14 अक्टूबर का पंचांग: नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, आयुष्मान योग का संयोग
बुधवार को आश्विन शुक्ल चतुर्थी, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और देवी आराधना का धार्मिक महत्व।
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक अनुष्ठान, व्रत, त्योहार, यात्रा और शुभ कार्यों के लिए पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का विचार करने की परंपरा है।
14 अक्टूबर 2026, बुधवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि रहेगी। इस दिन शारदीय नवरात्र का चौथा दिन है और मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की आराधना की जाएगी।
14 अक्टूबर का प्रमुख पंचांग
- दिन: बुधवार
- मास: आश्विन
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: चतुर्थी, 15 अक्टूबर रात 1:13 बजे तक
- अगली तिथि: पंचमी
- नक्षत्र: अनुराधा, 15 अक्टूबर सुबह लगभग 4:03 बजे तक
- योग: आयुष्मान, रात लगभग 8:39 बजे तक
- चंद्र राशि: वृश्चिक
- सूर्य राशि: कन्या
- नवरात्र: चौथा दिन, मां कूष्मांडा पूजा
मां कूष्मांडा की पूजा से आयु, यश और बल प्राप्त होने की मान्यता
शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी की आराधना करने से भक्तों को दीर्घायु, स्वास्थ्य, यश, शक्ति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनके आठ हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला सुशोभित मानी जाती है। देवी का वाहन सिंह है।
भक्त इस दिन स्नान के बाद देवी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर पुष्प, फल और प्रसाद अर्पित करते हैं। दुर्गा स्तुति, मंत्रजप और आरती के साथ परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
आयुष्मान योग का धार्मिक महत्व
14 अक्टूबर को आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है। पंचांग गणना के अनुसार यह योग रात लगभग 8:39 बजे तक रहेगा, जिसके बाद सौभाग्य योग प्रारंभ होगा।
ज्योतिषीय मान्यताओं में आयुष्मान योग को दीर्घायु और शुभता से जोड़ा जाता है। श्रद्धालु इस योग में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य करना शुभ मानते हैं।
अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल
उपलब्ध पंचांग विवरण में अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और अमृतकाल शाम 4:37 से 6:23 बजे तक बताया गया है।
धार्मिक परंपराओं में अभिजीत मुहूर्त को शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं अमृतकाल को भी मंगलकारी समय माना गया है।
ध्यान दें: ये समय मूल पंचांग विवरण पर आधारित हैं। सूर्योदय और भौगोलिक स्थान के अनुसार स्थानीय मुहूर्त बदल सकते हैं।
राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल
मूल विवरण में निम्न समय दिए गए हैं:
| काल | दिया गया समय |
|---|---|
| राहुकाल | दोपहर 12:12 से 1:39 बजे |
| गुलिक काल | सुबह 10:46 से दोपहर 12:12 बजे |
| यमगंड काल | सुबह 7:53 से 9:20 बजे |
ज्योतिषीय परंपरा में राहुकाल और यमगंड काल में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि ऊपर दिए गए समयों का बुधवार और संबंधित शहर के स्थानीय पंचांग से मिलान आवश्यक है।
सूर्य कन्या और चंद्रमा वृश्चिक राशि में
पंचांग के अनुसार, सूर्य कन्या राशि और चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं में कन्या राशि को व्यावहारिकता और विश्लेषणात्मक सोच से जोड़ा जाता है, जबकि वृश्चिक राशि में चंद्रमा की स्थिति को भावनात्मक संवेदनशीलता से संबंधित माना जाता है।
इन ग्रह स्थितियों के आधार पर किए जाने वाले फलादेश पारंपरिक ज्योतिषीय व्याख्याएं हैं, न कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित परिणाम।
बुधवार का दिशाशूल
पारंपरिक ज्योतिष के अनुसार बुधवार को उत्तर दिशा में दिशाशूल माना जाता है। धार्मिक मान्यता में इस दिशा की यात्रा शुरू करने से पहले शुभ समय का विचार किया जाता है। हालांकि वास्तविक यात्रा के लिए मौसम, मार्ग और सुरक्षा परिस्थितियों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
14 अक्टूबर 2026, बुधवार को शारदीय नवरात्र में मां कूष्मांडा की आराधना की जाएगी। आश्विन शुक्ल चतुर्थी और आयुष्मान योग का संयोग इस दिन को धार्मिक दृष्टि से विशेष बनाता है। श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं।



पाठक प्रतिक्रियाएं
अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं है।