नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक परंपरा में पूजा-पाठ, व्रत, यात्रा और शुभ कार्यों से पहले तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण देखने की परंपरा रही है। पंचांग की गणना सूर्य और चंद्रमा की खगोलीय स्थितियों के आधार पर की जाती है और इसके समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं।
आज 1 अक्टूबर 2026, गुरुवार को सूर्योदय के समय आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि रहेगी। पंचमी दोपहर 12:35 बजे समाप्त होगी और इसके बाद षष्ठी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। धार्मिक पंचांग में आज षष्ठी श्राद्ध भी बताया गया है।
आज की तिथि, नक्षत्र और योग
| पंचांग | विवरण |
|---|---|
| दिन | गुरुवार |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
| पंचमी तिथि | दोपहर 12:35 बजे तक |
| इसके बाद | षष्ठी तिथि |
| नक्षत्र | रोहिणी, 2 अक्टूबर सुबह 4:27 बजे तक |
| योग | सिद्धि योग रात 9:18 बजे तक, इसके बाद व्यतीपात |
| करण | तैतिल दोपहर 12:35 बजे तक, इसके बाद गरज |
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
नई दिल्ली के स्थान-आधारित पंचांग के अनुसार आज सूर्योदय सुबह 6:14 बजे और सूर्यास्त शाम 6:07 बजे होगा। चंद्रोदय रात करीब 9:24 बजे और चंद्रास्त सुबह करीब 10:57 बजे बताया गया है।
सूर्य कन्या राशि में रहेगा, जबकि चंद्रमा वृषभ राशि में संचार करेगा। पंचांग की गणना स्थान आधारित होने के कारण अलग-अलग शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल और मुहूर्त के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
अभिजीत मुहूर्त कब है?
नई दिल्ली के लिए आज अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक रहेगा। हिंदू ज्योतिषीय परंपरा में अभिजीत मुहूर्त को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों को विशेष फलदायी माना जाता है। हालांकि मुहूर्त संबंधी मान्यताएं धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित हैं। किसी विशेष संस्कार या बड़े धार्मिक आयोजन के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित माना जाता है।
सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक रहेगा।
राहुकाल में नया काम शुरू करने से बचने की मान्यता
गुरुवार को नई दिल्ली में राहुकाल दोपहर 1:40 बजे से 3:09 बजे तक रहेगा। हिंदू ज्योतिषीय मान्यता में राहुकाल के दौरान नए और मांगलिक कार्य शुरू करने से बचने की परंपरा है।
इसके अलावा यमगण्ड सुबह 6:14 से 7:43 बजे तक और गुलिक काल सुबह 9:12 से 10:41 बजे तक रहेगा।
आज है षष्ठी श्राद्ध
पंचमी तिथि दोपहर में समाप्त होकर षष्ठी शुरू होने के कारण आज पितृ पक्ष का षष्ठी श्राद्ध किया जाएगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार जिन पितरों की मृत्यु हिंदू पंचांग की षष्ठी तिथि को हुई हो, उनके निमित्त इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है।
पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथि निर्धारित करने में केवल सूर्योदय की तिथि ही नहीं, बल्कि अपराह्न काल में व्याप्त तिथि को भी महत्व दिया जाता है। इसी कारण सूर्योदय के समय पंचमी होने के बावजूद आज षष्ठी श्राद्ध बताया गया है।
गुरुवार को विष्णु पूजा की धार्मिक मान्यता
गुरुवार का दिन सनातन परंपरा में भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की आराधना से जोड़ा जाता है। कई परिवारों में इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा, मंत्र-जप और दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। ये मान्यताएं धार्मिक आस्था और परंपरा पर आधारित हैं।
दक्षिण दिशा में रहेगा दिशाशूल
गुरुवार के दिन पंचांग के अनुसार दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना गया है। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दिशा में महत्वपूर्ण यात्रा शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा आवश्यक हो तो स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार बताए गए उपाय के बाद यात्रा करने की मान्यता है।
1 अक्टूबर को पंचमी दोपहर 12:35 बजे तक है और इसके बाद षष्ठी शुरू होगी। आज षष्ठी श्राद्ध है। रोहिणी नक्षत्र, सिद्धि योग और गुरुवार होने के कारण धार्मिक दृष्टि से दिन का विशेष महत्व माना जा रहा है।
नोट: पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त और दिशाशूल संबंधी विवरण हिंदू ज्योतिष एवं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। सूर्योदय और भौगोलिक स्थिति के कारण अलग-अलग शहरों में समय में अंतर हो सकता है। यहां दिए गए समय नई दिल्ली के स्थान-आधारित पंचांग के अनुसार हैं।



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