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भारतीय वायुसेना के 94 साल: आसमान में शौर्य, तकनीक में आत्मनिर्भरता; पीएम मोदी ने वायु योद्धाओं को किया सलाम

भारतीय वायुसेना 8 अक्टूबर 2026 को अपना 94वां स्थापना दिवस मना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वायु योद्धाओं के साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा की सराहना की। इस वर्ष ‘अचूक, अभेद्य और सटीक’ का संदेश वायुसेना की आधुनिक युद्धक क्षमताओं को रेखांकित करता है। वर्ष 1932 में स्थापित भारतीय वायुसेना आज अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और वायु रक्षा प्रणालियों के साथ देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

भारतीय वायुसेना के 94 साल: आसमान में शौर्य, तकनीक में आत्मनिर्भरता; पीएम मोदी ने वायु योद्धाओं को किया सलाम

नई दिल्ली। भारतीय आसमान की सुरक्षा, अदम्य साहस और राष्ट्रसेवा का गौरवशाली इतिहास समेटे भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को अपना 94वां स्थापना दिवस मना रही है। इस अवसर पर देशभर में वायु योद्धाओं के पराक्रम, बलिदान और समर्पण को याद किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वायुसेना दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा में जुटे जवानों के योगदान की सराहना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने वायु योद्धाओं को किया सलाम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारतीय वायुसेना के साहस और सेवा भावना की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि देश को अपने वायु योद्धाओं पर गर्व है। प्रधानमंत्री ने भारतीय आसमान की रक्षा में उनके अटूट समर्पण और वीरता को नमन किया।

‘अचूक, अभेद्य और सटीक’ के संदेश के साथ स्थापना दिवस

वायुसेना दिवस 2026 के लिए ‘Indian Air Force – Infallible, Impervious and Precise’ अर्थात ‘भारतीय वायुसेना – अचूक, अभेद्य और सटीक’ का संदेश सामने आया है। यह वायुसेना की युद्धक तैयारी, सटीक कार्रवाई, आधुनिक तकनीक और मजबूत वायु रक्षा क्षमताओं को रेखांकित करता है।

आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप में लड़ाकू विमानों के साथ ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, अत्याधुनिक रडार और मिसाइल रक्षा प्रणालियों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। भारतीय वायुसेना इन क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रही है।

बहुराष्ट्रीय अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ से सहयोग को बढ़ावा

वायुसेना दिवस के अवसर पर बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक प्रस्तावित इस अभ्यास में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और बांग्लादेश सहित मित्र देशों की वायुसेनाओं की भागीदारी बताई गई है।

ऐसे संयुक्त अभ्यासों का उद्देश्य विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच तालमेल, परिचालन अनुभव, प्रशिक्षण और आधुनिक युद्धक रणनीतियों के आदान-प्रदान को बढ़ाना है।

वायुसेना प्रमुख ने आधुनिक युद्धक तैयारियों पर दिया जोर

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने वायुसेना की परिचालन तैयारियों, तकनीकी आधुनिकीकरण और बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप क्षमताएं विकसित करने के महत्व पर जोर दिया। ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, मिसाइल प्रणालियां और संयुक्त सैन्य अभ्यास आधुनिक हवाई सुरक्षा के महत्वपूर्ण घटक हैं।

युद्ध के साथ आपदा राहत में भी अहम भूमिका

भारतीय वायुसेना केवल युद्ध और सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़, भूकंप, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी वायुसेना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती रही है। दुर्गम इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना, फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालना और आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना इसके मानवीय अभियानों का प्रमुख हिस्सा है।

1932 में हुई थी स्थापना, 1933 में शुरू हुआ परिचालन

भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी। अप्रैल 1933 में इसके शुरुआती परिचालन की शुरुआत चार वेस्टलैंड वापिति विमानों और छह प्रशिक्षित पायलटों के साथ हुई थी। उस समय एक छोटे सैन्य संगठन के रूप में शुरू हुआ यह सफर आगे चलकर भारत की प्रमुख रक्षा शक्तियों में बदल गया।

स्वतंत्रता के बाद भारतीय वायुसेना ने देश की रक्षा, युद्ध अभियानों, शांति अभियानों और मानवीय सहायता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समय के साथ इसके बेड़े, प्रशिक्षण, तकनीक और परिचालन क्षमताओं में व्यापक बदलाव आया है।

राफेल से तेजस तक, आधुनिक विमानों से मजबूत हवाई शक्ति

भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, मिग-29 और स्वदेशी एलसीए तेजस शामिल हैं। वहीं सी-17 ग्लोबमास्टर जैसे परिवहन विमान तथा चिनूक और अपाचे जैसे हेलिकॉप्टर विभिन्न सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एस-400 जैसी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली देश की हवाई सुरक्षा को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करती है।

स्वदेशी तकनीक और भविष्य की चुनौतियों पर नजर

भारतीय वायुसेना के सामने भविष्य में उन्नत लड़ाकू विमानों, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों, मानव रहित विमानों, साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की क्षमताओं को और मजबूत करने की चुनौती है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के प्रयासों के साथ स्वदेशी विमान निर्माण और तकनीकी अनुसंधान को भी महत्व दिया जा रहा है।

नभः स्पृशं दीप्तम् — गौरव और समर्पण के 94 वर्ष

भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ अर्थात ‘गौरव के साथ आकाश को छुओ’ उसकी पहचान का प्रतीक है। स्थापना के 94 वर्षों में वायुसेना ने साहस, अनुशासन, तकनीकी विकास और राष्ट्रसेवा की एक लंबी यात्रा तय की है। देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले वायु योद्धाओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का यह विशेष अवसर है।

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लेखक

Arti Lodhi

Editor In Chief

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