव में कभी भी किसी की मृत्यु सांपों के काटने से नहीं हुई।

इस मंदिर में आते ही उतर जाता है जहर

बिहार के विषहरा में उपस्थित आदि शक्ति मां की तो ऐसी महिमा है कि यहां आते ही सांपों का जहर उतर जाता है। जी हां, अगर किसी को सांप ने काटा हो और वह इस मंदिर में आ जाए तो मंदिर के प्रांगण में पहुंचते ही उसके शरीर से जहर उतर जाता है। इस मंदिर में प्रत्येक मंगलवार को भक्तों की भीड़ लगती है। श्रद्धालु इस दिन नाग देवता की दूध, लावा और बेलपत्र से पूजा करके उनसे सुख समृद्धि की मनौती मांगते हैं। मान्यता है कि यहां मांगी मुराद हमेशा पूरी होती है।

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